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    'लगान' के 20 साल: फिल्म की कहानी को हां करने में आमिर खान ने लिये थे 2 साल, खुद शेयर किया किस्सा

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    आशुतोष गोवारिकर के निर्देशन में बनी फिल्म लगान को आज 20 साल पूरे हो चुके हैं। ना सिर्फ आमिर खान के करियर की, बल्कि यह हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों की लिस्ट में शुमार होती है। फिल्म के 20 साल पूरे होने के मौके पर आमिर खान ने मीडिया से खास बातचीत की, जिसका फिल्मीबीट भी हिस्सा रहा था। यहां अभिनेता ने बताया कि लगान को हां करने में उन्हें पूरे 2 साल का वक्त लगा था।

    रिलीज होने के बाद 'लगान' ने नेशनल अवार्ड से लेकर ऑस्कर तक का सफर तय किया। लेकिन इस कहानी का जन्म कैसे हुआ, फिल्म की शुरुआत कैसे हुई, इस पर अभिनेता ने दिलचस्प किस्सा शेयर किया है।

    INTERVIEW- INTERVIEW- "लगान का रीमेक बनेगा तो रणवीर सिंह, रणबीर, विकी कौशल कोई भी भुवन का रोल कर सकता है"- आमिर खान

    आमिर खान ने कहा, "जब लगान की कहानी आशुतोष ने मुझे पहली बार सुनाई तो दो मिनट में कहा था कि, 'एक गांव है, वहां बारिश नहीं हो रही है, लगान नहीं दे पा रहे हैं वो लोग, तो अपना लगान माफ करवाने के लिए वो लोग शर्त लगाते हैं कि क्रिकेट खेलेंगे।' तो सच कहूं तो ये जो आइडिया था मुझे बहुत ही बुरा लगा। मेरी कुछ समझ में ही नहीं आया। मैंने आशु को भी कहा कि पिछली दो फिल्में तुम्हारी नहीं चली है, तो ठीक ठाक कहानी पर काम करो। तो वो थोड़ा मायूस हुआ।"

    तीन महीने में आशुतोष गोवारिकर ने स्क्रिप्ट पूरी की

    तीन महीने में आशुतोष गोवारिकर ने स्क्रिप्ट पूरी की

    "फिर वो तीन महीना गायब हो गया। फिर उसने एक दिन मुझे कॉल किया कि मेरे पास एक स्क्रिप्ट है, कब सुन सकता है। तो मैंने यूं ही पूछा कि क्या स्क्रिप्ट है, क्या लिखा है तुमने? तो उसने कहा कि तुम पहले सुन लो। फिर मुझे डाउट आया, तो मैंने कहा कि यार ये वही क्रिकेट वाली कहानी तो नहीं है, जो तुमने सुनाई थी। मैंने उसे कहा कि मैं तीन घंटा बर्बाद नहीं करने वाला है। लेकिन उसने कहा कि मैंने लिख ली है, एक बार सुन ले बस।"

    जब मैंने स्क्रिप्ट सुनी, तो मेरे होश उड़ गए

    जब मैंने स्क्रिप्ट सुनी, तो मेरे होश उड़ गए

    अभिनेता ने आगे बताया, "हम कुछ दिनों के बाद मिले और मैंने पूरी स्क्रिप्ट सुनी। जब मैंने पहली बार सुनी, तो मेरी हवाइयां उड़ गई। मैंने उसे कहा कि ये शानदार स्क्रिप्ट है। मैं रो रहा था, हंस रहा था। लेकिन मैंने कहा कि ये बहुत मुश्किल फिल्म है, कौन बना सकेगा। जो भी प्रोड्यूस करेगा वो इतना भरोसा नहीं करेगा। फिर मैंने उसे कहा कि पहले तू प्रोड्यूसर ढूंढ़ के ला, मैं ये कर लूंगा। फिर उसने पूरी इंडस्ट्री में सबको ये स्क्रिप्ट सुनाई, लेकिन लोगों को नहीं समझ आई। हम हर दो- तीन महीने में मिलते थे, इस पर बात करते थे। मैं हर कुछ महीने में उससे कहता था कि एक बार फिर स्क्रिुप्ट सुना। ऐसे कर करके मैंने तीन दफा सुना।"

    मैंने सोचा कि मैं डर क्यों रहा हूं!

    मैंने सोचा कि मैं डर क्यों रहा हूं!

    "जब भी वो स्क्रिप्ट सुनाता था, मैं भावुक हो जाता है। फिर एक रात मैंने सोचा कि मैं क्यों डर रहा हूं? जब हमलोग गुरु दत्त के बारे में बात करते हैं, शांताराम के बारे में बात करते हैं, के आसिफ, महबूब खान, बिमल रॉय.. क्या वो मेरी जगह होते तो डरते क्या! मैंने खुद से पूछा कि तुम उनकी तरह बनना चाहते हो तो हिम्मत भी दिखाओ। तो वहां से मुझे लगा कि मुझे ये चैलेंज लेना चाहिए, मुझे हिम्मत दिखाना चाहिए। मैंने सोचा कि यदि मुझे इस कहानी में एक्टिंग करनी है, तो प्रोड्यूस भी मुझे ही करनी होगी।"

    मैं प्रोड्यूसर नहीं बनना चाहता था

    मैं प्रोड्यूसर नहीं बनना चाहता था

    "मैंने कसम खाई थी कि मैं कभी प्रोड्यूसर नहीं बनूंगा क्योंकि मैंने अपने पिताजी को देखा था ये करते हुए। लेकिन लगान के लिए मुझे यह कदम उठाना पड़ा। मुझे फिल्म उसी तरह बनानी थी, जैसे आशुतोष ने सोचा था। कोई कम ज्यादा नहीं। फिर चौथी दफा मैंने आशु को कहा कि एक बार मुझे स्क्रिप्ट और सुना दो। और इस बार मेरे साथ मेरे अम्मी- अब्बा जान और रीना भी थे। ये पहली बार था, जब वो किसी नरेशन में मेरे साथ थे।"

    मुझे डेढ़- दो साल लगे थे इसे हां करने में

    मुझे डेढ़- दो साल लगे थे इसे हां करने में

    "जब स्क्रिप्ट की नरेशन खत्म हुई तो मैंने सबकी ओर देखा। मैंने अम्मी से पूछा कि आपको क्या लगता है, मुझे क्या करना चाहिए। तो अम्मी- अब्बा जान दोनों एक सेकेंड में समझ गए कि बहुत मुश्किल फिल्म है, लेकिन उन्होंने मुझे एक ही लाइन कही- "आमिर जब कहानी अच्छी होती है तो उसके आगे मत सोचो.. करो.. अच्छी कहानियां बहुत मुश्किल से मिलती है।" जब मैंने रीना से पूछा तो उन्होंने कहा कि, मुझे नहीं पता आपको करनी चाहिए या नहीं, लेकिन मुझे बहुत अच्छी लगी। तो वो एक दिन था, जब मैंने डिसाइड किया कि मैं इसमें एक्टिंग कर रहा हूं और मैं ही इसे प्रोड्यूस कर रहा हूं। तो मुझे डेढ़- दो साल लगे थे इसे हां करने में। ये फिल्म एक चैलेंज था, लेकिन मुझे खुशी है कि मैंने ये की।"

    English summary
    As Lagaan clocks 20 years, Aamir Khan shared about the first thought, first seed behind the idea of making Lagaan. He said, it took me 2 years to say yes to Lagaan.
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