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    6 Years: बॉलीवुड को मिली आयुष्मान-भूमि की नई जोड़ी, 'दम लगा के हईशा' ने जीता नेशनल अवॉर्ड- रोचक बातें

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    वाईआरएफ के आंगन में पले-बढ़े प्रोड्यूसर मनीष शर्मा और डाइरेक्टर शरत कटारिया को भरोसा ही नहीं हो पा रहा था कि 'दम लगा के हईशा' (डीएलकेएच) के लिए उन्होंने हिंदी की बेस्ट फीचर फिल्म श्रेणी का प्रतिष्ठित नेशनल फिल्म अवार्ड जीत लिया है। आयुष्मान खुराना और भूमि पेडणेकर अभिनीत कल्ट क्लासिक डीएलकेएच के रिलीज होने की छठवीं वर्षगांठ पर यह डायनेमिक जोड़ी इस ताजा और सदाबहार रोमांस को बनाने की अपनी यात्रा के बारे में बता रही है।

    बतौर एक प्रोड्यूसर मनीष शर्मा की दम लगा के हईशा पहली फिल्म थी
    मनीष शर्मा कहते हैं कि कुछ लोग हिम्मत जुटाते हैं और अन्य लोगों को मैदान में ठेल दिया जाता है। यकीनन मैं बाद वाली किस्म का शख्स हूं। फिल्में प्रोड्यूस करना कभी मेरे खयाल का हिस्सा ही नहीं था। लेकिन मुझे आदित्य चोपड़ा नामक व्यक्ति की योजनाओं के बारे में कोई भनक तक नहीं थी। 'शुद्ध देसी रोमांस' अभी रिलीज ही हुई थी और मैं 'फैन' की तैयारियों में जुटा था। एक खुशनुमा सुबह आदि के द्वारा शुरू की गई बातचीत का नतीजा यह निकला कि मैं रातोंरात प्रोड्यूसर बन गया! यही जीवन है!!

    आयुष्मान खुराना और भूमि बनी बॉलीवुड की नई जोड़ी
    शरत कटारिया बॉलीवुड की नई जोड़ी के बारे कहते हैं कि लिखते वक्त आप ऐसी किसी भी चीज का खयाल दिमाग में नहीं लाते। आप अनिश्चय के भंवर में डूबे होते हैं और हमेशा यही कोशिश करते हैं कि अपने सर्वश्रेष्ठ विचार लिख डालें। ऐसी कोई अपेक्षा नहीं थी, और अगर आप पूछ ही रहे हैं, तो बता दूं कि लोगों की प्रतिक्रिया से मैं अभिभूत था, लेकिन ऐसा रिएक्शन मिलने की मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी।

    बतौर प्रोड्यूसर कौन सी कहानियां हैं, जो आप सुनाना चाहेंगे?

    बतौर प्रोड्यूसर कौन सी कहानियां हैं, जो आप सुनाना चाहेंगे?

    मनीष बताते हैं कि किसी फिल्म के साथ मैं चाहे एक प्रोड्यूसर, डायरेक्टर या कहानी लेखक के तौर पर जुड़ा रहूं, मैं हर भूमिका में अपनी सहज और मूल प्रवृत्ति पर बहुत ज्यादा भरोसा करता हूं। इस बात का इस चीज से गहरा ताल्लुक है कि जिंदगी के उस मकाम पर आपको क्या सही लगता है और आप किसी नैरेटिव, किसी किरदार या किसी जॉनर से बावस्ता हो जाते है। और आप अपनी सहज और मूल प्रवृत्ति का साथ निभाते हैं। और आप इस प्रक्रिया में अपनी ऊर्जा और समय को झोंक देते हैं। मेरा अंदाजा है कि अब तक इस सोच ने मुझे कामयाबी ही दी है।

    एक कल्ट फिल्म होने का दर्जा

    एक कल्ट फिल्म होने का दर्जा

    शरत बताते हैं कि मैं वाकई नहीं जानता; ईमानदारी की बात है कि इस बारे में मुझे कुछ नहीं पता! मैंने फिल्म को इसकी रिलीज के साल भर बाद फिर से देखा था, वह भी एक फिल्म फेस्टीवल में ऑडियंस के बीच बैठ कर... और आगे भी कुछ सालों बाद इसे कई बार देखा। मुझे अभी तक यह समझ में नहीं आया कि ऑडियंस के दिल में इसकी कौन सी चीज उतर गई। लेकिन मैं यह मान कर चल रहा हूं; इसे मेरा हायपोथेटिकल जवाब ही मानिएगा- हो सकता है कि फिल्म की कॉमेडी, किरदार या अभी भी कह नहीं सकता कि कौन सी चीज काम कर गई, या फिर इसमें नई चीज क्या थी! वजह यह है कि जब मैं ‘ताजा' शब्द सुनता हूं, तो मैं नहीं जान पाता कि इस फिल्म में कौन सी चीज ताजा थी। मुझे वाकई इसका कोई आइडिया नहीं है, मैं अपने समझने के लिए भी इसकी तह तक नहीं जा पाता। अगर मैं समझ पाया तो फिर से इसे दोहराऊंगा।

    मनीष शर्मा और शरत कटारिया की जोड़ी

    मनीष शर्मा और शरत कटारिया की जोड़ी

    मनीष अपनी इस जोड़ी पर कहते हैं कि हमने तो बस नैरेटिव की जमीनी और नॉस्टैल्जिक क्वालिटी के साथ ऑडियंस के जुड़ जाने भर की उम्मीद की थी। समय बीतने के साथ फिल्म को जो प्यार और गर्मजोशी हासिल हुई है, वह हमारे उस भरोसे और यकीन पर मुहर लगाती है। हर फिल्म की सफलता का अपना पैमाना होता है। इसकी कई अपेक्षाएं पूरी हुई हैं।

    आयुष्मान और भूमि की जोड़ी को मिला ढेर सारा प्यार

    आयुष्मान और भूमि की जोड़ी को मिला ढेर सारा प्यार

    शरत कहते हैं कि इसमें उनके टैलेंट के सिवा और किसी चीज का हाथ नहीं है! यह हर फिल्म के किरदार में पूरी तरह से उतर जाने तथा उनको समझाया गया किरदार ही बन जाने वाली उनकी प्रतिभा का कमाल है। मैं यकीन के साथ कह सकता हूं कि उनकी फिल्में और उनके पर्फॉर्मेंस कामयाब होने की यही वजह है। तो बिल्कुल, इतना प्यार पाने के पीछे विशुद्ध रूप से उनके खुद के टैलेंट का ही हाथ है।

    बेस्टर फीचर फिल्म के लिए दम लगा के हईशा को मिला था नेशनल अवार्ड

    बेस्टर फीचर फिल्म के लिए दम लगा के हईशा को मिला था नेशनल अवार्ड

    शरत का कहना है कि मेरे पास इसकी बड़ी प्यारी यादें हैं। एक बात तो यही थी कि मुझे इसके बारे में एक दोस्त के ट्वीट से पता चला। घोषणा होते वक्त मुझे इसके बारे में पता नहीं था, तो मेरे एक दोस्त ने इसको लेकर ट्वीट किया और मैं जान सका कि अवार्ड मिला है। छूटते ही मेरे मुंह से निकला- क्या सच में! मैं इसकी अपेक्षा नहीं कर रहा था और मुझे तो यह जानकारी भी नहीं थी कि अवार्ड घोषित हो चुके हैं या यह (फिल्म) अवार्ड के लिए सबमिट की गई है।

    प्रतिक्रिया

    प्रतिक्रिया

    वह कहते हैं कि आपको एक-एक करके थोड़ा-थोड़ा बताऊंगा कि क्या हुआ था। अवार्ड मिलने के बाद मेरी पहली प्रतिक्रिया कुछ ऐसी थी- ओ माय गॉड! अब मैं पूरे दिन काम नहीं कर पाऊंगा। पहले तो यह खबर ही मन में नहीं बैठ पा रही थी, लेकिन जब इसके बाद जब फोन घनघनाने लगे, तो यकीन हो गया।

    मुझे याद है कि मैंने मनीष को फोन किया था। मैंने कहा था कि फिल्म ने नेशनल अवार्ड जीत लिया है; न केवल हिंदी की बेस्ट फीचर फिल्म के लिए, बल्कि बेस्ट सिंगर (मोनाली) और सर्वश्रेष्ठ गीतकार (वरुण ग्रोवर) की कैटेगरी में भी अवार्ड मिला है। तो, वह भी उतने ही आश्चर्यचकित थे और बोले कि क्या बात कर रहे हो! और उसके बाद तो इतने कॉल आना शुरू हो गए कि फोन की घंटी रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। इतने सारे फोन आए जितने कि मेरी जिंदगी में कभी नहीं आए थे। यह वाकई जबर्दस्त अनुभव था, यह एक अभिभूत कर देने वाला अहसास था।

    English summary
    6 years of Dum Laga Ke Haisha: Maneesh Sharma and Sharat Katariya on their joy when they bagged National Film Award
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