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    रफी साहब की याद में संगीत अकादमी

    By Neha Nautiyal
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    'दोस्ती', 'चौदहवीं का चांद', 'मुगले आज़म', 'मधुमती', 'नया दौर', 'नील कमल' और 'तीसरी मंजिल' जैसी मशहूर फिल्मों के गायक मोहम्मद रफी के चाहने वाले हिन्दुस्तान के साथ दुनिया के हर कोने में मौजूद हैं।

    रफी ने ओ हसीना जुल्फों वाली, याहू, चौदहवीं का चांद, चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे और छू लेने दो नाजुक होंठों से जैसे बेमिसाल हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री को दिए हैं।

    हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में रफी साहब के नाम से मशहूर गायक मोहम्मद रफी की 30वीं पुण्यतिथि के अवसर पर शनिवार को रफी साहब के बेटे शाहिद रफी अपने पिता की याद में एक संगीत अकादमी का उद्घाटन कर रहे हैं।

    शाहिद कहते हैं कि इस अकादमी को शुरू करने के लिए इससे बेहतर दिन और कोई नहीं हो सकता था। उनके पिता ने अपनी संगीत यात्रा मुंबई से शुरू की थी इसलिए अकादमी के लिए यही सबसे बेहतर जगह है।

    शाहिद बताते हैं, "मेरे पिता के कई प्रशंसक हैं जो लंबे समय से मुझसे बार-बार पूछते रहते थे कि मैं इस तरह की कोई शुरुआत कब करूंगा। इसलिए अंतत: मैंने कुछ लोगों के साथ मिलकर इस अकादमी को शुरू करने का निर्णय लिया।"

    इस अकादमी से शाहिद और उनकी पत्नी फिरदौस शाहिद रफी के अलावा भारतीय संगीत जगत के कई अन्य महान कलाकारों के परिजन भी जुड़ेंगे।

    अकादमी के संचालक निकाय में राजू नौशाद (संगीतकार नौशाद के बेटे), अंदालिब मजरूह सुल्तानपुरी (संगीतकार मजरूह सुल्तानपुरी के बेटे) और रूहान महेंद्र कपूर (गायक महेंद्र कपूर के बेटे) शामिल होंगे। यह अकादमी गायन के क्षेत्र में विभिन्न कोर्स कराएगी।

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