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    'भगवान ने सरप्राइज़ दिया है'

    By Staff
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    स्लमडॉग मिलिनियेर के लिए ऑस्कर पुरस्कारों के तीन नामांकन पाने के बाद संगीतकार एआर रहमान ने बीबीसी हिंदी से विशेष बातचीत की.ऑस्कर के नामांकन की ख़बर आने के बाद बीबीसी हिंदी की अनुराधा प्रीतम ने उनसे फ़ोन पर बात की.

    फ़िल्म स्लमडॉग मिलिनेयर को इतने सारे नामांकन मिले हैं फ़िल्म को आप कितने ख़ुश हैं?

    आह ! हम सातवें आसमान पर हैं, ऐसा महसूस कर रहे हैं, ये बिल्कुल ही अविश्वसनीय है. जब मैंने ये फ़िल्म की थी तब मैंनै इससे कोई कोई उम्मीद नही रखी थी. मुझे ये फ़िल्म अच्छी लगी थी. ये इतना अच्छा एहसास था-आपको ये फ़िल्म देखनी होगी--समझने के लिए कि मैं क्या कह रहा हूँ. ज़िंदगी जीने का मन करने लगेगा. और इसी की वजह से मैं फ़िल्म का संगीत बना पाया.

    ये तो फ़िल्म की बात हुई लेकिन आपको ख़ुद भी तीन नामांकन मिले हैं, कैसा लग रहा है?

    नही, नही, हममें से किसी ने इसकी उम्मीद नही की थी, ये शायद भगवान ने हमें सरप्राइज़ दिया है. जब हम बहुत उम्मीदें करते हैं तब हमे कुछ नही मिलता और जब कुछ भी नही माँगा तो फिर इतना मिलता है. ऐसा मुझे लगता है.

    क्या आपको लगता है कि इससे विश्व स्तर पर आपको और फ़िल्म को एक पहचान मिलेगी और खास तौर पर दूसरे भारतीय कलाकारों के लिए रास्ता खुल जाएगा?

    बिल्कुल. मुझे लगता है कि अब सही समय आ ही गया है. अब भारत के कलाकार भी पहले जैसे नही रहे. वो खुले विचारों वाले हैं, उन्हें विविधता पसंद है, वो अब क्वालिटी पसंद करते हैं. तो मै उम्मीद करता हूँ कि ये एक पुल की तरह काम करे, भारतीय कलाकारों के लिए कि ये उस पार जाकर पूरी दुनिए जीत लें.

    कुछ लोग ऐसी बातें कर रहे हैं कि फ़िल्म में भारत की ग़रीबी बेचने की कोशिश की गई है, इस पर आप क्या कहेंगे?

    मुझे ऐसा नही लगता. अगर मुझे एक सेकंड के लिए भी ऐसा लगता तो मैं ये फ़िल्म नही करता. मैं एक फ़िल्म को एक टोटालिटी में देखता हूँ. उससे एक कला के संपूर्ण स्वरुप के तौर पर देखता हूँ, और ये देखता हूँ कि वो क्या कह रहा है और फ़िल्म देखने के बाद बाहर आने पर कैसा लगता है. ये फ़िल्म ब्राजील में भी हो सकती थी, ये फिर चीन में, या अमरीका की झुग्गियों की कहानी हो सकती थी ये. -इस फ़िल्म का एक मानवीय पहलू है और एक उत्साह है, जीवन के प्रति.

    क्या आपको लगता है, भारत और भारतीय संगीत को एक मौका मिलेगा भविष्य में, खासकर ओस्कार्स और गोल्डन ग्लोब के बाद?

    बिल्कुल. मुझे अभी से हॉलीवुड से ऑफ़र्स आ रहे हैं, वहां के संगीतज्ञों से कि हमें, भारतीय संगीत से वो वायलिन वाली आवाज़ चाहिए, उस वाद्य यन्त्र से निकलता वो संगीत चाहिए-- मुझे संकेत भेजे जा रहे हैं, वहां से कि मै उनके संगीत का कोऑर्डिनेशन करूँ. अभी तो मैं अपनी आने वाली फिल्मों का कोऑर्डिनेशन कर रहा हूँ.

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