सलमान मेरे दिल के बेहद करीब हैं: संजय लीला भंसाली

Sanjay Leela Bhansali
मुंबई। 'हम दिल दे चुके सनम' और 'देवदास' जैसी सुपर हिट फिल्‍में देने वाले निर्माता निर्देशक संजय लीला भंसाली का कहना है कि शाहरूख, ऐश्‍वर्या और रानी मुखर्जी मेरे अच्‍छे दोस्‍त हैं लेकिन सलमान खान मेरे दिल के काफी करीब है। मैं अपनी जिंदगी से बेहद खुश हूं और आज मैं जो कुछ भी हूं उससे खुश हूं। मैं अकेले रहना पसंद करता हूं और जिंदगी की कमियों को फिल्‍मों के द्वारा पूरा करता हूं।

दिये गये इंटरव्‍यू में संजय ने अपने जीवन के कई पहलुओं के बारे में बात की-

प्रश्‍न: पहले आप अपने प्रोडक्‍शन हाउस की अतिरिक्‍त जिम्‍मेदारियों को लेकर चिंतित थे?

जवाब: अब मैं पहले से ज्‍यादा साहसी और परिपक्‍व हूं। मैं चाहता हूं कि लोग नये आईडिया के साथ आयें और मेरे प्रोडक्‍शन हाउस में फिल्‍में बनाये। अभी हाल ही में प्रभु देवा ने 'राउडी राठौर' बनायी, बेला ने 'सीरी फरहा की तो निकल पड़ी' बनाई। मैं उन सबके काम से खुश हूं। मैने 2008 में पेरिस में एक ओपेरा का निर्देशन भी किया था। मैं अब पहले से काफी ज्‍यादा काम कर रहा हूं, मैं एक दिन में बीस घंटे काम करता हूं।

प्रश्‍न: आपके प्रोडक्‍शन हाउस ने फिल्‍मों के नाम के नये ट्रेंड सेट किये हैं, जैसे राउडी राठौर, बुलेट राजा, रिवाल्‍वर रानी और रैम्‍बो राजकुमार। इसके बारे में कुछ बताये?

जवाब: मेरा पालन पोषण मुंबई के भुल्‍लेश्‍वर में हुआ है। मैं हर रोज रेड लाइट एरिया के पास से होकर गुजरता था, वहां के आस पास लगे पोस्‍टरों पर मैं ऐसे नाम देखा करता था। मेरा खुद का परिवार भी फिल्‍में देखने का बेहद शौकीन था। आज मैं उन्‍हीं से मिलते जुलते नामों को अपने प्रोडक्‍शन की फिल्‍मों में दोहरा रहा हूं। मुझे खुशी है कि यह नाम काफी पसंद किये जा रहे है और अब कई फिल्‍मों के ऐसे नाम रखे जा रहे हैं।

प्रश्‍न: क्‍या आप अपनी जिंदगी में किसी खास के न होने की कमी महसूस करते ?

जवाब: नहीं। मैं आज जो भी जिंदगी जी रहा हूं उससे खुश हूं क्‍यों‍कि इसे मैंने चुना है। मेरे कई ऐसे रिश्‍ते थे जो कि आगे नहीं बढ़ सके। आप कह सकते हैं कि मैं अकेले रहने वाला एक बंजारा शख्‍स हूं जो कि अपने परिवार का बोझ लेकर आगे नहीं बढ़ सकता है। मैंने अपने आस पास कई रिश्‍तों को टूटते हुए देखा है। आप कह सकते हैं कि मैं रिश्‍तों को लेकर काफी ज्‍यादा गंभीर नहीं हूं।

प्रश्‍न: अगर आपको अपनी जिंदगी में कोई एक चीज बदलनी पड़े तो आप क्‍या बदलेंगे?

जवाब: कुछ भी नहीं। मेरी जिंदगी जैसी भी रही है। मैं उससे खुश हूं। मेरा जो भी पिछला जीवन रहा है। उसी से मै आज यहां हूं। मेरी जिंदगी में जो कमी है वह सिनेमा पूरी करता है। मेरी जिंदगी अपूर्ण है पर मैं निराश या दुखी नहीं हूं।

प्रश्‍न: क्‍या फिल्‍म इंडस्‍ट्री में अच्‍छे दोस्‍त बनाना मुश्किल है?

जवाब: हां ऐसा है। मैं एक फिल्‍म मेकर हूं और कई बार जब एक एक्‍टर को दोबारा साइन नहीं करता तो वो खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं लेकिन अब लोग इन बातों को बेहतर ढंग से समझ रहे हैं। कई बार यह भी होता है कि जो आपको अपना दोस्‍त समझते हैं वो आपका मजाक उड़ाते हैं पर निर्दयता तो मनुष्‍य का स्‍वभाव है।

प्रश्‍न: क्‍या ऐश्‍वर्या राय और रानी मुखर्जी आपकी दोस्‍त हैं?

जवाब: हां यह दोनों ही मेरी अच्‍छी दोस्‍त हैं। इसके अलावा शाहरूख खान और मनीषा कोइराला मेरे काफी करीब है। मेरे लिए दोस्‍ती का मतलब हर रोज दोस्‍तों के साथ बैठ गप्‍पे मारना नहीं है।

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