बांग्ला सिनेमा को भा रही हैं विदेशी लोकेशन
प्रदीप्ता तपादर
कोलकाता, 13 फरवरी (आईएएनएस)। बांग्ला सिनेमा के लिए दक्षिणपूर्व एशियाई देश पसंदीदा शूटिंग स्थल बन गए हैं। दरअसल भारत की तुलना में विदेशी लोकेशंस पर कम खर्च फिल्मकारों को लुभा रहा है।
बांग्ला फिल्म निर्देशकों में पटाया के समुद्र तटों या बैंकाक और कुआलालम्पुर में शूटिंग करने का चलन विकसित हो गया है। अब गोवा और केरल की तुलना में विदेशी स्थलों पर शूटिंग ज्यादा पसंद की जा रही है।
बीते कुछ वर्षो के दौरान 'अमानुष', 'ले चक्का', 'मौन मने नाह', 'बोलो ना तुमी आमार', 'वांटेड' और 'जोश' जैसी फिल्मों के गीत विभिन्न दक्षिणपूर्व एशियाई देशों में फिल्माए गए हैं।
कुछ निर्देशकों और निर्माताओं का दावा है कि विदेशों में शूटिंग की मुख्य वजह आर्थिक है। उनका कहना है कि भारत की तुलना में इन देशों में गीतों की शूटिंग करना ज्यादा किफायती है।
फिल्म निर्माण कम्पनी 'श्री वेंकटेश फिल्म्स' के निदेशक महेंद्र सोनी ने आईएएनएस से कहा, "वास्तव में गोवा या देश के ही किसी अन्य स्थान पर शूटिंग की तुलना में बैंकाक या थाइलैंड में शूटिंग में कम खर्च आता है।"
सोनी ने कहा, "दक्षिण एशियाई देशों में दो गीतों की शूटिंग में करीब 10 लाख रुपये का खर्च आता है लेकिन उन्हीं गानों को गोवा या केरल में फिल्माने पर खर्च 20 लाख रुपये तक बढ़ जाता है।" उन्होंने कहा कि विदेशों में शूटिंग में कम लोगों की जरूरत होती है और गोवा या केरल में शूटिंग के लिए ज्यादा लोगों की जरूरत होती है।
फिल्मकार प्रभात राय कहते हैं कि विदेशों में शूटिंग की दो मुख्य वजहें हैं। एक तो यह कि वहां कम खर्च होता है और दूसरा इन देशों का पर्यटन विभाग बहुत से लुभावनी सुविधाएं भी देता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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