मैं बॉलीवुड के लिए नहीं हूँ : गुलाम अली

उन्होंने बी.आर. चोपड़ा की फिल्म 'निकाह' के लोकप्रिय गीत 'चुपके चुपके रात दिन' से भारतीय सिनेमा में शुरुआत की थी। उनकी अन्य लोकप्रिय गजलों में 'हमको किसके गम ने मारा', 'कल चौदहवीं की रात थी' और 'हंगामा है क्यों बरपा' शामिल हैं। उन्होंने कहा, "नब्बे के दशक में जगजीत सिंह जैसे फनकारों के साथ गजल गायकी शिखर पर थी लेकिन बाद में इसकी लोकप्रियता में कमी आई। अब मुझे लगता है कि गजल गायकी को फिर से अपनी जगह मिल रही है। मैं जो भी प्रस्तुत करता हूं, फिर चाहे वह भारत में हो या बाहर तो लोग उसे सुनने के लिए आते हैं।"
वैसे 70 वर्षीय गुलाम अली मानते हैं कि आज-कल के गायकों को सही प्रशिक्षण की आवश्यकता है। वह कहते हैं, "गजल गायकी आसान नहीं है। आपको उर्दू शब्दों का सही उच्चारण सीखने व सही ढंग से गाने के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। इस सब में समय लगता है और आज-कल के गायक इस पर ध्यान नहीं देते हैं।"
गुलाम अली 1980 में पाकिस्तान से भारत आए थे, तब से वह दोनों देशों में अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैं।उन्होंने बातचीत के दौरान यह खुलासा भी किया वह खुद शास्त्रीय और लोक संगीत के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। बकौल गुलाम, "मेरे लिए लोक गीतों का पहला स्थान है। उसके बाद शास्त्रीय संगीत और फिर गजल आता है। इसके बाद पॉप व अन्य संगीत। मैं जब भी तनाव में होता हूं तो शास्त्रीय संगीत सुनता हूं।"


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