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INTERVIEW: मुझे लगता है कि सक्सेस से बड़ा तमाचा और क्या होगा- तापसी पन्नू

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बॉलीवुड की दमदार एक्ट्रेस तापसी पन्नू अपनी अगली फिल्म 'बदला' के साथ दर्शकों के सामने आ चुकी हैं। सुजॉय घोष के निर्देशन में बनी यह फिल्म 8 मार्च को सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। अमिताभ बच्चन और तापसी अभिनित यह फिल्म एक संस्पेंस थ्रिलर है।

ऐसे में फिल्मीबीट ने फिल्म की एक्ट्रेस तापसी पन्नू से मुलाकात की, जहां उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ काम करने के अनुभव से लेकर अपने संघर्ष पर खुलकर बातें की। किसी से बदला लेने की भावना की बात पर तापसी ने कहा, मैं मानती हूं कि सक्सेस से बड़ा तमाचा कोई नहीं होता।

फिल्म की टैगलाइन- हर बार माफ करना सही नहीं होता.. इस पर बात करते हुए तापसी कहती हैं- असर जीवन में मैं किसी के लिए भी ज़्यादा समय तक मन में कड़वाहट नहीं रखती। जो लगता है वो बोल देती हूं। और मुझे लगता है कि सक्सेस से बड़ा तमाचा और क्या होगा। कई बार मुझे फिल्मों से इस तरह से निकाला गया है, जो सही नहीं है। लेकिन मैं सोचती हूँ कि ऐसी स्तिथि बना दूँ कि वही इंसान फिर आपके पास स्क्रिप्ट लेकर आये और आप decide करोगे कि उनकी फिल्म करनी है या नहीं।

यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश-

बदला रिलीज हो चुकी है, इस फिल्म से जुड़ना कैसा रहा?

बदला रिलीज हो चुकी है, इस फिल्म से जुड़ना कैसा रहा?

इस फ़िल्म के लिए मुझे जब पहली बार अप्रोच किया गया था, तो मेरा किरदार कुछ और था। तब फ़िल्म में ना अमिताभ सर थे, ना ही सुजॉय इसे डायरेक्ट कर रहे थे। जो स्क्रिप्ट मुझे सुनाया गया था उसमें मेरा कैरेक्टर लड़के वाला था और जिसका मर्डर होता है, वो लड़की थी। तो जब मुझे सुनाया गया तो मैंने कहा था कि इसको लड़की कर दो, तो मैं करती हूं। मेरे लिए अच्छी बात रही कि उन्होंने मान लिया किरदार एक दूसरे से swap कर दिया। इस फिल्म को लेकर मैं बेहद उत्साहित हूं।

सुजॉय घोष के साथ आप पहली बार जुड़ी हैं। कैसा अनुभव रहा?

सुजॉय घोष के साथ आप पहली बार जुड़ी हैं। कैसा अनुभव रहा?

सुजॉय की बात करूं तो जब मैंने फ़िल्म की स्क्रिप्ट पढ़ी थी, तभी मैंने सुजॉय को कॉल किया था कि एक बहुत अच्छी स्क्रिप्ट है, आपके लिये परफेक्ट है। एकदम टेढ़ी मेढ़ी थ्रिलर है, लड़की का किरदार स्ट्रॉन्ग है। आप इसे डायरेक्ट करो। फिर सुजॉय ने स्क्रिप्ट पढ़ी और मना कर दिया कि नहीं मेरे टाइप की नहीं है, ये और वो। वहीं एक महीने के बाद मुझे निर्माता का कॉल आया कि फ़िल्म में अमिताभ बच्चन और सुजॉय घोष हैं। मैंने फिर सुजॉय से कहा भी.. कि जब मैंने कहा तो नहीं मानी बात, जब अमिताभ सर जुड़ गए तो तुरंत तैयार हो गए। मैं आज उन्हें इस बात को लेकर छेड़ती हूं और आगे भी बोलती रहूंगी.. (हंसते हुए)।

अमिताभ बच्चन के साथ काम करना कैसा रहा? ये आप दोनों की साथ में दूसरी फिल्म है।

अमिताभ बच्चन के साथ काम करना कैसा रहा? ये आप दोनों की साथ में दूसरी फिल्म है।

अच्छी बात है कि पहली फिल्म यानि की पिंक के समय ही एक झिझक खत्म हो गई थी। तो इस फ़िल्म में साथ काम करना और भी मज़ेदार रहा। उनके साथ काम करके इतना कुछ सीखने को मिलता है। पहली फ़िल्म में हमारे साथ में ज़्यादा सीन नहीं थे। लेकिन इस फ़िल्म में पूरी फिल्म में हमारी बातचीत है। पहली फ़िल्म के बाद हम एक दूसरे के काम करने के तरीके से वाकिफ हो चुके थे, इसीलिए इस बार चीज़ें जल्दी होती गयीं।

फ़िल्म की टैगलाइन है- हर बार माफ कर देना भी सही नहीं होता.. बॉलीवुड में कभी आपके सामने ऐसा मौका आया है, जिसे आपने कभी माफ नहीं किया हो?

फ़िल्म की टैगलाइन है- हर बार माफ कर देना भी सही नहीं होता.. बॉलीवुड में कभी आपके सामने ऐसा मौका आया है, जिसे आपने कभी माफ नहीं किया हो?

मैं किसी के लिए भी ज़्यादा समय तक मन में कड़वाहट नहीं रखती। जो लगता है वो बोल देती हूं। और मुझे लगता है कि सक्सेस से बड़ा तमाचा और क्या होगा। कई बार मुझे फिल्मों से इस तरह से निकाला गया है, जो सही नहीं है। लेकिन मैं सोचती हूँ कि ऐसी स्तिथि बना दूँ कि वही इंसान फिर आपके पास स्क्रिप्ट लेकर आये और आप decide करोगे कि उनकी फिल्म करनी है या नहीं।

क्या पति पत्नी और वो के संदर्भ में आपने ये कहा है?

क्या पति पत्नी और वो के संदर्भ में आपने ये कहा है?

वो तो एक उदाहरण है, ऐसा कई बार हो चुका है। पति पत्नी और वो फ़िल्म की बात करें तो शूट से एक महीने पहले मुझे कहीं और से पता चला कि मैं फ़िल्म में नहीं हूँ। ये सही नहीं था। रिजेक्ट होना या रिप्लेस होना, कोई नई बात नहीं है। लेकिन किस तरीके से आप रिप्लेस करते हो, वो बात है। ये आपके प्रॉफेशनलिज़्म पर सवाल है। वो तो अच्छा है कि मेरे पास फिल्में हैं, काम है, पोजीशन है.. इसीलिए कोई ये नहीं बोल सकता कि मेरे पास काम नहीं था तो मैंने मुद्दा बनाया।

पिंक, मुल्क और अब बदला.. जहाँ भी कोर्टरूम ड्रामा होता है, वहाँ आप होती हैं। इस फ़िल्म की जब स्क्रिप्ट आई तो क्या एक छण के लिए भी लगा कि अब और कोर्टरूम ड्रामा नहीं?

पिंक, मुल्क और अब बदला.. जहाँ भी कोर्टरूम ड्रामा होता है, वहाँ आप होती हैं। इस फ़िल्म की जब स्क्रिप्ट आई तो क्या एक छण के लिए भी लगा कि अब और कोर्टरूम ड्रामा नहीं?

(हँसते हुए) हाँ, पिंक से जो ये हवा चली है, रुकी ही नहीं है। जबकि मैंने ऐसी कोई स्ट्रेटेजी नहीं बनाई है। खैर इसमें हमलोग कोर्ट में नहीं जाते, बाहर ही सेटलमेंट कर लेते हैं। इसीलिए मुझे सोचना नहीं पड़ा।

आपको गर्ल नेक्स्ट डोर वाले रोल ऑफिर नहीं किये जाते या आप करना नहीं चाहतीं ?

आपको गर्ल नेक्स्ट डोर वाले रोल ऑफिर नहीं किये जाते या आप करना नहीं चाहतीं ?

मैं तो शिफॉन की साड़ी पहनकर वादियों में डांस करना चाहती हूं, लेकिन कोई दे ही नहीं रहा मुझे शिफॉन की साड़ी। साउथ में तो मैंने कई ऐसी फिल्में की हैं, लेकिन पता नहीं क्यों यहाँ कोई दे ही नहीं रहा। मैं तो प्रोफेशनली trained डांसर भी हूं। मैं कर सकती हूं। डेविड सर ने मुझे लिया तो मैंने किया। मुझे लगा था कि जुड़वा के बाद लोगों को लगेगा कि मैं ये भी कर सकती हूं, लेकिन अभी भी कोई नहीं आ रहा।

पिछले इंटरव्यू में आपने कहा था कि आप खुद को ए- लिस्ट स्टार नहीं मानती हैं। क्या अब कुछ बदलाव हुआ है?

पिछले इंटरव्यू में आपने कहा था कि आप खुद को ए- लिस्ट स्टार नहीं मानती हैं। क्या अब कुछ बदलाव हुआ है?

फिलहाल तो ना मैं खुद को ए लिस्ट एक्ट्रेस मानती हूं, ना स्टार मानती हूं। मेरे हिसाब से जिस दिन दर्शक मेरे लिए फ़िल्म देखने थिएटर तक आएंगे और अपने 3 घंटे देंगे। जिस दिन उन्हें मुझ पर वैसा विश्वास हो जाएगा, उस दिन मैं खुद को स्टार मान लूंगी।

आपकी फ़िल्म महिला दिवस पर रिलीज हुई है। आपके लिए फेमिनिज़्म (नारीवाद) का क्या अर्थ है?

आपकी फ़िल्म महिला दिवस पर रिलीज हुई है। आपके लिए फेमिनिज़्म (नारीवाद) का क्या अर्थ है?

समानता। मेरे लिए फेमिनिज्म यही है कि आप अपने सोच को किसी से प्रभावित ना होने दें। आपको क्या करना है, क्या नहीं करना है, इसका फैसला किसी और के हाथों में नहीं दीजिए। खुद फैसला लीजिए। गलती होती है तो हो, उससे सीख कर खुद आगे बढिए।

अमिताभ बच्चन के साथ आप दो फिल्मों में काम कर चुकी हैं। उनकी कोई खास बात जो आपको प्रेरित करती हो?

अमिताभ बच्चन के साथ आप दो फिल्मों में काम कर चुकी हैं। उनकी कोई खास बात जो आपको प्रेरित करती हो?

इस उम्र में भी उनमें बच्चों जैसा उत्साह है, जो कि तरीफेकाबिल है। दिन में सिर्फ 3 घंटे सोते हैं वो और बाकी समय काम ही करते रहते हैं। उनको कहना पड़ता है कि सिर आराम कर लो आप थोड़ा। उस उम्र में मैं इनके 20 परसेंट भी energetic रहूंगी तो मुझे और कुछ नहीं चाहिए।

बॉलीवुड की कौन सी बात बदलना चाहेंगी ?

बॉलीवुड की कौन सी बात बदलना चाहेंगी ?

कि यहाँ बाहर से आए कलाकारों को भी बराबर का मौका मिले।

English summary
In an interview with Filmibeat, terrific actress Taapsee Pannu says, I think there is no better revenge than success.
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