जय हे 2.0: 75 सिंगर्स ने गाया, टैगोर साहब का पूरा गीत, सुनिए तिरंगे को समर्पित कुछ शानदार गाने
15 अगस्त 2022 - आज़ादी के 75 सालों का जश्न पूरे देश में मन रहा है और हर कोई तीन रंगों से लिपट चुका है। हर किसी पर देशभक्ति का रंग खिलकर चमक रहा है। इस मौके पर बंगाल के एक म्यूज़िक कंपोज़र जोड़ी ने जन गण मन 2.0 देश को समर्पित किया है।
इस गीत में देश भर के 75 मशहूर सिंगर और म्यूज़िशियन, जन गण मन गाते दिख रहे हैं। दिलचस्प ये है कि ये जन गण मन नहीं है, बल्कि रवींद्र नाथ टैगोर की पूरी कृति भारत भाग्य विधाता है। दरअसल, रवींद्र नाथ टैगोर ने भारत भाग्य विधाता नाम की एक कविता लिखी थी जिसके पांच अंतरे थे।

इसके शुरूआती अंतरे लेकर जन गण मन को भारत के राष्ट्रगान के तौर पर अपनाया गया था। लेकिन जन गण मन 2.0 में इन सिंगर्स ने भारत भाग्य विधाता पूरा गाया है। इस गीत को गाते हुए म्यूज़िक इंडस्ट्री का हर बड़ा चेहरा दिखाई देगा जिसमें श्रेया घोषाल से लेकर उदित नारायण, कुमार सानू, शुभा मुद्गल, के चित्रा, सुरेश वाडेकर, पापोन सहित नए सितारे भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि तिरंगे के तीन रंग, देखकर हर कोई देशभक्ति से सराबोर हो जाता है। कुछ ऐसे ही गीत और हैं जो आपको तिरंगे और उसकी देशभक्ति से भावुक कर देते हैं। आज के दिन, एक बार फिर से ये गीत सुनना तो ज़रूरी है। आप भी इन गीतों में खो जाइए।

मिले सुर मेरा तुम्हारा
भीमसेन जोशी ने जब ये गीत भारत को तोहफे के रूप में दिया तो जैसा अचानक पूरा भारत इस एक गीत में समा गया। यहां की हर भाषा हर प्रांत, हर सितारा जैसे इस एक गीत में मौजूद था। सालों बाद भी आज तक इस गीत को कोई भी टक्कर नहीं दे सकता है। आप जब भी ये गीत देखते हैं और अंत में इस गीत में भारत और तिरंगा बनते देखते हैं तो मानो अपने आप कोई नई शक्ति आ जाती है।

वंदे मातरम
वंदे मातरम, भारत का राष्ट्रगीत है लेकिन जब लता मंगेशकर की आवाज़ में ये पूरा गीत रिलीज़ हुआ तो हर कोई बस इसे सुनता रह गया। चूंकि ये गीत संस्कृत में है इसलिए इसे गा पाना, हर किसी के लिए मुश्किल हो जाता है लेकिन फिर भी लोग इसे लता मंगेशकर की आवाज़ में जब भी सुनते हैं, उन्हें सुकून ज़रूर मिलता है।

मां तुझे सलाम
यहां वहां सारा जहां, देख लिया है, कहीं भी तेरे जैसा कोई नहीं है। अस्सी नहीं सौ नहीं दुनिया घूमा पर कहीं भी तेरे जैसा कोई नहीं है। ए आर रहमान जब ये गाते हैं तो उनका कहा हर शब्द जैसे असीम सत्य लगता है। गाना जैसे जैसे आगे चलता है आपको किसी और दुनिया में लेकर जाता है।
गाने के बोल हैं - मैं गया जहां भी, बस तेरी याद थी, मुझको तड़पाती रूलाती थी, सबसे प्यारी तेरी सूरत प्यार है, बस तेरा प्यार ही, मां तुझे सलाम। अम्मा तुझे सलाम। वंदे मातरम। शायद वंदे मातरम, इन दो शब्दों का जादू है या फिर लहराते तिरंगे के बीच ए आर रहमान की आवाज़ का लेकिन ये गीत, आपको वाकई किसी और दुनिया में ले जाता है।

वंदे मातरम - कभी खुशी कभी ग़म
वंदे मातरम। शायद इन दो शब्दों का जादू ही ऐसा है। करण जौहर की फिल्म कभी खुशी कभी ग़म में विदेश में अपने भाई को ढूंढते ऋतिक रोशन और बैकग्राउंड में उषा उत्थुप और कविता कृष्णमूर्ति की आवाज़ में जब वंदे मातरम शुरू होता है तो हर किसी की आंखें अपने आप नम हो जाती है। शायद देश के प्रति प्यार और लहराता तिरंगा ही ऐसा भाव जगा सकता है।

सारे जहां से अच्छा
1905 में जब मोहम्मद इक़बाल ने सारे जहां से अच्छा लिखा तो किसी को नहीं पता था कि ये गीत हमारी पहचान बन जाएगा। 1950 में इसे पंडित रवि शंकर ने सुर दिए और तब से ये गीत हमारे देश की पहचान बन चुका है।
गोदी में खेलती हैं, उसकी हज़ारों नदियाँ।
गुलशन है जिनके दम से, रश्क-ए-जिनाँ हमारा॥
मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना।
हिन्दी हैं हम वतन हैं, हिन्दोस्ताँ हमारा॥
सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा।
हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिस्ताँ हमारा॥


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