84 वर्ष के हुए भूपेन हजारिका

मुंबई के असम भवन में कैंसर पीड़ित मरीजों के साथ पारंपरिक असमिया भोजन कर अपना जन्मदिन मनाने की तैयारी कर रहे हजारिका कहते हैं कि "मैं हमेशा सोचता हूं, मैं युवा हूं।"
"मैं खुद को सेवानिवृत्त महसूस नहीं करता क्योंकि संगीत से संन्यास लेने की कोई उम्र नहीं होती। मैंने अपने पूरे जीवन में अपने गीतों के माध्यम से बाहरी दुनिया के सामने असम और भारत की व्याख्या करने की कोशिश की है।"
दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित हजारिका की पिछले महीने मुंबई में बाईपास सर्जरी हुई थी। वह सर्जरी के बाद अपने जन्मदिन के अवसर पर पहली बार लोगों के सामने आएंगे।
'रुदाली', 'साज' और 'गजगामिनी' जैसी फिल्मों में भावपूर्ण संगीत दे चुके हजारिका के पास अभी भी कुछ फिल्में हैं जिनका संगीत उन्हें तैयार करना है। इन फिल्मों में प्रसिद्ध फिल्मकार कल्पना लाजमी की दो फिल्में भी शामिल हैं।


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