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    भारतीय फिल्मों में काम करना कठिन है : जाकिर

    By Neha Nautiyal
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    तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन ने आठ साल के अंतराल के बाद एक क्रासओवर फिल्म 'फॉर रियल' से संगीत निर्देशन के क्षेत्र में वापसी की है।

    वह कहते हैं कि उन्होंने ज्यादा भारतीय फिल्मों पर काम नहीं किया है क्योंकि उनके लिए यह कठिन हो जाता है। वह भारतीय संगीत परिदृश्य पर उभरी नई प्रतिभाओं से बहुत प्रभावित हैं।

    जाकिर बताते हैं, "'फॉर रियल' तीसरी फिल्म है जिसमें मैंने संगीत दिया है। मैं ज्यादातर समय भारत में नहीं होता हूं, इसलिए भारतीय फिल्मों पर काम करना कठिन हो जाता है।"

    उन्होंने कहा, "इसके साथ मुझे संगीत निर्देशन के काम की तलाश भी नहीं है। यदि कोई बहुत अच्छा प्रस्ताव मेरे पास आता है और मुझे वह आकर्षक लगता है तो मैं उसे करता हूं।"

    ग्रैमी पुरस्कार विजेता जाकिर आमतौर पर अमेरिका में रहते हैं। वह सई परांजपे की फिल्म 'साज' (1998) में और अपर्णा सेन की 'मि. एंड मिसेज अय्यर' (2002) में संगीत निर्देशन कर चुके हैं।

    'फॉर रियल' में संगीत निर्देशन की स्वीकृति देने पर जाकिर कहते हैं, "फिल्म की निर्देशक सोना जैन ने मुझे 'फॉर रियल' में संगीत देने के लिए राजी किया।" उन्होंने कहा, "जब वह मेरे पास आईं और फिल्म के संबंध में बताया तो मुझे उसकी अवधारणा पसंद आई। मैं सोना में अपनी बेटी को देख सकता था।"

    सोना द्वारा निर्देशित, लिखित व निर्मित यह फिल्म एक छह वर्षीय लड़की की कहानी है जो अपने परिवार में कलह के एक पल की साक्षी बनती है। 'फॉर रियल' भारत में 17 सितंबर को प्रदर्शित होगी। इसमें भारतीय मूल की ब्रिटिश अभिनेत्री सरिता चौधरी ने अभिनय किया है।

    फिल्म में पांच गीत हैं। जाकिर बताते हैं कि सभी गीतों को दृश्यों और किरदारों को ध्यान में रखकर लिखा गया है और संगीत में विभिन्न वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल हुआ है।

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