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रेडी: मस्ती और धमाल के स्वर

Posted By: Bbc
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रेडी: मस्ती और धमाल के स्वर
पवन झा, संगीत समीक्षक

बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

सलमान और असिन की फ़िल्म रेडी का संगीत अभी से ही लोगों को अपनी ओर खीच रहा है. कॉमेडी और एक्शन के तड़के में लिपटी सलमान खा़न की नयी फ़िल्म है रेडी. पिछले दो वर्षों में सलमान की "वॉन्टेड" और "दबंग" ने ज़बरदस्त कामयाबी अर्जित की है. रेडी से उसी कड़ी की एक और लोकप्रिय फ़िल्म होने की अपेक्षा की जा रही है .

रेडी वर्ष 2008 में बनी इसी नाम की एक सुपरहिट तेलगू फ़िल्म की रीमेक है. वॉन्टेड और दबंग की तरह ही रेडी का संगीत भी फ़िल्म के प्रदर्शन से पहले प्रचार में अहम भूमिका निभा रहा है. फ़िल्म के प्रोमोज़ इन दिनों सभी टी.वी. चैनल्स पर छाये हुए हैं. फ़िल्म में संगीत दिया है प्रीतम ने और अतिथि संगीतकार के रूप में देवी श्रीप्रसाद भी मौज़ूद हैं जो मूल तेलगू फ़िल्मों के संगीतकार थे. गीत अमिताभ भट्टाचार्या, नीलेश मिश्रा और कुमार ने लिखे हैं.

एलबम में मुख्य तौर पर चार गीत हैं और प्रत्येक गीत अपने रीमिक्स के साथ मौजूद है. फ़िल्म का संगीत मस्ती और धमाल के स्वर लिये हुए है जो सलमान की जनप्रिय छवि को केन्द्रित कर के रचा गया है.

एलबम की एक मनोरंजक शुरुआत मिलती है "कैरेक्टर ढीला" से. नीरज श्रीधर और अमृता काक के मुख्य स्वरों में प्रीतम ने अमिताभ भट्टाचार्या के मज़ेदार बोलों से एक ऐसी रचना गढ़ी है जिसमें लोकप्रिय होने के सभी तत्व हैं. गीत के बोल आसानी से होठों पे चढ़ जाने वाले हैं.

सलमान की छवि को बहुत सूट करता है ये गीत और उनके प्रशंसक उनसे जिस धमाल की उम्मीद करते हैं गीत उस माहौल को बनाने में सफ़ल रहा है. गीत का रीमिक्स वर्ज़न कुछ खास वैल्यू एडिशन करने में नाकाम रहा है.

एलबम की अगली प्रस्तुति "ढिंक चिका" भी मस्ती के स्वरों को कायम रखती है. गीत देवी श्री प्रसाद ने संगीतबद्ध किया है और दर असल ये उनके एक तेलगू सुपर हिट गीत "रिंगा रिंगा" (फ़िल्म आर्या-2) का हिंदी संस्करण है. मीका और अमृता काक के स्वर हैं और गीत के बोल आशीष पंडित के हैं. सलमान की फ़िल्मों के संगीत में सड़क-छाप गीतों की अपनी जगह रहती है और ये गीत उसी की अगली कड़ी है.

देवी श्री प्रसाद कोरस और ढोल के प्रयोग से सड़क के हुल्लड़ का माहौल बनाने में कामयाब रहे हैं. गीत के बोलों में बारह महीनों के नाम बहुत कुछ "पुकार" के "तू मईके मत जईयो" की याद दिलाता है. रीमिक्स वर्ज़न के बोल नीलेश मिश्रा के हैं और बदलाव के नाम पर इस कैलेंडर गीत में वे महीने से तारीख पे आ गये हैं पर दोनों वर्ज़न लगभग एक से साउंड करते हैं.

एलबम में एक रोमांटिक डुएट को भी जगह मिली है "हमको प्यार हुआ" केके और तुलसी कुमार की आवाज़ों में, प्रीतम ने रचा है. प्रीतम का फिर से वही पुराना सा टैम्प्लेट है जो कहीं कहीं पर "पहली नज़र में" (रेस) तो कहीं "तेरी ओर" (सिंह इज़ किंग) की याद दिलाता है.

सलमान की पिछली फिल्म दबंग के संगीत ने भी फ़िल्म रिलीज़ से पहले ही खूब धूम मचाई थी. तुलसी कुमार की आवाज़ में "तेरी ओर" की श्रेया घोषाल जैसी मिठास और कशिश की कमी झलकती है और ये रोमांटिक गीत असर छोड़ नहीं पाता. रीमिक्स वर्ज़न में गति परिवर्तन के अतिरिक्त कुछ खास नहीं है.

एलबम में एक और प्रस्तुति है "मेरी अदा भी", राहत फ़तेह अली खान और तुलसी कुमार के स्वरों में. प्रीतम ने प्रसिद्ध पंजाबी लोकगीत "लौंग गवाचा" के मिक्स के साथ उत्सव के माहौल की एक थिरकाने वाली रचना गढ़ने की कोशिश की है. राहत ने अपने स्वरों को सलमान के हिसाब से कस्टमाइज़ करने की कोशिश की है और उनकी गायकी में जोश के अतिरिक्त कोशिश नज़र आती है.

प्रीतम का संयोंजन प्रभावी है और पर्दे पर देखना है कि सलमान-असिन की जोड़ी गीत को कितने असरदार ढंग से पेश कर पाती है. मगर एलबम में "कैरेक्टर ढीला" और "ढिंका चिका" के सामने ये गीत पार्श्व में खड़ा नज़र आता है. कुल मिलाकर रेडी का संगीत लोकप्रिय होने के सभी तत्व रखता है. अपने "टारगेट ऑडियंस" की उम्मीदों पर ख़रा उतरने की पूरी संभावनाएं रखता है और अब तक के प्रचार में फ़िल्म के लिये एक आधार बना पाने में सफ़ल रहा है.

"कैरेक्टर ढीला" और "ढिंका चिका" मुन्नी या शीला की लोकप्रियता शायद ना छू पाएं मगर कुछ महीनों तक धूम मचाने में कामयाब रहेंगे इसमें कोई शक़ नहीं है. फ़िल्म के संगीत की सफ़लता प्रीतम की रीसाइकल फ़ैक्टरी को कुछ और दिनों तक चलाए रखने के लिये ऊर्जा प्रदान कर सकती है. नम्बरों के लिहाज़ से रेडी के संगीत को 2.5/5 (पाँच में से ढाई)

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