फिल्मी सेट्स पर अब भी जारी है बाल मजदूरी : सारिका
मुम्बई, 17 फरवरी (आईएएनएस)। साठ के दशक के अंतिम वर्षो में बॉलीवुड में अभिनय की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री सारिका कहती हैं कि बीते चार दशकों में फिल्मी सेट्स पर बच्चों की दशा में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है और अब भी इसे 'बाल मजदूरी' कहा जा सकता है।
सारिका ने आईएएनएस से एक साक्षात्कार में कहा, "मूल समस्या अब भी वही है। ऐसा कहा जाता है कि सेट्स पर उन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षक आते हैं और उन्हें होमवर्क के लिए पर्याप्त समय दिया जाता है लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता है। ऐसा कभी नहीं हुआ है और स्थितियां जस की तस हैं।" सारिका दो बेटियों की मां हैं।
'आर्शीवाद', 'सत्यकाम', 'ज्योति' और 'हार जीत' जैसी फिल्मों में बाल कलाकार की भूमिका निभा चुकीं सारिका कहती हैं, "अब यह सब भड़कीला हो गया है लेकिन इसे अब भी बाल मजदूरी कहा जा सकता है। अब बच्चे ज्यादा तेज होते हैं और इसलिए उनके साथ काम करना आसान हो गया है।"
कई फिल्मों में बाल कलाकार के तौर पर काम कर चुकीं सारिका ने 'गीत गाता चल' से रोमांटिक भूमिकाओं की शुरुआत की थी। बाद में उन्होंने 'श्रीमान श्रीमती', 'सत्ते पे सत्ता' और 'राज तिलक' जैसी फिल्मों में विविध प्रकार की भूमिकाएं निभाईं।
अस्सी के दशक के आखिर में उन्होंने अभिनेता कमल हासन के साथ परिवार शुरू करने की खातिर फिल्मों से विदाई ले ली थी लेकिन 90 के दशक के आखिर में वह फिर बड़े पर्दे पर दिखीं। इस बार उन्होंने परंपरागत फिल्मों से अलग फिल्मों में अभिनय किया। 'तहान' (2008), 'मनोरमा सिक्स फीट अंडर' (2007), 'भेजा फ्राई' (2007) और 'परजानिया' (2005) उनकी महत्वपूर्ण फिल्में हैं। उन्हें 'परजानिया' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
इन दिनों उन्हें शुजीत सिरकार के निर्देशन में बनी 'शूबाइट' का इंतजार है। इस फिल्म में उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ अभिनय किया है। वह कहती हैं कि उनकी यह फिल्म एक बेहद संवेदनशील प्रेम कहानी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications











