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    पंकज उधास को आज के संगीत से है शिकायत

    By Staff
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    फिल्म अभिनेता और गायक लकी अली ने अभी कुछ दिन पहले बयान दिया था कि उन्हे बॉलीवुड का हिस्सा बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है, क्योंकि यहाँ हो रहे काम को वह काम नहीं मानते । अब इसी तरह की शिकायत पंकज उधास ने भी की है।

    देश के प्रख्यात गजल गायकों में शुमार पंकज उधास महसूस करते हैं कि संगीत जगत बुरी अवस्था से गुजर रहा है क्योंकि इसमें गुणवत्ता नहीं है और केवल इसके प्रचार-प्रसार पर ही ध्यान दिया जाता है।

    एक संगीत समारोह के लिए चण्डीगढ़ पहुंचे पंकज उधास ने आईएएनएस से एक साक्षात्कार में कहा, "आजकल, संगीत की एक नई पीढ़ी ने जन्म ले लिया है, जिसे परिभाषित नहीं किया जा सकता। अब केवल संगीत के प्रचार-प्रसार पर ही ध्यान दिया जाता है और दुर्भाग्य से इसमें कोई सार या गहराई नहीं होती।"

    उन्होंने कहा, "गायक और संगीतकार सृजनात्मकता के क्षेत्र में बहुत समझौता कर रहे हैं और इसका हमारी गजलों, लोक संगीत और भक्ति संगीत पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।"

    "हमारी फिल्मों के संगीत में भी बहुत बड़ा बदलाव हो रहा है। 60, 70 और 80 के दशक का संगीत अच्छा था और हम आज तक उस संगीत को याद करते हैं। लेकिन वर्तमान संगीत में कुछ खास नहीं है। मैं उम्मीद करता हूं कि यह दौर जल्दी ही गुजर जाएगा।"

    पद्मश्री से सम्मानित उधास 1986 में आई फिल्म 'नाम' में अपनी गजल 'चिट्टी आई है' से बेहद मशहूर हो गए थे। उनकी गैर फिल्मी गजलों में 'आप जिनके करीब होते हैं', 'आहिस्ता कीजिए बातें', 'चांदी जैसा रंग है तेरा', 'दीवारों से मिलकर', 'देख के तुमको क्या होता है' और 'घूंघरू टूट गए' बेहद प्रसिद्ध हैं।

    58 वर्षीय उधास को डर है जल्दी ही फिल्मों से गीत गायब होने लगेंगे। वह कहते हैं, "सिनेमा हमारे संगीत का सबसे बड़ा स्रोत है लेकिन मुझे लगता है कि अगले दो-तीन वर्षों में हमारी फिल्मों में कोई संगीत नहीं होगा।"

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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