गायिका आबिदा के लिए सूफी संगीत है सेवा
56 वर्षीय आबिदा ने कहा, "मुझे लगातार फिल्मी प्रस्ताव मिल रहे हैं। यश चोपड़ा, सुभाष घई और कई अन्य फिल्मकारों ने उनकी फिल्मों में गाने के प्रस्ताव रखे हैं लेकिन मैंने खुद को सूफी संगीत में डुबो दिया है और मैं दुनियाभर में सूफी संदेश फैलाना चाहती हूं।
वह कहती हैं कि सूफी संदेश फैलाने के लिए बहुत समय की आवश्यकता है। इसीलिए वह अब तक किसी फिल्मी प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति नहीं दे सकी हैं।
सूफी संगीत का दखल बॉलीवुड फिल्मों में बढ़ता जा रहा है। अब लगभग हर दूसरी बॉलीवुड फिल्म में कम से कम एक सूफी गीत जरूर होता है। फिल्मों में सूफी संगीत के चलन पर आबिदा कहती हैं कि उनके गीत 'थैंयां-थैंयां' पर आधारित 'छैयां छैयां' ('दिल से') से बॉलीवुड में सूफी संगीत की शुरुआत हुई।
उन्होंने कहा, "इसके बाद सूफी संगीत फैलने लगा और कई फिल्मों में इस तरह के गीत शामिल हुए। सूफी संगीत बॉलीवुड में बहुत लोकप्रिय है, यह बहुत अच्छा है। सूफी गीत प्रेम और मानवता को बरकरार रखते हैं। इसीलिए इस तरह के गीतों से लोग सम्पर्क स्थापित कर लेते हैं और ये गीत उनकी आत्माओं को छूते हैं।"
आबिदा सिंधी मूल की गायिका हैं। वह गजल और उर्दू प्रेम गीत गाती हैं लेकिन उन्हें सूफी शायरों के कलाम सबसे ज्यादा पसंद है।
उनके गीत 'दमा दम मस्त कलंदर', 'तेरे इश्क नचाया' और 'हो जमालो' बेहद लोकप्रिय हैं।


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