भारत में रॉक बैंड किसी चुनौती से कम नहीं
हिंदी रॉक बैंड 'बंदिश' के क्रिस पॉवेल का कहना है, "भारत देश में बतौर संगीतकार अस्तित्व बनाए रखना बहुत कठिन है। संगीत को व्यवसाय के रूप में चुनना बहुत बड़ी चुनौती है।"
उन्होंने कहा, "भारत में बैंड्स को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है उनमें से एक स्वीकृति की चुनौती है। इसके बाद आपके सामने अपने संगीत के समर्थन में एक रिकॉर्ड लेबल को ढूंढना दूसरी चुनौती है। इसके बाद गैर फिल्मी गीतों के प्रचार की चुनौती है जबकि फिल्मी गीतों के प्रचार में करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं।"
पॉवेल ने कहा, "इन रुकावटों को दूर करने के लिए हमें पश्चिम की तरह म्यूजिक लेबल्स, टेलीविजन चैनल्स और रेडियो चैनल्स के समर्थन की आवश्यकता है। पश्चिम में ये सभी माध्यम अपने कलाकारों का प्रचार करने में कोई कसर नहीं छोड़ते।"
अंतर्राष्ट्रीय परिदृष्य में 'फोर्ब्स' पत्रिका ने आयरिश म्यूजिक बैंड 'यू2' को 'टॉप अर्निग म्यूजीशियंस ऑफ 2010' चुना था। इस बैंड ने पिछले साल अपनी '360 डिग्री' विश्व संगीत यात्रा और 2009 में आई एलबम 'नो लाइन ऑन द हॉरिजोन' की बिक्री से 13 करोड़ डॉलर का व्यवसाय किया था। पत्रिका द्वारा तैयार की गई सूची में रॉक समूह 'एसी/डीसी' ने 11.4 करोड़ डॉलर के व्यवसाय के साथ दूसरा स्थान प्राप्त किया था।
दिल्ली के रॉक बैंड 'परिक्रमा' के सदस्य सुबीर मलिक कहते हैं, "हम उतना पैसा कमाने के विषय में सोच भी नहीं सकते। भारत के विपरीत पश्चिमी संगीत उद्योग बहुत संगठित है। संगीतकारों को वहां उनके द्वारा बेचे जाने वाले संगीत के लिए उचित रॉयल्टी मिलती है और वे इससे बहुत पैसा बना लेते हैं।"
मलिक कहते हैं, "वहां टिकटों की कीमत बहुत ज्यादा होती है और श्रोताओं की संख्या भी बहुत है। इन सब वजहों से वहां अच्छा पैसा मिल जाता है।" 'परिक्रमा' और 'बंदिश' के अलावा कुछ अन्य लोकप्रिय भारतीय बैंड्स में 'इंडियन ओशन', 'यूफोरिया', 'भूमि', 'देम क्लोन्स', 'पेंटाग्राम', 'स्वरात्मा', 'कैलासा', 'मिडीवल पंडिट्ज', 'शैडोज' और 'ध्वनि' जैसे बैंड शामिल हैं।


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