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    Birthday Special: गुलज़ार के ये 10 गाने आपको कभी लोटपोट करेंगे, कभी फूट फूटकर रूला देंगे

    By Staff
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    मशहूर गीतकार गुलज़ार साहब आज अपना 85वां जन्मदिन मना रहे हैं। गुलज़ार साहब उन चंद शायर और गीतकारों में से हैं जिनका लिखा एक एक शब्द मोती की तरह चमकता है। चाहे वो दिल से रे की तड़प हो या फिर बीड़ी जलई ले की आग। चाहे वो मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने की उम्मीद हो या फिर कजरा रे की शरारत।

    गुलज़ार साहब के गीतों में हमेशा ही आपको उत्तर से दक्षिण तक की विविधता मिल जाएगी। और शायद यही कारण है कि वो आज की पीढ़ी से भी उसी तरह जुड़ पाते हैं। चाहे वो दिल तो बच्चा है जी हो या फिर कोई पुराना गीत। उनके गीतों को आज भी लोग दिल से लगाकर रखते हैं। पढ़िए उनकी लिखी कुछ बेहतरीन पंक्तियां -

    Gulzar Birthday: Some beautiful Shayaris by Gulzar | FilmiBeat
    गुलज़ार साहब के बेस्ट गीत

    गुलज़ार साहब के बेस्ट गीत

    तुम जो कह दो तो आज की रात चांद डूबेगा नहीं
    रात को रोक लो
    रात की बात है और ज़िंदगी बाकी तो नहीं
    तेरे बिना ज़िंदगी से कोई शिकवा तो नहीं
    तेरे बिना ज़िंदगी भी लेकिन ज़िंदगी तो नहीं

    गुलज़ार साहब के बेस्ट गीत

    गुलज़ार साहब के बेस्ट गीत

    आ नींद का सौदा करें
    एक ख़्वाब दें, एक ख़्वाब लें
    इक ख़्वाब तो आंखों में है
    एक चांद की तकिए तले
    कितने दिनों से ये आसमां भी सोया नहीं है
    इसको सुला दें

    गुलज़ार साहब के बेस्ट गीत

    गुलज़ार साहब के बेस्ट गीत

    फरवरी की सर्दियों की धूप में
    मूंदी मूंदी अंखियों से देखना
    हाथ की आड़ से
    निम्मी निम्मी ठंड और आग में
    हौले हौले मारवा की राग में
    मीर की बात हो

    गुलज़ार साहब के बेस्ट गीत

    गुलज़ार साहब के बेस्ट गीत

    छोड़ आए हम वो गलियां
    जहां तेरे पैरों के कंवल गिरा करते थे
    हंसे तो दो गालों में भंवर पड़ा करते थे
    तेरी कमर के बल पे नदी मुड़ा करती थी
    हंसी तेरी सुन सुन के फसल पका करती थी
    छोड़ आए हम वो गलियां

    गुलज़ार साहब के बेस्ट गीत

    गुलज़ार साहब के बेस्ट गीत

    एक बार वक्त से
    लम्हा गिरा कहीं
    वो दास्तां मिली
    लम्हा कहीं नहीं
    थोड़ा सा हंसा के
    थोड़ा सा रूला के
    पल ये भी जाने वाला है
    आने वाला पल जाने वाला है
    हो सके तो इसमें ज़िंदगी बिता दो
    पल जो ये जाने वाला है

    गुलज़ार साहब के बेस्ट गीत

    गुलज़ार साहब के बेस्ट गीत

    जीने के लिए सोचा ही नहीं
    दर्द संभालने होंगे
    मुस्कुराएं तो मुस्कुराने के
    कर्ज़ उतारने होंगे
    मुस्कुराऊं कभी तो लगता है
    जैसे होठों पर कर्ज़ रखा है
    तुझसे नाराज़ नहीं ज़िंदगी हैरान हूं मैं
    तेरे मासूम सवालों से परेशान हूं मैं

    गुलज़ार साहब के बेस्ट गीत

    गुलज़ार साहब के बेस्ट गीत

    एक अकेली छतरी में जब आधे आधे भीग रहे थे
    आधे सूखे, आधे गीले
    सूखा तो मैं ले आई थी
    गीला मन शायद, बिस्तर के पास पड़ा हो
    वो भिजवा दो, मेरा वो सामान लौटा दो
    एक सौ सोलह चांद की रातें
    एक तुम्हारे कांधे का तिल
    गीली मेहंदी की खुशबू,
    झूठमूठ के शिकवे कुछ
    झूठमूठ के वादे भी,
    सब याद करा दो
    सब भिजवा दो, मेरा वो सामान लौटा दो

    गुलज़ार साहब के बेस्ट गीत

    गुलज़ार साहब के बेस्ट गीत

    थका थका सूरज जब नदी से होकर निकलेगा
    हरी हरी क़ाई पे पांव पड़ा तो फिसलेगा
    तुम रोक के रखना मैं जाल गिराऊं
    तुम पीठ पे लेना मैं हाथ लगाऊं
    ओ साथी रे दिन डूबे ना
    आ चल दिन को रोकें
    रात के पीछे दौड़ें
    छांव छुए ना

    गुलज़ार साहब के बेस्ट गीत

    गुलज़ार साहब के बेस्ट गीत

    ख़्वाब से बोझ से कंपकंपाती हुईं
    हल्की पल्कें तेरी याद आता है सब
    तुझे गुदगुदाना सताना यूं ही सोते हुए
    गाल पर टीपना मीचना बेवजह बेसबब
    याद है पीपल के जिसके घने साए थे
    हमने गिलहरी के जूठे मटर खाए थे
    ये बरकत उन हज़रत की है
    पहली बार मोहब्बत की है
    आखिरी बार मोहब्बत की है

    गुलज़ार साहब के बेस्ट गीत

    गुलज़ार साहब के बेस्ट गीत

    ऐसी उलझी नज़र उनसे हटती नहीं
    दांत से रेशमी डोर कटती नहीं
    उम्र कब की बरस के सफेद हो गई
    कारी बदरी जवानी की छटती नहीं
    वल्लाह ये धड़कन बढ़ने लगी है
    चेहरे की रंगत उड़ने लगी है
    डर लगता है तन्हा सोने में जी
    दिल तो बच्चा है जी

    गुलज़ार साहब का जन्म 18 अगस्त 1934 में पाकिस्तान में हुआ था। उनका नाम संपूर्ण सिंह कालरा था। उनका परिवार विभाजन के दौरान पाकिस्तान चला आया। उन्होंने अपना करियर, एस डी बर्मन के साथ बंदिनी नाम की फिल्म से शुरू किया था। उन्होंने आंधी और मौसम जैसी फिल्में भी डायरेक्ट की हैं।

    2019 की तारीख में गिना जाए तो गुलज़ार साहब के पास कुल 36 अवार्ड्स हैं जिनमें 5 नेशनल अवार्ड्स, 21 फिल्मफेयर अवार्ड्स, 1 ऑस्कर, 1 ग्रैमी अवार्ड, 2002 का साहित्य अकादमी पुरस्कार, पद्म भूषण और दादा साहेब फाल्के अवार्ड शामिल हैं।


    English summary
    Gulzar Sahab, the noted lyricist is celebrating his 85th birthday today. He is one of the gems whose talent diversifies from Tujhse Naraz Nahi Zindagi to Beedi Jalai le and Dil se re to Kajra re.
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