INTERVIEW: कीमोथेरेपी होने के बाद डायलॅाग याद रखना मेरे लिए चुनौती बन गया - सोनाली बेंद्रे
कैंसर से जंग जीत कर सोनाली ब्रेंदे ने फिर से कैमरे के सामने वापसी की है। जी5 की सीरीज 'द ब्रोकन न्यूज' से सोनाली ओटीटी की दुनिया में कदम रख रही हैं। सोनाली ब्रेंदे का कहना है कि जिस दौर से मैं गुजरी हूं वो वक्त आपको सीखा देता है कि आपके लिए क्या मायने रखता है, और क्या नहीं।

Filmibeat Hindi फिल्मीबीट से बातचीत के दौरान सोनाली ने बताया कि बतौर एक्ट्रेस अपनी वापसी के लिए उन्होंने यह योजना बनाई है कि उन्हें अपनी उम्र के किरदार निभाना है। साथ ही नए लोगों के साथ काम करना है। सोनाली को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह ओटीटी, टीवी या फिर फिल्म हो। यहां पढ़िए सोनाली ब्रेंदे से खास बातचीत।

नए लोगों के साथ काम करना है
मैं काफी समय बाद कैमरे के सामने काम कर रही हूं। पहले से अभी में किसी भी तरह का बदलाव शूटिंग में नहीं लगा। द ब्रोकन न्यूज में मुझे नए लोगों के साथ काम करने का अवसर मिला है। श्रिया पिलगांवकरऔर जयदीप अहलावत से मैंने काफी कुछ सीखा है। जिस तरह से सीरीज की शूटिंग हुई है वह रियल तरीके से हुई है। यह मेरे लिए उत्साहित करने वाली प्रक्रिया रही है।

पैन इंडिया फिल्म की चर्चा क्यों हो रही है, ये तो पहले से मौजूद
अपनी उम्र का किरदार निभाने के सवाल पर सोनाली ने कहा कि मेरे ख्याल से जब मल्टीप्लेक्स का आगाज हुआ तो बदलाव शुरू हुआ था। उससे पहले ऐसा नहीं था। अब लोग पैन इंडिया फिल्म की चर्चा करते रहते हैं। लेकिन पहले भी तो पैन इंडिया फिल्में हुआ करती थीं। हम तमिल फिल्में भी कर रहे थे। तेलुगू फिल्में भी कर रहे थे। लेकिन उस वक्त सिंगल स्क्रीन्सहुआ करते थे। आपको जब इतने सारे दर्शकों तक पहुंचना है तो आपको हर जगह पहुंचना होता था। वहीं अब इतनी सारी जगहे हैं सिनेमा के लिए। हमारे पास ढेर सारी कहानी है। एक एक्टर के तौर पर हमारे लिए भी विस्तार हुआ है। अवसर बढ़ा है।

समाज के प्रति जिम्मेदारी समझना जरूरी
पत्रकार की भूमिका निभाने के सवाल पर सोनाली ने कहा किपत्रकार समाज का आईना हैं। वह भी इंसान हैं। उनके पास भी अपनी समस्या है।। जहां पर मैं समझ रही हूं कि यह बिजनेस है। लेकिन सिर्फ मुनाफे की बात नहीं है। ये कुछ प्रोफेशन ऐसे हैं जहां पर आप समाज के लिए क्या कर रहे हैं, इसका ध्यान देना जरूरी है।आपका बिजनेस कैसे चल रहा है उससे थोड़ा बढ़कर। शिक्षक, डॉक्टर, पत्रकार समाज के लिए खड़े रहते हैं। इस वजह से उन्हें महत्तव भी दिय़ा जाता है। इस जिम्मेदारी का अहसास मुझे बहुत मजबूत तौर पर हुआ जब मैंने यह भूमिका निभाई।

कीमोथेरेपी के बाद डायलॉग याद रखना कठिन
सोनाली ने यह भी कहा कि कैंसर के इलाज के बाद उनके लिए काम करना कठिन रहा है। वह कहती हैं किइस कहानी में एक चेहरा नहीं है। पोस्टर पर जैसे तीन लोग दिख रहे हैं वैसे यह कहानी भी है। आज के जमाने में काम करने की खूबसूरती यह है कि इतनी सारी आवाज और विचारधारा के लिए एक जगह है। मैं कई दिनों बाद काम करने को लेकर डरी हुई थी। पहले एक बार पढ़ने पर डायलॅागयाद रहता था। कीमोथेरेपीहोने के बाद लाइन याद रखना चुनौती रहा है। मुझे एक नया तरीका खोजना पड़ा कि मैं किस तरह से इसे संभालूंगी। मैं सेट पर डरी हुई आयी थी।श्रिया पिलगांवकर और जयदीप अनुभवी कलाकार हैं। जयदीप और श्रिया ने मुझे सेट पर मुझे सहज होने में सहायता की।

मीडिया और सेलेब्स के बीच एक लाइन होना जरूरी
अपने बारे में कौन सी खबर कभी नहीं सुनना चाहेंगी, इस सवाल के जवाब में सोनाली ने बताया किजो चीज हम सुनना नहीं चाहेंगे वो ऐसी होगी जो डरावना होगा।मेरे ख्याल से हमारे लिए हमारी निजता का सम्मान करना चाहिए। हम भी समझते हैं कि हम पब्लिकफिगर हैं। फिर भी कहीं पर एक अनकहीं सीमा रहनी चाहिए। कई बार सीमा पार हो जाती है तो यह घातक होती है।
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मैं अपने आप को दायरे में नहीं रखना चाहती
बड़े पर्दे पर वापसी के सवाल पर सोनाली ने सीधे तौर पर कहा किमेरी दिलचस्पी यह है कि मैं अपने किरदार के जरिए कौन सी कहानी सुना रही हूं। अगर मुझे कहानी पसंंद आयी, तो वह फिल्म, छोटे पर्दे या ओटीटी पर भी हो सकता है। मैं उस समय में नहीं हूं कि अपने आप दायरे में रखूं। मुझे लोगों के समक्ष भिन्न प्रकार की कहानी सुनानी है। किरदार निभाना है।


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