राजेश खन्ना की श्रृद्धांजलि से शुरु हुआ ओशियन सिनेफैन फिल्म फेस्टिवल

10 दिनों तक चलने वाले इस फिल्म फैस्टिवल में दुनिया के हर कोने से चुनकर लाई गई बेहतरीन फिल्मों को दिखाया जाएगा। इस फैस्टिवल की निर्देशक इंदु श्रीकांत ने बताया "जब हमने दो साल के लंबे समय के बाद इस फैस्टिवल को करने की सोची तो हमें पता था कि यह बहुत कठिन होगा। लेकिन हमें यकीन था की यह पहले से बेहतर और ज्यादा मनोरंजक होगा।"
"इस फैस्टिवल को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है और इसे लेकर हम बहुत खुश हैं। और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में भी इस फैस्टिवल को इतनी ही अच्छी प्रतिकिया मिलेगी।"
फेस्टिवल के उद्घाटन के दिन इंडियन सिनेमा के दिग्गजों का सम्मान किया गया और इंडियन सिनेमा के 100 साल पूरे होने की खुशी मनाई गई। साथ ही 1943 में रिलीज हुई फिल्म हंटरवाली की बेटी, 1949 रिलीज महल, 1969 रिलीज आराधना और 1972 मे रिलीज हुई फिल्म राजा जानी के पोस्टर लगाए गए।
फेस्टिवल के पहले दिन की शुरुआत में जापान में बनी फिल्म 'असुरा' प्रदर्शित की गई जो कि बहुत ज्यादा हिंसा की वजह से जापान में बैन कर दी गई थी। इस सेरेमनी के दोरान इजिप्ट के फिल्म क्रिटिक समीर फरीद जिन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया था भी मौजूद थे। समीर सिर्फ इजिप्ट में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अपने क्रिटिसिज्म के लिए जाने जाते हैं। समीर ने अब तक कुल 60 किताबें लिखी हैं जो कि खासतौर पर अरब और इजिप्ट सिनेमा को संबोधित करती हैं।
फेस्टिवल के चेयरमैन नेविले टूली ने इस बार फेस्टिवल के प्रचार के बारे में बताया "हमने इस बार फेसबुक और ट्वीटर को इस फेस्टिवल के प्रचार स्त्रोत के रुप में चुना है। हमें पहले लगा था कि यह दोनों माध्यम सिर्फ यंग लोगों के लिए ही हैं लेकिन हम गलत थे। यह एक नयी दुनिया है लोगों तक पहुंचने की।"
ओशियन फिल्म फेस्टिवल में इस बार 38 देशों(चाईना, इस्टोनिया, इंडोनेशिया, ईरान,इस्राईल, जापान, फिलीपींस,साउथ कोरिया, ताईवान, थाईलैंड, टर्की, मोरक्को और अल्जीरिया आदि ) से चुनी गई कुल 175 फिल्में दिखाई जाएंगी। और यह फेस्टिवल 5 अगस्त तक चलेगा। इस फेस्टिवल की टीम ने दुनिया भर के सिनेमा से बेहतरीन और लैंडमार्क फिल्में चुनकर लाई हैं जो कि सेंसर बोर्ड के नियमों से हटकर बनाई गई हैं।


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