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लुधियाना भूला साहिर लुधियानवी को

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लुधियाना(विवेक शुक्ला) साहिर लुधियानवी ने हिन्दी फिल्मों को एक से बढ़कर एक नगमें दिए। उन्होंने हर रोज करोड़ों हिन्दुस्तानीगुनगुनाते हैं। पर लगता है कि साहिर साहब को उनका शहर यानी लुधियाना भूल गया है। हाल ही में लुधियाना जाने का अवसर मिला। कई लोगों से उस शायर के घर के बारे में पूछा। सबका जवाब यही था कि हमें मालूम नहीं।

Ludhiana forgets its illustrious son Sahir

साहिर साहब का असली नाम अब्दुल हयी साहिर था । उनका जन्म 8 मार्च 1921 में लुधियाना में हुआ था। उनके पिता बहुत धनी थे पर माता-पिता में अलगाव होने के कारण उन्हें माता के साथ रहना पड़ा और गरीबी में गुजर करना पड़ा।

साहिर का स्कूल

अब यहां पर इस बात कोई बताने वाला नहीं मिला कि साहिर का खालसा हाई स्कूल कहां है। कहते हैं कि उनकी स्कूली शिक्षा इसी स्कूल में हुई थी। हिन्दी फिल्मों का अध्ययन करने वाले चरणजीत सिंह ने भी कहा कि उन्होंने भी कई बार लुधियाना जाकर साहिर साहब के पुश्तैनी घर को तलाशा पर बात नहीं बनी।

सही स्थान कहां

हालांकि कुछ लोगों ने बताया कि साहिर साहब का जन्म जगरांव रोड में हुआ था। पर अफसोस कि कोई सही स्थान नहीं बता पाया। साहिर साहब के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने कालेज शिक्षा लाहौर के एक कालेज से ली थी। वहां पर ही उनका पंजाबी की लेखिका अमृता प्रीतम से प्रेम हुआ।

कहते हैं कि कॉलेज़ के दिनों में वे अपने शेरों के लिए विख्यात हो गए थे और अमृता उनकी प्रशंसक थी। लेकिन अमृता के घरवालों को ये रास नहीं आया क्योंकि एक तो साहिर मुस्लिम थे।

बाबुल की दुआएं

बाबुल की दुआएँ लेती जा, जा तुझको सुखी संसार मिले... और तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा इंसान की औलाद है इंसान बनेगा... जैसे सैकड़ों कालजयी गीत लिखने वाले के नाम पर उनके शहर में एक सड़क का नाम भी नहीं है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि लुधियाना ने अपने इस महान पुत्र को भूला दिया है।

English summary
Ludhiana forgets its illustrious son Sahir. Sahir has written great songs for hindi flims.
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