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बॉलीवुड से दूर हुए पारंपरिक वाद्य यंत्र

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मुंबई। एक जमाना था जब हिन्दी सिनेजगत में पारंपरिक वाद्य यंत्रों का बहुत बोलबाला हुआ करता था। सारंगी, तबला और हारमोनियम जैसे वाद्य यंत्रों के स्वर लंबे समय तक फिल्म उद्योग में अपनी मिठास घोलते रहे लेकिन आज बॉलीवुड में अत्याधुनिक साउंड तकनीकों के बीच पारंपरिक यंत्रों के स्वर फीके पड़ते जा रहे हैं। दुनिया भर में सोमवार को 'विश्व संगीत दिवस' मनाया जा रहा है और इसके लिए इला अरूण, कैलाश खेर और सुखविंदर सिंह जैसी मशहूर हस्तियों ने अपने पसंदीदा पारंपरिक यंत्रों के बारे में बातचीत की।

आईएएनएस से बातचीत के दौरान इला अरूण ने कहा, "मै हारमोनियम को बजाना पसंद करूंगी क्योंकि यह शास्त्रीय संगीत तथा हमारी परंपरा को बचाए रखेगा। यह एक ऐसा वाद्य यंत्र है जिसका प्रयोग शास्त्रीय और लोक संगीत दोनों में किया जाता है। यह हमारी संस्कृति के मूल में है और इसके प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए मैं कुछ करना चाहूंगी। "

वहीं मशहूर गायक कैलाश खेर ने कहा, "मेरे लिए इस तरह की कोई बात नहीं है कि मैं किसी पारंपरिक वाद्ययंत्र को बचाना चाहता हूं। मैने अपने बैंड कैलाश के साथ मिलकर अपने एलबम में कई वाद्ययंत्रों का प्रयोग किया है। हमारे बैंड में एक संगीतकार भी है जो 24 तरह के वाद्य यंत्रों का प्रयोग करता है। ये वाद्य यंत्र आसानी से उपलब्ध नहीं हैं क्योंकि प्राय: इनका प्रयोग नहीं किया जाता है।"

गायक मीका ने कहा, "एक सच्चे संगीतकार के लिए सभी पारंपरिक भारतीय वाद्य यंत्र महत्वपूर्ण होते हैं लेकिन मै विशेष तौर पर सारंगी को पंसद करता हूं। ऐसे लोग बहुत कम हैं जो सारंगी का उपयोग करते हैं।" सलीम मर्चेट ने अपने पसंदीदा वाद्य यंत्र के बारे में बताया, "मै सारंगी को प्रोत्साहित करना पसंद करूंगा। मै महसूस करता हूं कि यह गायकी के बहुत करीब है।"

राघव सच्चर ने कहा, "मैं तबले का समर्थन करना चाहूंगा। भारतीय संगीत में यह एक बेहतरीन वाद्य यंत्र है। यह एक कठिन वाद्ययंत्र है और इसमें महारत हासिल करने के लिए वर्षो तक अभ्यास करना पड़ेगा।" अनूप जलोटा ने बताया, "मै सारंगी को पसंद करता हूं। इससे जादुई आवाज निकलती है।"

सुखविंदर सिंह ने आईएएनएस को बताया, "मै महसूस करता हूं कि एकार्डियन नामक वाद्य यंत्र को बचाने की जरूरत है क्योंकि यह बहुत ही प्राकृतिक आवाज उत्पन्न करता है।"वहीं दूसरी तरफ साजिद ने कहा कि वह माउथआर्गन को बचाना पंसद करेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा में मधुर आवाज उत्पन्न करने वाला एक सुनहरा वाद्य यंत्र है जो एक प्रकार से नायक को एक अनूठा आयाम देता है।

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