पिता का देहान्त, पर गाया कैलाश ने

कैलाश खेर ने कला के उस आदर्श को सही मायने में अपनाया है कि शो हर हाल में चलना चाहिए।
सही मायने में वे एक सच्चे कलाकार है। कैलाश को दिल्ली में 21 नवम्बर को एक कार्यक्रम में गीत पेश करना था उस दिना पिता के देहान्त होने के बावजूद उन्होंने अपना कार्यक्रम रदद नही किया।
कैलाश तय समय पर कार्यक्रम में पहुंचे और उन्होने अपना कार्यक्रम पेश किया। आयोजको को उनके व्यक्तिगत हानि के बारे में पता नही चल पाया।
वे अपने पिता के बहुत करीब थे। उनके गीत सुनते हुए कैलाश बड़े हुए है जिसका प्रभाव गायन शैली पर दिखता है।
कैलाश हम आपको सलाम करते है।


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