जसपिंदर नरुला नहीं डॉक्टर जसपिंदर नरुला
आपको नहीं लगता बॉलीवुड में शामिल होते जा रहे नए नए गायकों की भीड में कुछ ऐसे गायक हैं जो खोते जा रहे हैं. उन्हीं खोए हुए गायकों को एक बार फिर एक ही मंच पर जुटाने का जिम्मा लिया है “एन डी टी वी इमेजिन" ने. नए हिंदी चैनल के रूप में जनवरी माह से शुरू होने वाले इस चैनल पर विभिन्न कार्यक्रमों को पेश किया जाएगा. इन विभिन्न कार्यक्रमों में एक रिएलिटी शो भी है, जिसका नाम है “धूम मचा दे". ग्यारह गायकों से सजे इस कार्यक्रम में “प्यार तो होना ही था" फेम जसपिंदर नरुला.
रिएलिटी शो में भाग लेने जा रही जसपिंदर नरुला से जब हमनें बात की तो उन्होंने कहा “पहली बार रिएलिटी शो में आ रही हूं, इसे मैं चुनौती की तरह नहीं बचपन के खेल की तरह ले रही हूं. मैंने सोचा कि देखें बडे होकर खेल खेलना कैसा लगता है. दरअसल प्रतियोगिता की बात ही अलग होती है. मैं सकारात्मक विचार और खुशी के साथ इस कार्यक्रम का हिस्सा बनी हूं. इसमें हम ग्यारह प्रतियोगी हैं, जिसमें कोई भी जीते सबको खुशी होगी. हम पहले दोस्त हैं उसके बाद एक दूसरे के प्रतिद्वंदी हैं.“
तो क्या रिएलिटी शो की पहचान बन चुके विवाद का मज़ा दर्शक इस कार्यक्रम में नहीं ले पाएंगे ?
“मुझे नहीं लगता दूसरे कार्यक्रमों की तरह इसमें एक दूसरे पर कमेंट किए जाएंगे. मैं तो बिल्कुल ऐसी नहीं हूं जहां तक दूसरों की बात है मुझे लगता है वे भी उनमें से नहीं हैं जो गायन से अधिक लडाई झग़डे में दिलचस्पी लेते हों. मैं तो एक चीज़ मानती हूं ईश्वर संगीत में हैं और जहां संगीत होगा वहां लडाई झगडे जैसी कोई बात नहीं हो सकती" जसपिंदर ने कहा. जसपिंदर की बातों से इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह रिएलिटी शो, दूसरे रिएलिटी शो से काफी अलग होगा. मगर फिर भी जब हमनें उनसे जानना चाहा कि उनके अनुसार यह शो दूसरे शो से कितना अलग होगा तो जसपिंदर ने इस पर कोई टिप्पणी न करते हुए हमें यह शो देखकर खुद निश्चय करने की सलाह दी.
खैर यह तो बात रही फैसले की मगर इस रिएलिटी शो के लिए उन्होंने कितनी तैयारी की है ?
इस सवाल के जवाब में जसपिंदर ने कहा “रिएलिटी शो के लिए मैंने कोई खास तैयारी नहीं की है. मैं रोज़ रियाज़ करती हूं सो मुझे नहीं लगता कि किसी खास तैयारी की ज़रुरत है. इस शो का फैंसला दर्शक ही करेंगे. जहां तक हमारी बात है सभी बेस्ट सिंगर हैं. अब सब कुछ भाग्य पर निर्भर हैं. मेरा मानना है कि भाग्य पूर्व निर्धारित होता है इसमें हम कुछ नहीं कर सकते. विशेष रूप से मेरे जीवन में भाग्य की अहम भूमिका रही है अगर ऐसा नहीं होता तो मैं “प्यार तो होना ही था" का टाइटल ट्रैक गाने के लिए कनाडा से मुंबई नहीं आती.“
अपनी दिलकश आवाज़ से लाखों दिलों को अपना दीवाना बनाने वाली जसपिंदर इन दिनों काफी कम गीत गा रही हैं. उनके एकाएक गायब हो जाने का कारण उनकी पीएच डी की पढाई थी जो काफी सालों से रूकी हुई थी. अपने अधूरे काम को पूरा कर बहुत जल्द मिलने वाली डॉक्टरेट की डिग्री से वह काफी खुश हैं. इसके बारे में विस्तार से बताते हुए जसपिंदर ने कहा “बहुत दिनों से पीएच डी की पढाई का अधूरा काम कर रही थी. फरवरी माह में मुझे दिल्ली यूनिवर्सिटी की तरफ से न सिर्फ डॉक्टरेट की डिग्री मिलने वाली है बल्कि मेरे शोध ग्रंथ, किताब की शक्ल में बहुत जल्द बाज़ार में आने वाली है. इसका शिर्षक है “हिंदुस्तानी गायन शैलियों पर ऊर्दू और फारसी भाषा का प्रभाव". इसमें मैंने हिंदुस्तानी गायन शैलियों में ऊर्दू और फारसी के गीत संगीत को आधार बनाया है. इस शोध को मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुछ लोगों से मिलकर तथा गायन के क्षेत्र में जो दिग्गज लोग हैं उनके इंटरव्यू लेकर तैयार किया है. इसके लिए मैं जयपुर, पटियाला तथा दूसरे शहरों में भी गई.“
जसपिंदर नरुला की आवाज़ में जो कशिश है वही कशिश उनकी ईश्वर की तरफ भी हैं. संगीत को तो वह ईश्वर का दर्ज़ा दे ही चुकी हैं मगर इंसान के प्रति भी उनमें काफी भाव भक्ति है. उनका मानना है कि संगीत में कोई छोटा बडा नहीं होता. अवार्ड मिलने से या ज़्यादा गीत गाने से कोई बडा नहीं हो जाता. हर इंसान का एक वक्त होता है उसमें उसे कितना काम मिलता है और लोग उसे कितना याद करते हैं यह महत्वपूर्ण है.


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