भारत का नाम रोशन किया रहमान ने

By Super

A R Rahman
अल्ला रक्खा रहमान वैसे तो सिर्फ एक नाम है लेकिन हिंदुस्तानी फिल्म संगीत से जुड़े लोगों के लिए यह नाम कुछ खास मायने रखता है।

सन 1992 में तमिल फिल्म 'रोजा' के संगीतकार के रूप में एक लंबे बालों वाले लड़के ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा और उस फिल्म के संगीत ने लोगों से एक वादा किया। यह वादा था फिल्म संगीत को आर्केस्टा की एकरस धुनों से निकाल कर एक ऐसे रूहानियत और पाकीजगी के मुकाम पर ले जाने का जहां वह ईश्वर से साक्षात्कार का माध्यम बन जाए।

भविष्य में जब कभी हिंदुस्तानी सिनेमा का इतिहास लिखा जाएगा तो रहमान को सिर्फ इसलिए नहीं याद किया जाएगा कि उन्होंने दो-दो ऑस्कर पुरस्कार अथवा गोल्डन ग्लोब समेत अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीते। बल्कि उन्हें याद किया जाएगा एक ऐसे संगीतकार के रूप में जिसने समकालीन संगीत के मायने बदल दिए। जिसके संगीत में ईश्वरीय पुकार थी और था राष्ट्र गौरव।

ए.आर. रहमान का जन्म चेन्नई में मलयाली फिल्मों के लिए संगीत रचना करने वाले संगीतकार आर.के. शेखर के बेटे ए.एस. दिलीपकुमार के रूप में हुआ था। महज नौ वर्ष की अवस्था में अपने पिता का सानिध्य खो देने वाले रहमान के परिवार को संगीत उपकरण किराए पर देकर अपना जीवन यापन करना पड़ा लेकिन संगीत तो उनकी रगों में बहता था।

एक सूफी संत से प्रभावित रहमान के पूरे परिवार ने सन 1989 में इस्लाम की दीक्षा ले ली और वर्ष 1992 में उन्हें प्रसिद्ध फिल्मकार मणिरत्नम ने फिल्म 'रोजा' का संगीत देने के लिए आमंत्रित किया। सन 1993 में तमिल फिल्म 'रोजा' के संगीत के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से शुरू हुआ यह सफर 2009 में 'स्लमडॉग मिलियनेयर' के लिए ऑस्कर तक पहुंच चुका है।

सर्वश्रेष्ठ संगीत और गुलजार के साथ गीत रचना के दो ऑस्कर पुरस्कार हासिल करने के बाद रहमान ने कहा, "मेरी पूरी जिंदगी प्यार और नफरत के बीच झूलती रही, मैंने प्यार को चुना जिसकी वजह से आज मैं यहां हूं।"

टाइम मैगजीन द्वारा 'मोजार्ट ऑफ मद्रास' के नाम से पुकारे गए रहमान ने चेन्नई में केएम म्यूजिक कंजरवेटरी के नाम से म्यूजिक स्कूल खोला है, जहां वह संगीत का प्रशिक्षण दे रहे हैं। यही नहीं हाल ही में उन्होंने ए.आर. रहमान फाउंडेशन के नाम से उन्होंने एक संगठन की स्थापना की है जिसके सहारे वह देश से भूख और गरीबी का उन्मूलन करने के प्रयास कर रहे हैं।

'रोजा' के गीत 'दिल है छोटा सा, छोटा सी आशा, शुरू हुआ रहमान का सुरीला सफर 'बांबे', 'जींस', 'रंगीला', 'दिल से', 'ताल', 'लगान', 'जुबैदा', 'युवा' और 'रंग दे बसंती', 'गुरू' जैसी फिल्मों के सहारे जारी है।

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