वित्तीय कमी से जूझ रही हैं एनिमेशन फिल्में : माधवन
मुम्बई, 3 फरवरी (आईएएनएस)। फिल्मकार ए. के. माधवन का कहना है कि पैसे, डिजाइन की समझ और मूल कहानियों की कमी के कारण भारतीय एनीमेशन उद्योग वैश्विक मानकों को पूरा नहीं कर पा रहा है। माधवन की एनीमेशन फिल्म 'अल्फा एंड ओमेगा' शुक्रवार को प्रदर्शित होने जा रही है।
एसोचैम के एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि एक अरब डॉलर का भारतीय एनिमेशन उद्योग 2012 तक 1.7 अरब डॉलर का हो जाएगा। वैसे 'क्रेस्ट एनिमेशन स्टूडियोज इंडिया' के सीईओ माधवन कहते हैं कि यह आसान नहीं है।
माधवन ने आईएएनएस से कहा, "भारतीय एनिमेशन क्षेत्र को वित्तीय परेशानी का सामना करना पड़ता है। दरअसल एनिमेशन फिल्मों के निर्माण में साधारण फिल्मों से कहीं अधिक खर्च आता है और भारतीय बाजारों में आपको इन फिल्मों के लिए इतना पैसा नहीं मिलता है।"
उन्होंने कहा, "दूसरी बात यह है कि हमारे पास वैश्विक किरदारों और स्थितियों को सृजित करने की समझ की कमी है। इसका मतलब यह नहीं है कि हम ऐसा नहीं कर सकते लेकिन मुझे लगता है कि इसमें कुछ साल का समय लगेगा। इसलिए जब कहानी की बात आती है तो भारत में वैश्विक समझ की कमी दिखाई देती है। इस क्षेत्र में अधिक काम किए जाने की आवश्यकता है।"
माधवन एनीमेशन फिल्मों के लिए नई कहानियों की बात करते हैं। वह कहते हैं कि ज्यादातर भारतीय एनीमेशन फिल्में पौराणिक कथाओं पर आधारित होती हैं। वह कहते हैं, "यदि आप मुझसे पूछें तो मुझे नहीं लगता कि आजकल के बच्चे इस तरह की कहानियों के प्रति ज्यादा उत्साहित होते हैं। वे ऑनलाइन गेम्स और वीडियो गेम्स ज्यादा पसंद करते हैं। दर्शकों को नई कहानियों की तलाश रहती है न कि वे बरसों से दिखाई जा रही कहानियों को बार-बार देखना पसंद करते हैं। मेरे विचार में भारतीय एनीमेशन उद्योग को बेहतर करने में पांच-छह साल का समय लगेगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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