सैफ हैं पहला प्यार, करीना को कोई प्रॉब्लम नहीं- परिणिती
(सोनिका् मिश्रा) बॉलीवुड में हर रोज नयी एक्ट्रेस आती है और कुछ तो पहली फिल्म के बाद ही गायब हो जाती हैं। लेकिन प्रिंयका चोपडा़ की छोटी बहन परिणिती चोपड़ा ने बॉलीवुड में कुछ इस कदर एंट्री की कि उन्हें निगलेक्ट करना या भूल पाना किसी के लिए भी नामुमकिन हो गया। फिल्म लेडीज वर्सेस रिकी बहल में छोटा सा किरदार निभाने के बाद भी परिणिती ने अपनी एक्टिंग से ऐसा प्रभाव डाला कि उन्हें तुरंत ही यशराज की फिल्म इशकजादे में मेन लीड रोल का ऑफर मिल गया। और अब उनकी अगली लीड रोल वाली फिल्म शुद्ध देसी रोमांस 6 सितंबर को रिलीज हो रही है। ये फिल्म लिव इन रिलेशनशिप पर आधारित है। परिणिती का कहना है कि वो लिव इन रिलेशनशिप को गलत नहीं मानती हैं। अगर उन्हें भी मौका मिला तो वो भी लिव इन में रहने सकती हैं।
वनइंडिया की रिपोर्टर सोनिका मिश्रा के साथ एक्सक्लूसि इंटरव्यू के दौरान परिणिती ने शुद्ध देसी रोमांस के बारे में काफी बातें शेयर की।
शुद्ध देसी रोमांस फिल्म को हां करने के पीछे यशराज बैनर के साथ का कॉंट्रेक्ट वजह थी या फिर फिल्म का सबजेक्ट? आपका किरदार किस तरह का है फिल्म में?
मुझे शुद्ध देसी रोमांस की स्क्रिप्ट और फिल्म की थीम इतनी पसंद आई कि मैंने शुद्ध देसी रोमांस फिल्म को करने के लिए हां कर दी। शुद्ध देसी रोमांस में अपने किरदार के बारे में बाकियों की तरह ये नहीं कहूंगी कि ये काफी हटकर था या फिर अभी तक निभाए गये सभी किरदारों से अलग था। जैसा कि लोग कहते हैं कि मैं बहुत तेज और बबली लड़की हूं लेकिन फिल्म में मेरा किरदार ऐसा बिल्कुल नहीं है। फिल्म के गानों के अलावा बाकी मेरा किरदार काफी चुपचाप रहने वाला और शांत है। लेकिन ये किरदार करने में बहुत मजा आया और साथ ही ये किरदार रियल परिणिती से बिल्कुल ही अलग था। शुद्ध देसी रोमांस फिल्म भी एक ऐसे विषय पर आधारित है जिसके बारे में लोग बात तक नहीं करना चाहते।
शुद्ध देसी रोमासं में वाणी और सुशांत सिंह के साथ काम करने का ऐक्सपीरियंस कैसा रहा?
वाणी और सुशांत सिंह के साथ काम करने का एक्सपीरियंस काफी अच्छा रहा। वाणी को देखकर तो मुझे अपनी पहली फिल्म याद आ गयी क्योंकि मेरी भी पहली फिल्म मनीष के साथ थी और वाणी की भी पहली फिल्म मनीष के साथ है। दूसरी तरफ सुशांत का काम करने का तरीका और मेरा काम करने का तरीका हमारा स्क्रिप्ट को लेकर होमवर्क करने का तरीका काफी सेम था। तो दोनों के साथ ही काम करके बहुत ही अपनापन सा लगा।
आपने हाल ही में एक प्रेस कॉफ्रेंस के दौरान कहा कि लिव इन रिलेशनशिप को आप गलत नहीं मानतीं। तो क्या इसका ये मतलब है कि आप लिव इन को सही मानती हैं?
मुझे लगता है कि लिव इन रिलेशनशिप में आखिर गलत क्या है। मेरे ख्याल से लोगों को लिव इन रिलेशनशिप इसलिए नहीं सही लगता क्योंकि इसके साथ प्री मैरिटल सेक्स भी जुड़ा हुआ है। लेकिन बिना लिव इन रिलेशनशिप के भी तो सेक्स होता है तो लिव इन को क्यों ब्लेम देना। मेरा तो मानना है कि अगर आप किसी ऐसे शख्स से मिलते हैं जिसे आप पसंद तो करते हैं लेकिन उसके साथ शादी करने को लेकर थोड़ा टाइम लेना चाहते हैं। तो उसके साथ लिव इन रिलेशन शिप में रहना गलत नहीं है।
क्या आपको लगता है कि इंडिया में लोगों के लिए ये एक बहुत ही गलत और कुछ ज्यादा ही मॉर्डन बात है?
इंडिया में लोग बहुत ही डबल स्टैंडर्ड रखते हैं। अगर मैं दिन में किसी से मिलूं तो सही और अगर रात को मिलूं तो मैं कुछ गलत कर रही हूं। अरे लोग तो दिन भी सेक्स करते ही हैं ना। मुझे लगता है कि इंडिया में लोग बहुत ही डबल सोच रखते हैं। ये तो हर किसी की अपनी सोच है और उनका फैसला है। और सेक्स का मैरिज सर्टिफिकेट से क्या लेना देना। बिना मैरिज के भी कितने लोग सेक्स करते हैं लेकिन इसके लिए सिर्फ लिव इन रिलेशनशिप जिम्मेदार है ये तो गलत है। हमारी फिल्म शुद्ध देसी रोमांस भी इसी पर आधारित है।
लेकिन आज भी इंडिया के कई छोटे शहरों में लिव इन को लेकर लोगों की सोच गलत है। इसपर आप क्या कहेंगी?
मेरे हिसाब से आप कहां रहते हैं इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता है। ये सब आपके विचारों और आपकी सोच पर निर्भर करता है। मैंने मुंबई में भी लोगों को काफी छोटी और कंसरवेटिव सोच वाला देखा है। जबकि मैं खुद अंबाला से हूं और वहां पर लोगों की सोच काफी मॉर्डन है। बल्कि लंदन में भी लोगों की सोच काफी कंसरवेटिव है। वहां पर रहने वाले इंडियन्स अपने कपड़ों और साथ ही अपने विचारों में भी काफी पुरानी सोच रखते हैं। बल्कि इंडिया में हम कितने मॉर्डन हैं।
फिल्म के प्रोमो देखने पर ऐसा लग रहा है कि जैसे कि फिल्म में किरदारों का दिल उनके दिमाग पर हावी रहता है। कुछ बताइये इस बारे में।
इस फिल्म में तीनों किरदार अपने दिल की बात सुनते हैं लेकिन उनका दिमाग भी उनके साथ ही रहता है और उन्हें समझाता रहता है। सुशांत मुझे डिच नहीं करता बल्कि वो फिल्म में मुझे और वाणी को लेकर कंफ्यूज है। एक तरफ मैं हूं जो कि सिगरेट पीती हूं और सोसाइटी बारे में नहीं सोचती और सुशांत को कहतीं हू कि चलो हम लिव इन में रहते हैं उसमें क्या बुराई है। दूसरी तरफ वाणी है जो कि सुशांत को कहती है कि अगर किस करना है तो कर लो इतना सोच क्या रहे हो। तो तीनों ही किरदार अपने दिमाग से ऊपर दिल को सुनते हैं। हम कुछ करने से पहले सोसाइटी के बारे में नहीं सोचते क्योंकि हम कुछ भी गैरकानूनी नहीं कर रहे हैं। हम बस वो कर रहे हैं जो कि हमारा दिल चाहता है।


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