आज का संगीत सुनने के लिए नहीं देखने के लिए
खुद को किशोर कुमार के सबसे करीब मानने वालें लोगों में एक नाम भांजे बप्पी लाहिरी का भी है. फिल्म 'बढती का नाम दाढी" से संगीत निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखने वाले बप्पी सोनी चैनल पर आने वाले रिएलिटी शो के फोर किशोर में सुदेश भोंसले के साथ बतौर जज आ रहे हैं. उसके प्रतियोगियों को किस आधार पर विजेता घॉशित किया जाएगा? “'के फोर किशोर" का विजेता बनने के लिए ज़रूरी है वह किशोर मामा की तरह सुरों के सरताज हों बल्कि उनकी तरह ही मज़े लेकर गाने का हुनर भी हो. वह कुछ ऐसा करें जिससे किशोर कुमार की याद ताज़ा हो जाए“ बप्पी लाहिरी ने कहा.
क्या यह संभव है क्योंकि किशोर दा के गीत सुनकर अब हमें उनकी आवाज़ की आदत पड चुकी है?
“देखिए किशोर दा के आवाज़ से सीख सीखकर बॉलीवुड में कई गायक आए और नाम कमा रहे हैं. वे सभी बडी बडी फिल्मों में गा रहे हैं और हम सभी उनके गीतों का आनंद उठा रहे हैं. किशोर दा लिजेंड है. बॉलीवुड में ऐसा कौन है जो किशोर दा का भक्त नहीं है. जहां तक इस शो की बात है यह ऐसा शो है जो बार बार नहीं होता. मैं सोनी एंटरटेन्मेंट का आभारी हूं जो उन्होंने किशोर मामा के गीतों को श्रद्धांजली देने के ख्याल से इतना खूबसूरत शो के बारे में सोचा और मुझे जज बनाकर सम्मानित किया. इस शो में किशोर मामा के मेलोडियस, रोमांटिक, कॉमेडी तथा फोक गीत सुनने को मिलेंगे. मैं चाहता हूं कि आनेवाले युवा पीढी भी जाने कि हमारे देश में एक ऐसा लिजेंड सिंगर पैदा हुआ था जिसने सारे विश्व को अपना दीवाना बना रखा था. हालांकि सच बात तो यह है कि डिस्को में युवाओं के बीच अधिकतर किशोर मामा के गीत पॉप्यूलर है. मगर उनकी संख्या सीमित है.' इस शो के बारे में बताते हुए बप्पी यह बताना नहीं भूलते हैं कि उन्होंने कई रिएलिटी शो किए हैं मगर इस तरह का शो न कभी आया और न कभी आएगा.
आखिर किन मायनों में यह दूसरे रिएलिटी शो से अलग है?
“हर तरह से यह शो मेरे लिए काफी विशेष है. अमित के बाद तथा संगीतकार आर डी बर्मन के बाद बीस साल तक मैं ही उनके करीब रहा हूं. आज के लोगों ने किशोर कुमार के गीत सुने हैं. उन्हें देखा नहीं है मगर मैंने उनके साथ काम किया है. उनके साथ मैंने कई पुरस्कार लिए हैं. इस शो के लिए मैं बहुत उत्साहित हूं क्योंकि इससे मेरा व्यक्तिगत लगाव है. इस शो के ज़रिए हम सब मिलकर एक लिजेंड को श्रद्धांजली दे रहे हैं.“ बप्पी लाहिरी ने मुस्कुराते हुए कहा.
अक्सर रिएलिटी शो में एस एम एस वोटिंग के कारण काबिल प्रतियोगी भी हार जाते हैं. तो क्या आप खुश हैं कि इस शो में एस एम एस के ज़रिए वोटिंग नहीं है ?
इस शो का फॉर्मेट दूसरे शो से काफी अलग है. इसमें मैं और सुदेश भोंसले तो बतौर जज हैं ही. साथ ही एक सेलिब्रिटी जज और दर्शक वोटिंग भी है. फर्क इतना है कि दर्शक घर बैठे अनगिनत एस एम एस करने की बजाय शो में बैठकर वोटर मीटर से सिर्फ एक बार वोट करेंगे. मुझे एस एम एस वोटिंग से कोई परहेज़ नहीं है. मगर मेरे अनुसार किसी भी शो में जज की हिस्सेदारी कम से कम पचास प्रतिशत तो होनी चाहिए. नहीं तो होता यूं हैं हम किसी सिंगर की तारीफ करते हैं और बाद में पता चलता है कि वह सिंगर आउट हो गया. इसलिए मुझे लगता है इसमें जज और पब्लिक की हिस्सेदारी समान होनी चाहिए.
“ क्या आपको नहीं लगता एस एम एस वोटिंग न होने से आप पर ज़िम्मेदारी काफी बढ जाएगी?
“बिल्कुल मुमकिन है. किशोर मामा की आवाज़ को याद दिलाना कोई आसान बात नहीं है. इस शो में जितने भी प्रतियोगी है वह सभी अच्छा गाते हैं. सभी प्रोफेशनल सिंगर है जो कई शो कर चुके हैं. कोई एल्बम निकाल चुका है तो कोई फिल्म में पार्श्व गायन भी कर चुका है.
डिस्को शब्द से भारतीय दर्शकों का परिचय कराने वाले बप्पी लाहिरी आज के संगीत के बारे में क्या सोचते हैं जहां डिस्को की धूम मची हुई है. डिस्को को लेकर पॉप्यूलर हुए आज कल के नए संगीतकारों के बारे में बप्पी लाहिरी ने सिर्फ अपनी राय ज़ाहिर की बल्कि यह भी बताया कि 'डिस्को" शब्द किस तरह भारत आया. इस संदर्भ में फ्लैशबैक में लौटते हुए उन्होंने कहा “देखिए 'डिस्को" शब्द मैं ही लेकर आया हूं. अमेरिका में मैं एक बार नाइट क्लब में गया था जहां एक डि जे, डिस्क पर रिकॉर्ड बजा रही थी. मैं उसके करीब गया और उससे पूछा कि यह क्या है. तब उसने मुझे बताया कि यह डिस्को है. जो डिस्क बजाया जाता है वह डिस्को कहलाता है. मैंने वहां से वह शब्द लिया और भारत आकर 'आइ एम अ डिस्को डांसर" गाना बनाया. उसके बाद डिस्को पर कई गाने बनें. मुझे गर्व है कि जो डिस्को मैंने 28 साल पहले दिया आज भी उसकी धूम मची हुई है. आज के दौर में 'ओम शांती ओम" के 'दर्द ए डिस्को" से डिस्को का एक नशा चल रहा है. जिस तरह 'हरि ओम हरि" और 'रंभा हो ओ ओ" यह गीत बीट पर बने थे उसी तरह आज भी बन रहे हैं. आज के कुछ संगीतकार अपने काम के साथ पूरा पूरा न्याय कर रहे हैं मगर कुछ के संगीत में सिर्फ शोर है. उनमें न गीत हैं और न मेलोडी है. वह बज रहा है बच्चे डांस कर रहे हैं. सच कहूं तो आज का संगीत सुनने के लिए नहीं देखने के लिए बन रहा है.“
वैसे अपने संगीत निर्देशन में गाने के लिए बप्पी लाहिरी हाल ही में विशाल शेखर के 'टैक्सी नं 9211" और ए आर रहमान के 'गुरु" में भी गा चुके हैं. आखिर क्या वजह है कि वह दूसरों के संगीत निर्देशन में भी गा रहे हैं ?
“मैं सभी के संगीत निर्देशन में नहीं गाता सिर्फ चुनिंदा संगीतकारों के संगेत निर्देशन में गाता हूं. इसकी वजह यह है कि यह लोग किशोर मामा के स्टाइल का गाना बनाते हैं. साथ ही इन लोगों के साथ अब मेरी अच्छी ट्यूनिंग हो गई है. विशाल शेखर ने मुझे 'टैक्सी नं. 9211" में गाने का मौका दिया और उनकी ज़िद थी कि यह गीत मैं ही गाऊ सो मैंने इसे गाया. 'गुरु" में गाने की असली वजह थी अभिषेक बच्चन. मैंने अमिताभ के लिए भी गाने गाए हैं सो दूसरी पीढी अभिषेक के लिए भी गाने गाना मेरे लिए सम्मान की बात थी. इससे पहले मैंने 'ज़ख्मी" में सुनील दत्त के लिए गाया था और 'थानेदार" में संजय दत्त के लिए 'तम्मा तम्मा लोगे" गाया था.
दूसरे संगीतकारों पर कटाक्ष करते हुए बप्पी लाहिरी ने यह भी कहा “मैं उन संगीतकारों में से नहीं हूं जो अपने संगीत निर्देशन में किसी और को मौका देने की बजाय सभी गाने खुद गाते हैं. मैंने कभी ऐसा नहीं किया। हर फिल्म में मैं एक गाना गा लेता था मगर मैंने कभी मनमानी नहीं की कि सारे गाने मैं गाऊं और लोग सिर्फ मुझे ही सुने.“


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