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    'यश चोपड़ा को ‘तेरे लिए’ इतना पसंद था कि उन्होंने इसे आखिरी सांस तक अपनी रिंगटोन बनाए रखा'

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    शाहरुख खान, रानी मुखर्जी और प्रीति ज़िंटा स्टारर यश चोपड़ा की रोमांटिक फिल्म 'वीर ज़ारा' एक ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी। फिल्म की खूबसूरत कहानी दर्शकों के सर चढ़ कर बोली थी और इस बात ने वायआरएफ के इस शाहकार को एक टाइमलेस लव स्टोरी का दर्जा दिलाया। 'वीर ज़ारा' का म्यूजिक भी आयकॉनिक है, क्योंकि ऑडियंस का स्वागत स्वर्गीय मदन मोहन के 'तेरे लिए' जैसे अछूते और शानदार साउंडट्रैक के साथ किया गया था। यश चोपड़ा को यह गाना इतना पसंद था कि उन्होंने इसे आखिरी सांस तक अपनी रिंगटोन बनाए रखा।

    यश चोपड़ा इस फिल्म में गुजरे जमाने के संगीत का इस्तेमाल करना चाहते थे, जो 22 साल पहले की घटनाओं पर केंद्रित थी। उन्होंने अलग-अलग संगीतकारों के साथ सिटिंग्स की थीं लेकिन उनका काम नहीं बना। संयोग की बात है कि उस समय वायआरएफ में बतौर सीईओ काम कर रहे मदन मोहन के बेटे संजीव कोहली ने यश जी से जिक्र किया कि उनके स्वर्गीय पिता कुछ बिल्कुल कोरे/ कुछ रद्द किए हुए डमी गाने अपने पीछे छोड़ गए थे। यश चोपड़ा और आदित्य चोपड़ा ने उन धुनों और गानों को सुना और तुरंत फैसला कर लिया कि 'वीर ज़ारा' में उस्ताद का म्यूजिक ही इस्तेमाल किया जाएगा!

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    संजीव कोहली ने अपनी पुस्तक 'वीर-ज़ारा, द मेमॉयर्स ऑफ अ लव लीजेंड' में याद करते हुए लिखा है- "वीर-ज़ारा मेरा सपना सच होने जैसा था, एक ऐसा सपना जिसके बारे में मैंने कभी सोचा नहीं था कि यह कभी हकीकत में बदलेगा। जब मेरे पिता, संगीतकार स्वर्गीय मदन मोहन 1975 में गुजरे, तब उनकी उम्र मात्र 51 साल थी। अभी बहुत सारा संगीत रचा जाना बाकी था, दुनिया के साथ ढेर सारी धुनें साझा करना अभी शेष था, अभी बहुत कुछ हासिल किया जाना था! अनगिनत लोगों द्वारा उनको व्यापक रूप से एक ग्रेट कंपोजर माना जाता था, लेकिन बड़े बैनर, बड़े सितारों वाली फिल्में और लोकप्रिय एवार्ड उनकी झोली में कभी नहीं आए। दरअसल यह हकीकत उनके दिल में तीर की तरह चुभती रहती थी। उनके टेप सुरक्षित रख दिए गए थे, हालांकि पिछले कुछ सालों से वे क्षतिग्रस्त होते जा रहे थे और तकनीकी विकास को देखते हुए वे जल्द ही बेकार हो जाते।"

    वह आगे बताते हैं, "सन्‌ 2003 की बात है, एक दिन यश जी ने मुझसे कहा कि 6 सालों के बाद उन्होंने कोई फिल्म डाइरेक्ट करने का फैसला किया है, लेकिन यह एक ऐसी फिल्म है, जिसमें गुजरे जमाने के म्यूजिक की जरूरत पड़ेगी, एक ऐसा संगीत जो आजकल घुस आए पश्चिमी प्रभावों से पूरी तरह मुक्त हो। मेरे मुंह से सहज ही यह निकल गया कि मेरे पास गुजरे जमाने की मेलोडी वाले कुछ टेप पड़े हुए हैं, लेकिन उनको 28 सालों से मैंने नहीं सुना। इस सुझाव से वह उत्साहित नजर आए और उन्होंने काफी आश्चर्य जाहिर किया कि इससे पहले कभी मैंने इस बात का जिक्र नहीं किया था! उनके बेटे आदित्य चोपड़ा इस नई फिल्म की स्क्रिप्ट लिख रहे थे। आदि वर्तमान में जीने वाले व्यक्ति हैं और उन्हें कमर्शियल रूप से स्वीकार किए जाने वाले गानों की जरूरत थी। यहां नॉस्टैल्जिया और भावनाओं के लिए कोई जगह नहीं थी। केवल यश जी और आदि को ही पता था कि उन्हें क्या चाहिए। मुझे बिल्कुल पता नहीं था।"

    चुनिंदा अनसुनी धुनें अपने कंपोज किए जाने के करीब 50 सालों बाद रिकॉर्ड की गईं! ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था और बिलबोर्ड मैगजीन ने इसके महत्व के बारे में लिखा था। उस वक्त सॉन्ग ऑफ द इयर बन जाने वाला 'तेरे लिए' गीत 1975 की फिल्म 'मौसम' के गाने 'दिल ढूंढ़ता है' की एक रद्द की गई धुन पर आधारित था! सन्‌ 1981 में यश चोपड़ा की 'सिलसिला' से बतौर गीतकार अपना डेब्यू करने वाले जावेद अख्तर ने लगभग दो दशक बाद यश जी के साथ दोबारा काम किया था। उस वक्त लता मंगेशकर की उम्र 75 वर्ष हो चुकी थी। लेकिन इन गीतों को लता जी की आवाज मिलना उचित और उपयुक्त ही था, क्योंकि मूल रूप से मदन मोहन जी ने ये धुनें दशकों पहले लता जी के लिए ही कंपोज की थीं!

    संजीव बताते हैं कि गाने रिकॉर्ड होने में पूरे साल भर का वक्त लगा था। वह याद करते हैं कि यश चोपड़ा इस एलबम को लता मंगेशकर से ही गवाना चाहते थे! वह कहते हैं- "यश जी इस बात को लेकर एकदम स्पष्ट थे कि फीमेल सॉन्ग्स सिर्फ और सिर्फ लता जी ही गाएंगी। इस बात से मैं रोमांचित था क्योंकि मदन जी ने ये सारी धुनें लता जी के लिए ही बनाई थीं और अगर इनको लता जी ने नहीं गाया होता तो बात अधूरी रह जाती। लेकिन इसी के साथ-साथ मैं चिंतित भी था कि मदन जी के लिए 30 साल बाद गाना लता जी को बड़ा चैलेंजिंग लगेगा! उस वक्त उनकी सेहत भी अच्छी नहीं रहती थीं और लोग उनके बारे में जजमेंट पास करने में अनफेयर हो सकते थे। लेकिन उन्होंने आंतरिक शक्ति जुटाई और ऐसा गाया जैसा उनके अलावा दूसरा कोई गा ही नहीं सकता था।"

    जब पिता की धुनों पर लोगों ने भरपूर प्यार बरसाया तो बेटे संजीव की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह बताते हैं, "वीर-ज़ारा की बदौलत मेरी हर कल्पना एक ही झटके में पूरी हो गई। मदन जी की धुनों ने भारत की एक सबसे बड़ी और सबसे कामयाब फिल्म का साउंडट्रैक तैयार किया, जिसे भारत के सबसे सफल प्रोड्यूसर-डाइरेक्टर ने बनाया था। आज के टॉप स्टार शाहरुख खान, प्रीति ज़िंटा और रानी मुखर्जी इस फिल्म की स्टार कास्ट में शामिल थे। और क्या गजब का संयोग था कि अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी मदन जी की धुनों पर एक बार फिर से नाचे और एक बार फिर उनके गाने चार्ट में लगभग पूरे साल टॉप पर रहे। आखिरकार मदन जी ने कई लोकप्रिय एवार्ड भी जीते।''

    English summary
    16 Years Of Veer Zaara: yash chopra always use tere liye song as ringtone till his last breath
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