शुद्ध देसी रोमांस, हर प्यार करने वाले की कहानी है- सुशांत सिंह
(सोनिका मिश्रा) कहते हैं कि प्यार इंसान को कभी कभी इतना कंफ्यूज कर देता है कि वो समझ ही नहीं पाता कि क्या सही है और क्या गलत। आज का यूथ कभी आकर्षण को प्यार समझ बैठता है तो कभी प्यार को आकर्षण और इन्हीं के बीच में पिसता जाता है। ऐसी ही कहानी पर सुशांत सिंह राजपूत, परिणिती चोपड़ा और वाणी कपूर की फिल्म शुद्ध देसी रोमांस आधारित है। शुद्ध देसी रोमांस फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत और परिणिती चोपड़ा एक लिव इन कपल का किरदार निभा रहे हैं जो कि अपने रिलेशन को लेकर दिमाग में चल रही उथल पुथल को बड़ी ही खूबसूरती के साथ परदे पर उतारते हैं। वनइंडिया की रिपोर्टर ने इंटरव्यू के दौरान शुद्ध देसी रोमांस को लेकर सुशांत की सोच को जानने का प्रयास किया। पेश है इंटव्यू के कुछ अंश।
शुद्ध देसी रोमांस से पहले आपने काई पो छे फिल्म की जिसमें आपने एक ऐसा यूथ दिखाया जिससे कि लोग कनेक्ट करते हैं। लेकिन शुद्ध देसी रोमांस में जो यूथ आप रिप्रेसेंट कर रहे हैं उसे गलत समझा जाता है। क्या कहेंगे आप इस बारे में।
सबसे पहले तो मैं ये कहना चाहूंगा कि इंडिया में हम लोग बहुत ही दोगले इंसान है। हम ऊपर से तो कहते हैं कि हमारा कल्चर है हमें उसे फॉलो करना चाहिए और उसी के चलते हमे उन लोगों को जो कि इन सोशल प्रोटोकॉल्स को नहीं मानते उन्हें गलत बता देते हैं। इंडिया में लोग हर चीज को अपने कल्चर अपनी सोशल वैल्यूज को लेकर काफी नियम बनाकर रखते हैं लेकिन हमी उन्हें समय आने पर तोड़ भी देते हैं। जो लोग इन नियमों से हटकर कुछ करते हैं उन्हें गलत ठहरा देते हैं। ऐसा नहीं है कि मैंने शुद्ध देसी रोमांस में जो किरदार निभाया है वो गलत है या फिर उसमें कुछ बुराई है। लेकिन बस वो उस इंसान के साथ रहना चाहता है जिससे वो प्यार करता है। अब लोगों को ये गलत लगता है तो ये उनकी सोच पर निर्भर करता है।
शुद्ध देसी रोमांस के विषय के बारे में कुछ बताइये। आपके अनुसार फिल्म में क्या दिखाने की कोशिश की गयी है।
शुद्ध देसी रोमांस का टॉपिक बहुत ही खास और अलग है। इस फिल्म में हमने एक रिलेशन में रह रहे इंसान के दिमाग में हर रोज, हर पल उठने वाले ख्यालों को जाहिर किया गया है। वो हर एक शख्स जो कि किसी के साथ रिलेशन में रह चुका है या फिर रह रहा है इस फिल्म से खुद को रिलेट कर सकता है क्योंकि ये उसी की कहानी है। ऐसा हर रिलेशन मे रहे इंसान के साथ होता है। हम जब किसी को पसंद करते हैं और ये डिसाइड करते हैं कि हमें उसके साथ शादी करनी है या फिर उसके साथ रहना है तो उसके बाद रिलेशन के दौरान हर पल हमारे दिमाग में उस शख्स को लेकर रिलेशन को लेकर ख्याल आते रहते हैं फिर ये हमारे ऊपर होता है कि हम क्या डिसीजन लेते हैं। किन बातों को इग्नोर करके उस रिलेशन को बचाते हैं या फिर किन ख्यालों को लेकर उस रिलेशन को खत्म करते हैं। यही सब इस फिल्म में दिखाया गया है।
शुद्ध देसी रोमांस के किरदार को निभाने के लिए आपने कहां से प्रेरणा ली।
मैं तब तक कोई कैरेक्टर नहीं निभाता जब तक मैं खुद उस कैरेक्टर से कनेक्ट नहीं करता। जब मुझे लगता है कि मैं सुशांत सिहं किसी किरदार से खुद को रिलेट कर सकता हूं तभी मैं उसके लिए हां कहता हूं। मेरा मानना है कि किसी किरदार को प्ले करने के लिए उसे जीना बहुत जरुरी है। इसीलिए मैने पहली फिल्म के बाद दूसरी फिल्म साइन करने के लिए कुछ महीनों का वक्त लिया ताकि मैं खुद को उस किरदार के लिए तैयार कर सकूं। शुद्ध देसी रोमांस के किरदार में मैं खुद को कहीं ना कहीं देखता हूं इसीलिए मैंने ये किरदार करने के लिए हां की।
क्या आपको पता था कि काई पो छे फिल्म बॉक्स ऑफिस पर इतना अच्छा बिजनेस करेगी और क्या फिल्म साइन करते समय आप ये प्वाइंट अपने दिमाग में रखते हैं?
मुझे ये समझ में नहीं आता कि कौन सी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कैसा बिजनेस करेगी। कभी कभी एक एवरेज फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा देती है तो कभी कभी एक बेहतरीन फिल्म रिलीज ही नहीं हो पाती। तो मुझे ये समझ ही नहीं आता कि कौन सी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कैसा बिजनेस करेगी। तो मैं ये सोचकर फिल्में साइन नहीं करता कि ये बॉक्स ऑफिस पर कैसा बिजनेस करेगी बल्कि फिल्म की स्क्रिप्ट और डायरेक्टर का वीजन देखकर फिल्म साइन करता हूं।
क्या आपको लगता है कि लोगों की सोच का वो जिस शहर में रह रहे हैं उसका काफी प्रभाव पड़ता है।
भारत के हर एक शहर के लोगों की अपनी एक सोच है। हम सभी अपनी एक सोच पर ही टिके रहते हैं एक सेट मैंटेलिटी है सभी की और जो कोई उस सोच से हटकर कुछ करता है तो बस हम उसकी बैंड बजा देते हैं उसे गलत ठहरा देते हैं। इस फिल्म में भी कुछ ऐसा ही दिखाया गया है कि हमारे देश की जो सोच है और हमारा यूथ जो करता है दोनों के बीच होने वाले कांफ्लिक्ट के दौरान जो कहानी निकल कर आती है उसे ही इस फिल्म में दिखाया गया है। यूथ इसी कॉंफ्लिक्ट में फंसा रह जाता है कि वो क्या करे जो दुनिया के हिसाब से सही है वो या फिर जो उनके हिसाब से सही है।
शुद्ध देसी रोमांस में आपके और परिणिती के बीच कई किसिंग सीन और इंटिमेट सीन्स शूट किये गये हैं। परिणिती तो अपनी पहली ही फिल्म में ये सब कर चुकी हैं लेकिन क्या आपको ऐसे सीन्स करते समय किसी तरह की कोई मुश्किल हुई।
एक एक्टर वही है जो अपने किरदार को और अपने किरदार के हर एक इमोशन को हूबहू करे। जैसे कि काई पो छे में मैं मर गया था और उस सीन को बिल्कुल रियल तरीके से निभाने के लिए मैंने बिल्कुल ऐसा सोचा कि मैं सच में मर रहा हूं। बाद में जब मैंने फिल्म को देखा तो मैं खुद ही रो पडा़ खुद को मरता हुआ देखकर। तो एक एक्टरट होने के नाते अगर मैंने कोई फिल्म साइन की है तो मैं बाद में ये नहीं कह सकता कि मैं इसका ये इमोशन करुंगा लेकिन ये नहीं करुगा। अगर इंटिमेट सीन्स किसिंग सीन्स हैं तो मुझे उन्हें भी अच्छी तरह से निभाना होगा क्योंकि वो भी किरदार की कहानी की मांग है। मुझे इस तरह के सीन्स करने में कोई प्रॉब्लम नहीं है। अगर दर्शक ओके हैं तो मैं भी ओके हूं।
क्या ये बात सच है कि शुद्ध देसी रोमांस में अपने और परिणिती के बीच किसिंग सीन के बारे में आपने अंकिता को नहीं बताया?
आपको ऐसा लगता है कि मैंने नहीं बताया होगा। मैं सोचता हूं कि काश मेरे अंदर इतनी हिम्मत होती कि मैं कभी उससे कुछ छुपाकर कर पाता लेकिन मैं ऐसा नहीं करता। उसे सबकुछ पता रहता है।


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