EXCLUSIVE: "कोई फॉर्मूला नहीं था, सिर्फ इरादा था कि मैं मजदूरों को पैदल नहीं जाने दूंगा"- सोनू सूद

प्रवासी मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने का प्रण लेकर एक खास पहल की शुरुआत करने वाले अभिनेता सोनू सूद रात दिन इस दिशा में काम कर रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान मुंबई में फंसे अब तक हजारों लागों को अभिनेता ने उनके घर, उनके परिवार के पास पहुंचने में मदद दी है। और अभी भी यह मिशन जारी है। इस व्यस्तता के बीच थोड़ा सा वक्त निकालकर अभिनेता ने फिल्मीबीट से खास बातचीत की, जहां उन्होंने बताया कि किस तरह से उन्हें प्रवासी मजदूरों को घर भेजने का ख्याल आया, और कैसे उन्होंने इस मुहिम की शुरुआत की।

sonu sood

प्रवासियों को घर तक पहुंचाने के अपने निरंतर प्रयास पर बात करते हुए सोनू सूद ने कहा, "यह मेरी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण वक्त है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह मुहिम इस स्तर तक जाएगा। मुझे लगा था कि कुछ लोगों की मदद करूंगा, फिर मैंने हजारों की मदद करने की सोची, और आज मैं हर जरूरतमंद की मदद करना चाहता हूं। यह सफर चलता जा रहा है और मैं खुद को खुशनसीब मानता हूं कि ईश्वर ने मुझे उनकी मदद करने के लिए एक माध्यम के तौर पर चुना। मैं इसे अब अपना कर्तव्य मानता हूं। इस काम में मेरे दिन के 20 घंटे तक जाते हैं, लेकिन मैं सोचता हूं कि काश एक दिन में 30 घंटे होते तो मैं और ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद कर पाता।"

'नहीं चाहता कि वो बच्चे मीलों पैदल चलने की भयानक यादों के साथ बढ़ें'

'नहीं चाहता कि वो बच्चे मीलों पैदल चलने की भयानक यादों के साथ बढ़ें'

"मजदूरों के मसीहा" माने जा रहे दबंग अभिनेता अब तक हजारों लोगों को कर्नाटक, झारखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार के शहरों और गांवों में भेज चुके हैं। इस मुहिम की शुरुआत के बारे में बताते हुए 46 वर्षीय अभिनेता ने कहा, सड़कों पर चलते इन प्रवासियों की तस्वीर ने मुझे इसके लिए प्रेरित किया। वो लोग जो अपने बच्चों के साथ, बुजुर्ग के साथ एक अंतहीन यात्रा पर निकल पड़े थे। कल्पना कीजिए, एक पिता अपने बच्चों को बोलता जा रहा होगा, बिहार जल्दी आ जाएगा, यूपी जल्दी आ जाएगा.. और उन्हें हजारों किलोमीटर का रास्ता तय करना है। और जब ये बच्चे बड़े हो जाएंगे, तो उनके पास किस तरह की यादें होंगी, कि किस तरह उन्होंने अपने माता- पिता को मीलों पैदल चलते देखा, घर वापस के लिए संघर्ष करते देखा। मैं कभी नहीं चाहता कि वे बच्चे इन यादों के साथ बड़े हों। इसलिए, मुझे लगा कि मुझे आगे आना होगा और इन लोगों की मदद करनी होगी।

'कोई फॉर्मयूला नहीं है'

'कोई फॉर्मयूला नहीं है'

"मेरे पास इसका कोई फॉर्मयूला नहीं है, लेकिन मेरा एकमात्र इरादा यही था कि मैं इन लोगों को पैदल नहीं जाने दूंगा", सोनू सूद ने आगे कहा।

मार्च में शुरु हुए लॉकडाउन के बाद बड़े शहरों में रहने वाले हजारों- लाखों प्रवासी मजदूर बेरोजगार, खाली जेब के साथ अपने अपने गांवों में जाने को मजबूर हैं। इस सफर पर बात करते हुए सोनू सूद ने कहा, "पहली बार मैंने कर्नाटक जा रहे 350 प्रवासी मजदूरों से बात की थी। उनके लिए मैंने सरकार से अनुमति मांगी। मुझे अनुमति मिली और मैंने उन्हें बसों से भेज दिया। यह पहला कदम था। इसके बाद बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ के प्रवासियों को भेजने का इंतजाम शुरु किया।"

'तब तक काम करना है जब तक अंतिम प्रवासी अपने घर नहीं पहुंच जाता'

'तब तक काम करना है जब तक अंतिम प्रवासी अपने घर नहीं पहुंच जाता'

भारत में कोरोना की शुरुआत होते ही अभिनेता ने कोविड-19 मरीजों की देखभाल करने वाले मेडिकल स्टॉफ के लिए अपना 6 मंजिला होटल खोल दिया था। इस बारे में सोनू सूद ने कहा, मैंने सभी नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ और डॉक्टरों के लिए अपना होटल दे दिया, ताकि वे वहां रह सकें, आराम कर सकें, अपना पूरा ध्यान और समय अपनी ड्यूटी को दे सकें, और अधिक से अधिक जीवन बचा सकें। वे अभी भी वहां रह रहे हैं। वह मेरी ओर से एक छोटा सा योगदान था। लेकिन जब प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने का अभियान शुरु हुआ तो मैंने यह समझ लिया था, यहां मैं आंकड़ों को ध्यान में रखकर काम नहीं कर सकता, तब तक काम करना है जब तक अंतिम प्रवासी अपने घर नहीं पहुंच जाता।

'अब तक 18 से 20 हजार लोगों को अपने घरों को भेज दिया है'

'अब तक 18 से 20 हजार लोगों को अपने घरों को भेज दिया है'

सोनू सूद और उनकी टीम ने अब तक 18 से 20 हजार लोगों को अपने घरों को भेज दिया है। इस प्रक्रिया के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, "पहले मैंने अपने दम पर शुरुआत की, फिर लोग जुड़ते चले गए। मेरी करीबी मित्र नीति गोयल और मैं गरीबों में खाना बांटने हाईवे से गुजर रहे थे, जब हमने इन प्रवासी मजदूरों को पैदल जाते देखा। तभी हमने सोचा कि क्यों ना इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जाए और इन्हें पैदल जाने से बचाने और समझाने की कोशिश की जाए। और जैसे ही हमने प्रवासियों का पहला समूह कर्नाटक भेजा, बात फैल गई। लोगों को हम पर विश्वास हुआ। हमें कॉल्स आने शुरु हुए और हमने लोगों को घर भेजना शुरु किया। कई लोग ने जिन्होंने पैदल चलकर जाने की योजना बनाई थी, वो रूक गए। मुझे पता था विश्वास बहुत बड़ी चीज होती है। और अब यह जिम्मेदारी मेरे कंधों पर है कि मैं इन्हें सकुशल वापस इन्हें इनके घर भेजूं।"

'आज हमारी टीम में लगभग 15- 20 लोग हैं'

'आज हमारी टीम में लगभग 15- 20 लोग हैं'

अभिनेता ने आगे कहा, "मैंने एक टोल फ्री नंबर शुरू किया, फिर अपने सभी चार्टर्ड अकाउंटेंट और मित्रों को लेकर टीम बनाया और आज हमारी टीम में लगभग 15- 20 लोग हैं जो सिर्फ इस पर पर ध्यान दे रहे हैं कि कौन, कहां, किस शहर, किस जिले में यात्रा कर रहा है। मेरे पास 50-60 वालंटियर हैं जो सिर्फ लोगों के खाने पीने का ध्यान रख रहे हैं। इनके सपोर्ट ने मुझे वास्तव में आगे बढ़ने में मदद की। हमें अभी और आगे जाना है।"

'आप तभी सफल होते हैं जब आप किसी की मदद कर सकते हैं'

'आप तभी सफल होते हैं जब आप किसी की मदद कर सकते हैं'

लोगों से मिल रहे प्यार और विश्वास से अभिभूत सोनू सूद ने कहा, "हाल ही में मैंने एक दिल छूने वाली खबर सुनी है, एक प्रवासी ने मुझे फोन किया और कहा कि उन्होंने अपने बच्चे का नाम सोनू सूद श्रीवास्तव रखा है, तो मैंने उनसे पूछा कि यह कैसे हो सकता है, सूद और श्रीवास्तव.. दोनों ही? उन्होंने कहा, 'सिर्फ मेरे परिवार में नहीं, बल्कि अब कई परिवारों में सोनू सूद होंगे'। उनकी बात मेरे दिल को छू गई। मैं चाहता हूं कि मैं अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सकूं और उन्हें उनके घर तक पहुंचा सकूं। खैर, यात्रा जारी है और मैं इसमें अपनी ओर से कोई कसर नहीं रहने दूंगा। मैं चाहता हूं कि मेरे माता-पिता को मुझ पर गर्व हो, जो स्वर्ग में बैठे हैं, और मेरा मार्गदर्शन कर रहे हैं।"

सोनू सूद ने अपनी मां द्वारा कही गए एक खूबसूरत और महत्वपूर्ण पंक्ति के साथ इंटरव्यू खत्म किया। उन्होंने कहा, मेरी मां मुझसे कहती थी, "आप सही मायने में तभी सफल होते हैं जब आप किसी की मदद कर सकते हैं".. लिहाजा, मैं अपना प्रयास पूरी सच्चाई के साथ जारी रखूंगा।

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