Interview: सुशांत सिंह राजपूत ने क्यों साइन की ब्योमकेश बख्शी
शुद्ध देसी रोमांस करने के बाद अब सिल्वर स्क्रीन पर जासूसी करते नज़र आएंगे सुशांत सिंह राजपूत। दिबाकर बैनर्जी की फिल्म ब्योमकेश बख्शी में सुशांत सिंह राजपूत मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। सुशांत सिंह का मानना है कि उनके अंदर डिटेक्टिव ब्योमकेश वाली खूबियां निर्देशक को नज़र आईं इसलिए उन्हें इसके लिए साइन किया गया। जानिये फिल्म से जुड़ी कुछ और बातें इस इंटरव्यू में।
कितना मुश्किल था ब्योमकेश बख्शी का किरदार निभाना, कितनी मेहनत करनी पड़ी आपको?
मुझे ये मुझे मुश्किल नहीं लगा लेकिन बहुत ही इंटरेस्टिंग था ब्योमकेश का किरदार निभाना। 1940 में कोलकाता कैसा लगता था ये जानने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। फिर करीब साढे़ चार महीने कोलकाता में रहना वहां को लोगों के रहन सहन को समझना सबकुछ काफी मनोरंजक था। दिबाकर के साथ लंबी लंबी बातें करना ब्योमकेश कैसे दिखता होगा। चूंकि हमें नहीं पता था कि ब्योमकेश असल में कैसे थे तो हमने उन साढ़े चार महीनों में दिबाकर के किरदार को बनाया।
जब आप ब्योमकेश बख्शी के किरदार को निभाने के लिए सेट पर आए तो आपके दिमाग में कहीं ना कहीं ब्योमकेश बख्शी की कोई याद कोई झलक थी?
जब मैं ये किरदार निभा रहा था तो जाहिर कि दिमाग में कहीं ना कहीं ब्योमकेश बख्शी की एक झलक थी क्योंकि बचपन में उस टीवी शो को देखा करता था। इसके अलावा जब आप निर्देशक, कहानीकार के साथ डिसकशन करते हैं तो कहीं ना कहीं तो आपके दिमाग में भी कुछ ना कुछ तो तस्वीर बन ही जाती है और सेट पर हम बतौर एक्टर अपनी एक सोच लेकर जाते हैं।
अक्सर हर किरदार एक्टर के अंदर कुछ ना कुछ छोड़ जाता है। ब्योमकेश बख्शी का किरदार आपके अंदर क्या बदलाव ला गया? और फिल्म के लिए आपको ही क्यों चुना गया?
बतौर एक्टर आपको तभी ऐसी फिल्म में लिया जाता है अगर आपके अंदर उस किरदार को समझने की शक्ति हो या फिर वैसी खूबियां हों। जब भी आप किसी किरदार को निभाते हैं तो अपने अंदर की ही खूबियों को उस किरदार में ढालते हैं। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। हालांकि अभी तक मैने जितनी भी फिल्में की हैं उनके शूट के आखिरी हफ्ते में बहुत बुरा सा अधूरा सा लगता है। लेकिन ब्योमकेश के शूट खत्म होने के दौरान ऐसा नहीं हुआ क्योंकि अभी हमारे पास करीब 31 कहानियां और हैं। अगर ये पहली कहानी लोगों को पसंद आई तो हम आगे की कहानियां भी बनाएंगे।


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