'बहुत कुछ था पंचम के ख़ज़ाने में'

उन्हें याद करते हुए प्रख्यात गीतकार जावेद अख़्तर कहते हैं, "आरडी बर्मन ने संगीत प्रेमियों को जितना दिया, उससे कहीं ज़्यादा वो दे सकते थे. हमें उनसे जो मिला वो तो उनके ख़ज़ाने का छोटा सा हिस्सा था. पंचम अगर ज़िंदा होते तो हमें उनके इस संगीत के ख़ज़ाने से और भी बहुत कुछ मिलता."
जावेद अख़्तर आगे कहते हैं, "जो बड़े और टैलेंटेड लोग होते हैं, वक़्त के साथ उनकी महत्ता बढ़ती चली जाती है. आरडी उनमें से एक हैं. जैसे-जैसे समय गुज़रता जा रहा है, नए संगीतकारों और गायकों के मन में उनके प्रति श्रद्धा बढ़ती जा रही है."
आर डी बर्मन की पत्नी और महान गायिका आशा भोंसले कहती हैं कि वो पंचम के संगीत को बहुत याद करती हैं. आशा कहती हैं कि घर पर ही रिहर्सल के लिए उनका एक अलग कमरा था, जहां वो गायकों के साथ रियाज़ करते थे.
आरडी बर्मन की आख़िरी फ़िल्म 1942 अ लव स्टोरी में गाना गा चुके कुमार सानू पुराने दिन याद करते हुए बताते हैं कि जब वो संघर्ष कर रहे थे उन दिनों भी आरडी बर्मन उन्हें अपने रिकॉर्डिंग स्टूडियो ले जाते थे और कहते थे, "सानू, आ बैठ. तुझे दिखाता हूं कि रिकॉर्डिंग कैसे होती है."
कुमार सानू के मुताबिक़ आज के दौर में आरडी बर्मन जैसे संगीतकार की सख़्त ज़रूरत है. सानू कहते हैं, "वो संगीत के स्कूल थे. वो गाने से पहले गायकों को पूरी छूट देते थे और अपनी तरह से गाने की आज़ादी देते थे. ऐसी बात बहुत ही कम संगीतकारों में देखने को मिलती है."
परिणीता, वेलकम टू सज्जनपुर और 3 इडियट्स जैसी फ़िल्मों में संगीत दे चुके शांतनु मोइत्रा कहते हैं, "मैं तो मानता ही नहीं कि पंचम दा हमारे बीच में नहीं हैं. मेरे हर सुर में वो समाए हुए हैं."
आरडी बर्मन पर बनाई गई डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाले ब्रह्मानंद सिंह कहते हैं, "ये बहुत अफ़सोस की बात है कि उनका गाना गाने वालों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है. उनके लिए गाना लिखने वालों को भी पुरस्कार मिल चुका है. लेकिन उन्हें एक बार भी राष्ट्रीय पुरस्कार नहीं मिला. गुलज़ार साहब ने मज़ाक में सच ही कहा था कि खीर पंचम बनाता है और खा हम सब जाते हैं."


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