अच्छे गीतों के लिए कवि होना जरूरी : गुलजार
एक पुस्तक के विमोचन के मौके पर गुलजार ने कहा, "अच्छे गीत लिखने के लिए आपको कवि होना चाहिए क्योंकि गीतों में मूल रूप से कविता होती है लेकिन दोनों के बीच महत्वपूर्ण अंतर यह है कि सभी कविताओं को गाया नहीं जा सकता जबकि गीत को गाए जाने योग्य होना पड़ता है।"
'रात पशमीने की' और 'पुखराज' जैसे कविता संग्रह प्रकाशित करा चुके गुलजार ने कहा, "गीतों में संगीत और धुनों के साथ मिश्रित होने के साथ ही एक गाने के रूप में उभरने की योग्यता होनी चाहिए। कविता के लिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं है।"
'मेरा कुछ सामान', 'यारा सिली सिली', 'दो दिवाने शहर में', 'तुझसे नाराज नहीं जिंदगी', 'छैया छैया', 'कजरा रे',और 'जय हो' जैसे गीत लिखकर पुरस्कार जीतने वाले गुलजार (74) ने कविता और गीतों के बारे में अंतर बताते हुए कहा, "कविता आपका बयान है।"
उन्होंने कहा, "कवि जो कुछ अनुभव करता है कविता में उसकी अभिव्यक्ति करता है। जबकि फिल्मों के गीत कई तरह के मानदंडों, सीमाओं जैसे कहानी, स्थिति, चरित्र और चरित्रों की भाषा से बंधे होते हैं। कविता में इस तरह का बंधन नहीं होता।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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