»   »  फिर याद आए किशोर कुमार

फिर याद आए किशोर कुमार

By Staff
Subscribe to Filmibeat Hindi

4 अगस्‍त 1929 को खंडवा के एक बंगाली परिवार में पैदा हुए किशोर कुमार की आज 80वीं सालगिरह है। उनका नाम अभास कुमार गांगुली रखा गया था। लेकिन घर में सबसे छोटे होने के कारण उन्‍हें प्‍यार से किशोर दा बुलाया जाता था।

उनके पिता एक वकील थे और माता एक अच्‍छे परिवार से ताल्‍लुक रखती थी। उनके दो बड़े भाई (अशोक कुमार, अनुप कुमार) और एक बहन (सती देवी) थी। उनके बड़े भाई किशोर कुमार ने अभिनय की दुनियां में कदम रखा, बाद में किशोर ने उनका अनुसरण किया।

प्रारंभ से ही किशोर का संगीत के प्रति लगाव था। वे के एल सहगल की काफी अच्‍छी नकल कर लेते थे। वे अपनी एक अलग गायन शैली विकसित करके प्रसिद्ध गायक बनना चाहते थे।

मध्‍य प्रदेश के खंडवा में 18 साल तक रहने के बाद किशोर कुमार को उनके बड़े भाई अशोक कुमार मुंबई बुला लिया। उस समय अशोक कुमार फिल्मों का एक बड़ा नाम था। अपने चार भाई-बहनों में किशोर कुमार सबसे छोटे थे। जाहिर है सबके चहेते भी थे। और इसी चाहत ने उन्हें इतना हंसमुख बना दिया था कि हर हाल में मुस्कुराना उनके जीवन का अंदाज बन गया।

अशोक कुमार चाहते थे कि किशोर कुमार अपने जिंदगी के सुहाने सफर की शुरुआत फिल्म अभिनेता के तौर पर करें। क्योंकि उन दिनों फिल्मों में अभिनय करने वालों को ज्यादा पैसे मिलते थे। लेकिन तकदीर को कुछ और ही मंजूर था।

एक दिन एसडी वर्मन अशोक कुमार के घर आए हुए थे। अभी वे बैठे ही थे कि उन्हें अशोक कुमार के घर से सहगल की आवाज सुनाई दी। उन्होंने अशोक से पूछा तो जवाब मिला की छोटा भाई किशोर गा रहा है और वो भी बाथरूम में।

वर्मन साहब ध्यान से सुनते रहे और किशोर के बाथरूम से बाहर आने का इंतजार करते रहे। जब किशोर बाहर निकले तो उन्होंने कहा बहुत अच्छा गाते हो। लेकिन किसी की नकल मत करो। वर्मन साहब की इसी बात ने किशोर कुमार को एक नया मोड़ दिया। कम ही लोग जानते हैं कि बाद में किशोर कुमार ने एसडी वर्मन के लिए 112 गाने गाए। और उनका ये सफर किशोर के आखिरी दिनों तक जारी रहा।

1958 में किशोर कुमार को पहली बार फिल्मों में अभिनय करने का मौका मिला। फिल्म का नाम था चलती का नाम गाड़ी। ये फिल्म प्रदर्शित हुई तो थियेटर में लोग देखने के लिए तो अशोक कुमार को जाते थे, लेकिन लौटते वक्त उनकी जहन में किशोर कुमार छाए रहते थे।

शुरुआती दौर में किशोर कुमार की पहचान एक हास्य अभिनेता के तौर पर बनी। पड़ोसन जैसी फिल्में तो आज भी लोगों के जहन में ताजा है। 1964 में दूर गगन की छांव और 1971 में दूर का राही फिल्म के बाद किशोर दा के अभिनय की मिशाल दी जाने लगी।

उधर, गायकी के क्षेत्र में भी उनका सिक्का जमता जा रहा था। हैरानी की बात तो ये थी किशोर कुमार एक ऐसे गायक थे जिन्होंने इसकी कोई तालीम भी नहीं ली थी। उस दौर में जब संगीतकार मोहम्मद रफी और मन्ना डे की आवाज को पंसद करते थे, आहिस्ता-आहिस्ता किशोर कुमार की आवाज का जादू सब पर छोने लगा।

दुर्भाग्‍य की बात है कि 13 अक्‍टूबर सन् 1987 में बड़े भाई अशोक कुमार के जन्‍मदिन पर किशोर कुमार को दिल का दौरा पड़ा और उन्‍होने अपनी अंतिम सांस ली। उनकी असमय मृत्‍यु ने प्रशंसको को दुख के सागर मे धकेल दिया। वे आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनका अमर संगीत आज भी हमारे बीच उन्‍हे जिंदा किए हुए है।

For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts

    रहें फिल्म इंडस्ट्री की हर खबर से अपडेट और पाएं मूवी रिव्यूज - Filmibeat Hindi

    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Filmibeat sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Filmibeat website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more