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    MISTAKES: हमें मिली संजू की ये 10 गलतियां जो बहुत ज़्यादा भारी पड़ीं, लग गया पहला झटका

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    Sanju: 3 Biggest MISTAKES of Rajukumar Hirani's Sanju; Shocking | FilmiBeat

    रणबीर कपूर स्टारर संजू लोगों को बेहद पसंद आ रही है। फिल्म को लेकर फैन्स दो भाग में बंट चुके हैं। पहले वो जो इसे शानदार तरीके से बनाई गई बायोपिक है। वहीं दूसरा ग्रुप वो है जो ये मान रहा है कि फिल्म केवल एक प्रोपोगांडा है संजय दत्त की इमेज साफ करने के लिए।

    हालांकि राजकुमार हिरानी ने साफ किया कि उन्होंने ये फिल्म केवल इसलिए बनाई है क्योंकि ये एक अच्छी कहानी है। फिल्म की शुरूआत भी इसी डायलॉग के साथ होती है - खराब फैसले, बहुत ही अच्छी कहानियां बन जाते हैं।

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    हालांकि फिल्म पूरी तरह से संजय दत्त पर बनी बायोपिक नहीं है। इसका मुख्य प्लॉट संजय दत्त के जीवन में दो बड़े मुद्दों पर केंद्रित है - ड्रग्स और जेल। वहीं फिल्म में छोटे छोटे हिस्सों में संजय दत्त की ज़िंदगी की सभी बड़ी बड़ी गलतियों को समेटने की बेहतरीन कोशिश की गई है।
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    पर फिल्म वहीं जाकर थोड़ी सी खटकती है जब आपको ये लगने लगे कि संजय दत्त की ज़िंदगी का सबसे बड़ा विलेन था उनके हालात। उन्होने खुद कुछ किया नहीं, बस उनके साथ चीज़ें होती चली गईं।

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    लेकिन अच्छी बात ये है कि हर किसी ने फिल्म को अच्छा कहा लेकिन फिल्म के पीछे की इस थ्योरी से कोई सहमत नहीं है। इसके बावजूद लोग फिल्म की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं और ये शायद एक बेहतर दर्शक की पहचान है। जो बॉलीवुड के लिए एक देन साबित हो सकती है।
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    बहरहाल, बात करें संजय दत्त के जीवन की गलतियों की तो उन्होंने गलतियां नहीं कांड किए हुए हैं। आपको बताते हैं संजय दत्त के जीवन की 10 बड़ी Mistakes जो फिल्म ने दिखाई -

    सुसाईड

    सुसाईड

    संजय दत्त को जब 2011 दोबारा जेल जाने की सज़ा का एलान हुआ तो वो टूट चुके थे और उन्होंने अपनी जान लेने की कोशिश की थी। वो नहीं चाहते थे कि उनके बच्चों को कोई टेररिस्ट के बच्चे बोले। हालांकि सही वक्त पर उनकी पत्नी ने उन्हें बचा लिया।

    ड्रग्स

    ड्रग्स

    संजय दत्त ने जब पहली बार ड्रग्स लिया तो चलिए बेवकूफी में लिया। दूसरी बार लिया जब उनकी मां बीमार थी। अब ये बेवकूफी या बचपना नहीं था। ये उनकी चॉइस थी। और जब आप किसी चीज़ का चुनाव करते हैं तो वो बस आपकी ज़िम्मेदार होने या गैर ज़िम्मेदार होने का सुबूत होती है।

    Ego रखना

    Ego रखना

    संजय दत्त में एक 21 साल की उम्र के लड़के तके हिसाब से काफी ज़्यादा अहम था। उन्होंने जब पहली बार ड्रग्स किया तब वो अपने डैड से नाराज़ थे। और ये नाराज़गी भी केवल इसलिए थी क्योंकि संजय अपना काम ढंग से नहीं कर रहे थे।

    कोकेन

    कोकेन

    संजय के ड्रग्स का सिलसिला काफी लंबा चला। कोकेन और चरस, गांजा उन्हें इतना प्यारा था कि एक तरफ उनकी मां कोमा में थी और वो अपनी बहनों को अपनी ज़िम्मेदारी पर यूएस लेकर जा रहे थे। लेकिन साथ में गैर कानूनी चरस के साथ। ये जानते हुए कि अगर पकड़े गए तो बहनों को भी जेल हो सकती है। कुल मिलाकर संजय दत्त को ज़िम्मेदारियां पसंद ही नहीं थीं।

    गर्लफ्रेंड के बाप की बेइज़्जती

    गर्लफ्रेंड के बाप की बेइज़्जती

    संजय दत्त अपनी गर्लफ्रेंड को लेकर कितना सीरियस थे पता नहीं लेकिन फिर भी नशे में उसके पिता के साथ बेइज़्जती करना और फिर उसी नशे में पिता की मौत पर तमाशा करने के लिए गैर ज़िम्मेदारी की सारी सीमाएं लांघनी पड़ेंगी।

    रीहैब से भागना

    रीहैब से भागना

    आखिरकार पिता से मदद मांगने के बाद, संजय दत्त को रीहैब में भेजा गया। उनके पिता के ऊपर खर्चों की बारिश हो चुकी थी। फिर भी उन्हें अमरीका के बेस्ट रीहैब सेंटर भेजा गया। लेकिन वहां से भी संजय दत्त भाग गए।

    गर्लफ्रेंड को धोखा

    गर्लफ्रेंड को धोखा

    अपने चरस की लत में वो इतना डूबे थे कि संजय दत्त अपनी ही शादी में नहीं पहुंचे थे। इतना ही नहीं, वो अपनी ही होने वाली बीवी के मंगलसूत्र को बेच कर अपने लिए फूंकने का माल खरीद चुके थे।

    दोस्त को धोखा

    दोस्त को धोखा

    संजय दत्त की ज़िंदगी में दो लोग खास थे - एक पिता और एक दोस्त। उन्होंने बुरा किया हो या फिर बहुत बुरा, दोनों डटकर उनके साथ खड़े रहे। लेकिन उसी दोस्त की गर्लफ्रेंड के साथ सोने से पहले संजय दत्त ने दो बार नहीं सोचा। उनकी 308 गर्लफ्रेंड की लिस्ट में एक दोस्त की गर्लफ्रेंड भी शामिल थी।

    डर जाना

    डर जाना

    संजय दत्त की सबसे बड़ी गलती थी अंडरवर्ल्ड से इतना डर जाना कि अंडरवर्ल्ड की दोस्ती कुबूल कर लेना। उन्हें पता था कि शहर में भारी मात्रा में असलहे आ रहे हैं। उन्होंने किसी से नहीं पूछा क्यों। वो उन लोगों के साथ उठते बैठते थे क्योंकि उन्हें डर था कि परिवार के साथ कुछ ना हो जाए।

    करियर को हल्के में लेना

    करियर को हल्के में लेना

    जब संजय के लिए चीज़ें थोड़ी सी ठीक हुईं तो उन्होंने करियर को हल्के में लेना शुरू कर दिया। उनके पास जितनी फिल्मों की स्क्रिप्ट आती थी वो उसे पढ़ते ही नहीं थे। मुन्नाभाई एमबीबीएस में इन्हीं में से एक थी।

    पिता से दूरी रखना

    पिता से दूरी रखना

    संजय दत्त ने ज़िंदगी भर अपने पिता की तरह बनने की कोशिश में दोनों के बीच एक दीवार बना ली थी। जिसे उनके पिता ने हर कदम पर तोड़ने की कोशिश की। और जब तक संजू ने ये दीवार लांघी तब तक काफी देर हो चुकी थी।

    अब चूंकि राजकुमार हिरानी ने ये फिल्म इसलिए बनाई है कि लोग संजू की गलतियों से कुछ सीखें तो उम्मीद है कि संजय दत्त की गलतियों से आपने कोई सीख ली होगी। और कुछ नहीं तो रणबीर कपूर आपको इन गलतियों के लिए काफी बोझ दे सकते हैं। तो तुरंत संजू का टिकट कटाइए और फिल्म देखकर आइए।

    English summary
    10 Mistakes Sanju Should not have made - Ranbir Kapoor - Rajkumari Hirani's Sanjay Dutt biopic.

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