'जय हो..' पर फिर बरसे जगजीत सिंह

68 वर्षीय स्पष्टवादी जगजीत सिंह कहना था कि एकेडमी पुरस्कार मिलना भारत के इतिहास में एक सुनहरा अवसर था लेकिन जिस गीत के लिए मिला वह इसके योग्य नहीं था।
यही नही जय हो के बोल से भी वे नाखुश नजर आए। भले ही इसके बोल उनके जोड़दार रह चुके गलजार ने लिखे हो लेकिन उसमें उन्हें कोई दम नही नजर आया।
जगजीत ने हाल में अपना गजल संग्रह इंतिहा रिलीज किया। वे आज कल के गीतों से भी नाखुश है। उनका कहना है कि आजकल के गीतों में फुहड़ता ज्यादा है।


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