INTERVIEW: फिल्म निर्देशन हमेशा से मेरी विशलिस्ट में है, मैंने लॉकडाउन में एक कहानी भी लिखी है- रणबीर कपूर

यशराज बैनर तले बनी फिल्म 'शमशेरा' के साथ चार सालों के बाद बड़ी स्क्रीन पर दस्तक देने आ रहे अभिनेता रणबीर कपूर इस फिल्म को बेहद खास मानते हैं। अभिनेता ने खुशी जताते हुए कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम दर्शकों के सामने हर बार खुद को नए अंदाज में पेश कर सकें। मैं खुद को लकी मानता हूं कि शमशेरा के साथ मुझे कुछ अलग करने का मौका मिला। बता दें, इस फिल्म में रणबीर कपूर डबल रोल निभा रहे हैं। करण मल्होत्रा निर्देशित इस फिल्म में वाणी कपूर और संजय दत्त भी मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म 22 जुलाई को रिलीज होगी।

साल 2018 में आई ब्लॉकबस्टर फ़िल्म 'संजू' के करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद अब रणबीर की लगातार दो फ़िल्में इस साल रिलीज़ होने जा रही है। पहली फ़िल्म है 'शमशेरा' और दूसरी है 'ब्रह्मास्त्र', जो कि 9 सितंबर को रिलीज होने वाली है। रणबीर का कहना है कि ये साल उनके लिए काफी अहमियत रखता है।

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शमशेरा की रिलीज से पहले रणबीर कपूर ने मीडिया से मुलाकात की, जहां उन्होंने बॉलीवुड में 15 साल पूरे करने के अनुभव से लेकर आलिया भट्ट के साथ शादी, स्टारडम और अपने करियर पर खुलकर बातें की। अपने ख्वाबों को शेयर करते हुए अभिनेता ने कहा, मेरी हमेशा से ये चाहत है कि मैं एक फिल्म डायरेक्ट करूं। इस लॉकडाउन में मैंने एक कहानी लिखी भी है, लेकिन फिलहाल उसे किसी और को सुनाने की हिम्मत नहीं आई है।

यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश-

Q. शमशेरा का रोल जब ऑफर हुआ तो आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी?

Q. शमशेरा का रोल जब ऑफर हुआ तो आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी?

जब मुझे ये फिल्म ऑफर हुई मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि ऐसी फिल्म, ऐसा किरदार मुझे दिया जा रहा है.. क्योंकि जैसा कि आपने देखा है ज्यादातर लोग मुझे रोमांटिक किरदार ही ऑफर करते हैं। मुझे इसकी कहानी बहुत पसंद आई। इसमें दो किरदार थे। लेकिन जब इन्होंने मुझे फिल्म ऑफर की तो सिर्फ बल्ली का किरदार ऑफर किया.. शमशेरा कोई और एक्टर निभाने वाला था। लेकिन मेरे अंदर का स्वार्थी एक्टर जगा और मैंने खुद कहा कि नहीं शमशेरा भी शायद मैं ही कर सकता हूं क्योंकि यहां एक बाप-बेटे के रिश्ते को दिखाना है। शमशेरा की ये दुनिया कमाल की थी और मुझे करण मल्होत्रा के साथ काम करना था। फिर हमने बहुत से लुक टेस्ट किये। शारीरिक तौर पर भी चैलेंजिंग रोल था मेरे लिए, तो बहुत मेहनत और बहुत लगन से मैंने काम किया है इसमें।

Q. चार सालों के बाद आपकी फिल्म आ रही है। इस बात का कितना प्रेशर है?

सच कहूं तो ये सच में मेरे हाथ में था नहीं। इन चार सालों में मैं ब्रह्मास्त्र और शमशेरा दोनों की ही शूटिंग कर रहा था। दोनों ही बहुत बड़े स्तर की फिल्में हैं, लिहाजा इनकी मेकिंग में बहुत समय लगा। हमने शमशेरा के लिए 150 दिन की शूटिंग की। उसके अलावा भी एक्शन ट्रेनिंग थी, गाने की ट्रेनिंग थी.. तो सब मिलाकर मैं तो लगातार काम कर रहा था। फिर लॉकडाउन भी आ गया। बीच में मेरे पिता भी बीमार हो गए थे, तो वहां भी वक्त देना जरूरी था। लेकिन अब बहुत सारी फिल्में एक साथ आ रही हैं। अभी एक साल में मेरी चार फिल्में रिलीज होगीं, तो बस उम्मीद है कि दर्शकों को प्यार मुझे मिलेगा।

Q. लगातार शूटिंग के बीच, पिछले सालों में आपकी निजी जिंदगी काफी उतार- चढ़ाव भरी रही। खुद को पॉजिटिव बनाए रखना कितना आसान या मुश्किल था?

Q. लगातार शूटिंग के बीच, पिछले सालों में आपकी निजी जिंदगी काफी उतार- चढ़ाव भरी रही। खुद को पॉजिटिव बनाए रखना कितना आसान या मुश्किल था?

मेरा सोचना है कि यही जिंदगी है और सबकी जिंदगी में उतार- चढ़ाव आते हैं। ऐसे वक्त में आप अपनी फैमिली के और करीब आते हैं। कभी आप दूसरों की हिम्मत बनते हैं, कभी दूसरे आपकी हिम्मत बनते हैं। ऐसा वक्त था, जहां मेरे परिवार को मेरी जरूरत थी। और मैं फिल्म फैमिली में पला-बढ़ा हूं, तो मैं जानता हूं कि इस इंडस्ट्री में एक एक्टर की जिंदगी में सक्सेस के क्या मायने हैं, या बुरे वक्त से वो कैसे गुजरता है। इन चार सालों में मेरी फिल्म नहीं आई, लेकिन मैं इन बातों से इनसिक्योर नहीं होता। मेरे अंदर एक अच्छी क्वालिटी है, वो है सब्र रखने की क्वालिटी। मुझे अपना काम बहुत पसंद है और मैं फिल्ममेकिंग के प्रोसेस को एन्जॉय करता हूं।

(हंसते हुए) और सच कहूं तो मेरे लिए सबसे मुश्किल ये मार्केटिंग करना होता है। फिल्म में काम करना या शादी करना या पिता बनना.. ये सब तो जिंदगी की खुशियों का हिस्सा हैं। लेकिन मार्केटिंग का समय मेरे लिए बहुत मुश्किल होता है। इसका कारण ये है कि दरअसल फिल्म खत्म किये हुए तो हमें काफी वक्त हो चुका होता है.. शमशेरा का खत्म किए मुझे एक साल हो चुका है, उसके बाद मैंने लव रंजन की फिल्म भी खत्म कर दी है और अब एनिमल में काम कर रहा हूं। तो कहीं ना कहीं आप उस फिल्म को पीछे छोड़कर आगे निकल गए होते हो.. लेकिन फिर मार्केटिंग के लिए वहां वापस आना होता है तो आप दोबारा उस बारे में सोचते हो। सच कहूं तो, फिल्म को जैसे बेचना होता है, उस मामले में मैं थोड़ा कमजोर हूं। खैर, इस वक्त मैं खुश हूं। मेरी दो फिल्म रिलीज हो रही है.. मैं फादर भी बन रहा हूं इस साल, जो मेरे लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है।

Q. आपकी पिछली फिल्म संजय दत्त की बॉयोपिक थी और अब इसमें आप दोनों आमने सामने नजर आ रहे हैं। संजय दत्त के साथ स्क्रीन शेयर करने का कैसा अनुभव रहा?

Q. आपकी पिछली फिल्म संजय दत्त की बॉयोपिक थी और अब इसमें आप दोनों आमने सामने नजर आ रहे हैं। संजय दत्त के साथ स्क्रीन शेयर करने का कैसा अनुभव रहा?

मैं उनके बारे में क्या क्या कहूं.. जवाब बहुत लंबा हो जाएगा। जब मैं छोटा था, मुझे संजू सर इतने पसंद थे कि मेरी कमरे में उनके पोस्टर लगे होते थे। जब मैंने एक्टर के रूप में उनकी बायोपिक की, तो उनकी लाइफ में और घुसने का मौका मिला, उन्हें और जान पाया। और अब फाइनली उनके साथ काम कर रहा हूं, जहां हम स्क्रीन पर एक दूसरे के खिलाफ हैं। संजू सर और मेरा रिश्ता अद्भुत है.. वो मुझे बेटे, दोस्त, भाई की तरह मानते हैं। सेट पर संजू सर को भी सब प्यार करते हैं। वो सेट पर टेडी बीयर की तरह रहते हैं। पूरा सेट.. जो ढ़ाई सौ- तीन सौन काम करते हैं.. हर कोई उनसे आकर मिलता है, उनसे बातचीत करते हैं। तो वो इस तरह के इंसान हैं। और मुझे लेकर वो बहुत प्रोटेक्टिव भी हैं। जब मैं एक्शन करता था इस फिल्म में, तो सीन के बाद वो हमेशा एक्शन डायरेक्टर के पास जाकर पूछते थे कि रणबीर सेफ है ना, उसे ज्यादा चोट लगेगी तो नहीं, उसको करना जरूरी है क्या, कोई स्टंटमैन भी तो कर सकता है। तो हां, मैं खुद को लकी मानता हूं कि मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिला।

Q. शमशेरा को एक फुल मसाला फिल्म की तरह देखा जा रहा है। आज जब दर्शक वर्ल्ड सिनेमा से परिचित हो चुके हैं, ये डकैत और बदले की आग वाली कहानी दर्शकों को आकर्षित कर पाएगी?

Q. शमशेरा को एक फुल मसाला फिल्म की तरह देखा जा रहा है। आज जब दर्शक वर्ल्ड सिनेमा से परिचित हो चुके हैं, ये डकैत और बदले की आग वाली कहानी दर्शकों को आकर्षित कर पाएगी?

जब हम मसाला फिल्म बोलते हैं.. उसका मतलब क्या होता है! मसाला का मतलब होता है मल्टी जॉनर.. कि एक ही फिल्म में एक्शन, रोमांस, कॉमेडी, इमोशन.. सब दिखाई देगा। कभी कभी हम मसाला फिल्मों को गलत टैग दे देते हैं.. कि आप अपना दिमाग घर पर छोड़ कर आओ वैगेरह वैगेरह। लेकिन ऐसी बात नहीं है। मसाला जॉनर जो होता है वो सबसे मुश्किल जॉनर होता है क्योंकि यहां आपकी टार्गेट ऑडियंस भी सबसे बड़ी होती है। अभी नया शब्द आया है 'पैन इंडिया फिल्म', इससे पहले था 100 करोड़ क्लब.. इसके बाद आएगा 'पैन वर्ल्ड फिल्म'.. तो ये सब तो चलते रहेगा। लेकिन ये जो हिंदी कमर्शियल सिनेमा का जो टैग है, ये हमेशा रहेगा।

Q. शमशेरा को शुरुआत में काफी निगेटिव प्रतिक्रिया झेलनी पड़ी थी, लेकिन ट्रेलर रिलीज के बाद रिएक्शन बिल्कुल बदल चुके हैं और लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। बतौर कलाकार फिल्म पर लगातार विश्वास बनाए रखना कितना मुश्किल होता है?

दरअसल, ये सिर्फ विश्वास की बात नहीं है, ये मेरे चुनाव, मेरे निर्णय की बात है। मैंने इस कहानी को बिना किसी प्रेशर के चुना। मेरी इच्छा थी कि मैं इस फिल्म का हिस्सा बनूं। शमशेरा तो अब आ रही है.. लेकिन इससे पहले 6 साल से मैं एक दूसरी फिल्म बना रहा हूं.. ब्रह्मास्त्र। तो हां, आपको अपने चुनाव पर विश्वास रखना होगा। जब आप बतौर एक्टर फिल्मों में काम करते हो, बहुत सारी बातें होती हैं.. अब सोशल मीडिया के जरीए इतने तरह से ओपिनियन बाहर आते हैं। लेकिन आखिर में आपका जो काम है.. वो फिल्म रिलीज होगी तो लोगों को नजर आएगा ही आएगा। अच्छी फिल्म है तो चलेगी, नहीं तो नहीं चलेगी। मुझे याद है जब मैंने संजू भी साइन की थी, इतने लोगों ने कहा था कि रणबीर कहां संजू प्ले कर पाएगा.. कहां संजय दत्त, कहां रणबीर। लेकिन फिल्मों का जादू ही यही है। पोस्टर, ट्रेलर, गाने.. ये सिर्फ लोगों का उत्साह बढ़ाने के लिए होता है.. बाकी फिल्म कैसी है, ये सिर्फ और सिर्फ आपको बड़े पर्दे पर देख कर ही पता चलेगा।

Q. करण मल्होत्रा के निर्देशन में काम करने का अनुभव कैसा रहा?

Q. करण मल्होत्रा के निर्देशन में काम करने का अनुभव कैसा रहा?

करण एक ऐसे डायरेक्टर हैं, जो हर दिन दस से बीस किलो धूल रखते थे सेट पर और एक फैन था। जैसे ही वो एक्शन बोलते थे, फैन स्टार्स कर दिया था और सामने वो धूल उड़ाते थे। वो धूल मिट्टी आंखों, कानों में जा रही है, हम डायलॉग नहीं बोल पा रहे हैं। घर जाकर बीस बार नहाना पड़ता था, फिर भी धूल नहीं निकलती थी। तो ऐसे हमने फिल्म बनाई है। 150 दिन मैं ऐसे धूल पर स्वीमिंग करता था। आज मैं कह सकता हूं कि उस वक्त तो मैं दिमाग में डायरेक्टर को बहुत गाली देता था। लेकिन अब जब स्क्रीन पर देखता हूं, तो लगता है कि ये सब करना व्यर्थ नहीं गया। वो बहुत ही मेहनती और अपने विज़न को लेकर पक्के हैं।

Q. फिल्म में पिता और बेटे के बीच एक बॉण्डिंग दिख रही है। रियल लाइफ में भी आप पिता बनने वाले हैं। कैसा अनुभव कर रहे हैं?

Q. फिल्म में पिता और बेटे के बीच एक बॉण्डिंग दिख रही है। रियल लाइफ में भी आप पिता बनने वाले हैं। कैसा अनुभव कर रहे हैं?

मैंने महसूस किया है कि जब आप मां- पिता बनते हैं या बनने वाले होते हैं तो आपके मन में कहीं ना कहीं अपने पेरेन्ट्स के लिए भी इज्जत बढ़ जाती है। मेरी जो परवरिश रही है, जो वैल्यू सिस्टम मेरे माता- पिता ने मुझे और मेरी बहन को दिये हैं, मैं उसे अपने बच्चे को भी देना चाहूंगा। ये एक लाइफटाइम कमिटमेंट होती है। जिसके लिए आप अभी क्वालिफाइड भी नहीं हो.. लेकिन करते करते सीख जाते हैं। तो हां, थोड़ा डर है, लेकिन एक्साइटमेंट भी है।

Q. अपने पिता (ऋषि कपूर) के साथ अपनी बॉण्डिंग को किस तरह याद करते हैं?

मेरे पापा सख्त थे, लेकिन वो कमाल के पापा थे। उन्होंने मुझे और मेरी बहन को बहुत प्यार दिया है, बहुत सीख दी है, सपोर्ट दिया है। उन्होंने जिंदगी के बारे में बहुत एक्सपोजर दिया है हमें, दुनिया घुमाई हैं हमें, हमारी पढ़ाई के लिए हमें विदेश भेजा। तो वो सब वैल्यू सिस्टम कहीं ना कहीं आप अपने पैरेट्ंस से लेते ही हैं। फिर वही वैल्यू सिस्टम और आपकी खुद के अनुभव से मिली सीख को मिलाकर आप अपने बच्चों को देते हो। वैसे मैं बता दूं मैंने कुछ डिसाइड नहीं किया है कि मैं कैसा पिता बनूंगा (हंसते हुए).. मैं सिर्फ हवा में बातें कर रहा हूं।

Q. बॉलीवुड में रीमेक का चलन काफी जोरों पर है। अपने पिता की कौन सी फिल्म की रीमेक करना पसंद करेंगे?

Q. बॉलीवुड में रीमेक का चलन काफी जोरों पर है। अपने पिता की कौन सी फिल्म की रीमेक करना पसंद करेंगे?

मुझे पापा की एक फिल्म बहुत थी बचपन में, जो चली नहीं थी.. उसका नाम है- 'जमाने को दिखाना है'। इसके अलावा कर्ज, प्रेम-रोग, चांदनी जैसी फिल्में बहुत पसंद हैं। पापा का मैं बहुत बड़ा फैन हूं। ऐसा कोई दिन या रात नहीं गुजरा है, जब मैं और मेरी बहन ने उनकी फिल्म वीएचएस पर नहीं देखी हो। बचपन में हम दोनों डिनर टेबल पर अक्सर पापा- मम्मी की फिल्में देखा करता थे। हालांकि, मुझे मम्मी की फिल्में देखकर थोड़ी शर्म आती थी क्योंकि मम्मी को किसी और एक्टर के साथ देखना मुझे अच्छा नहीं लगता था। लेकिन उन दोनों की साथ वाली फिल्में रफूचक्कर, खेल-खेल में .. जैसी फिल्में मुझे बहुत पसंद थी।

Q. आपने अपनी प्रोडक्शन हाउस भी शुरु की थी। उसे लेकर आगे की कोई प्लानिंग है?

जब मैंने अनुराग बसु के साथ जग्गा जासूस प्रोड्यूस की थी, उस वक्त मुझे इतसा अनुभव नहीं था। मैं सिर्फ एक एक्टर के बतौर वो फिल्म प्रोड्यूस कर रहा था। तो अभी तक मैंने प्रोड्यूसर के तौर पर काम नहीं किया है। लेकिन हां मेरी हमेशा से ये चाहत है कि मुझे एक फिल्म डायरेक्ट करनी है। इस लॉकडाउन में मैंने एक कहानी लिखी भी है, जो मुझे काफी पसंद आई है। लेकिन मुझमें वो हुनर नहीं है लिखने का.. जिससे वो ताकत आए कि मैं लोगों से जाकर वो कहानी शेयर करूं और उनके साथ मिलकर फिल्म बना सकूं। लेकिन हां, प्रोडक्शन से ज्यादा निर्देशन मेरी विशलिस्ट में है। वैसे मेरी बीवी प्रोड्यूस है.. और बहुत अच्छी प्रोड्यूसर है, तो शायद वो मेरी फिल्म प्रोड्यूस कर दे।

Q. शादी के बाद वर्क लाइफ और पर्सनल लाइफ के बीच बैलेंस बनाना आपके और आलिया के लिए कितना आसान या मुश्किल रहा?

Q. शादी के बाद वर्क लाइफ और पर्सनल लाइफ के बीच बैलेंस बनाना आपके और आलिया के लिए कितना आसान या मुश्किल रहा?

अपने दिमाग में मैं पिछले पांच साल से शादीशुदा हूं। मैं खुशकिस्मत हूं कि मुझे आलिया के रूप में मैंने बेहतरीन पार्टनर मिली है। हम दोनों एक दूसरे की इज्ज़त करते हैं, प्यार करते हैं और एक साथ खूबसूरत भविष्य का ख्वाब भी देखते हैं। आलिया बहुत ही मेहनती लड़की है। उसने काफी कम उम्र में ही बहुत कुछ अचीव कर लिया है। कुछ लोग कह रहे हैं ना कि आलिया अपने करियर के पीक पर है और बच्चा कर लिया! लेकिन मैं जानता हूं कि आलिया ने मां बनने को लेकर कभी डिबेट भी नहीं किया है। यह भगवान की तरफ से मिला तोहफा है, जिसके हम दोनों ही शुक्रगुजार हैं। और अब वक्त बदल चुका है। आलिया एक शानदार एक्ट्रेस हैं और मुझे पता है वो मां बनने के बाद भी अपने करियर को खूबसूरती से संभालेगी और बेहतरीन काम करेगी। कभी वो प्राइमरी पैरेंट होंगी, तो कभी मैं प्राइमरी पैरेंट बनूंगा। ऐसा नहीं है कि अब आलिया मां बन गई है, तो उसका करियर बैकसीट ले लेगा। आजकल की जेनरेशन इसी सोच के साथ बड़ी हुई है। ये हम दोनों के लिए बहुत एक्साइटिंग टाइम है।

Q. आपसे जुड़े लोगों का कहना है कि आप इमोशंस को ज्यादा दिखाते नहीं हैं। इस पर क्या कहेंगे?

मैं संजीदा इंसान नहीं हूं लेकिन मुझे ख़ुशी और दुख दिखाना नहीं आता है। जब दुखी होता हूं तब भी वैसा रहता हूं और जब खुश होता हूं तब भी वैसा ही रहता हूं। खुशी जब ज्यादा होती है तो मुझे डर लगता है क्योंकि खुशी एक ऐसी चीज़ है जो ऐसे निकल जाती है जिसका आपको पता भी नहीं चलता है। तो मैं अपने आप को ऐसी ट्रेनिंग देता हूं कि जब बुरा वक़्त चलता है तो मुझे ज्यादा बुरा नहीं लगता और जब ख़ुशी वाला वक़्त चलता है तो मैं बहुत ज्यादा खुश नहीं होता। मैं थोड़ा बैलेंस तरीके में रहता हूं। ये कभी कभी फेवर में भी काम करती है और कभी दोस्त और फैमिली शिकायत भी करते हैं कि मैं इमोशन नहीं दिखाता।

Q. फिल्म इंडस्ट्री में आपको 15 साल पूरे हो चुके हैं। फिल्मों की रिलीज से पहले आज भी नतीजे का कितना डर लगता है?

Q. फिल्म इंडस्ट्री में आपको 15 साल पूरे हो चुके हैं। फिल्मों की रिलीज से पहले आज भी नतीजे का कितना डर लगता है?

मैं जैसे-जैसे बड़ा होता जा रहा हूं, वैसे-वैसे रिलीज को लेकर और नर्वस होता जा रहा हूं। काश कि मैं सारी फिल्में खरीद कर अपने पास ही रख सकता और खुद ही देख सकता क्योंकि मुझे जजमेंट से काफी डर लगता है। पता नहीं लोग मेरी फिल्म को पसंद करेंगे या नहीं करेंगे। जब मेरी पिछली फिल्म संजू, जो चार साल पहले आई थी, वो बड़ी हिट थी। लेकिन फिर भी अभी लोग बोल रहे हैं कि ये मेरी कमबैक फिल्म है.. तो मुझे समझ नहीं आता है कि ये कमबैक फिल्म होती क्या है। लेकिन इस बात की तसल्ली है कि इस फिल्म इंडस्ट्री ने एक अच्छा एक्टर समझकर मुझे अपनाया है। अभी फिल्में चलेंगी या नहीं चलेंगी मेरे बस में कुछ नहीं है। मैं सुनता जाऊंगा कि कमबैक फिल्म है। जैसे मैं शुरुआत से सुन रहा हूं कि ये अगला सुपरस्टार है, लेकिन अभी तक मैं सुपरस्टार बना नहीं हूं। तो ये सारे टैग्स आपको समय- समय पर मिलते रहेंगे। आपको सिर्फ सब्र के साथ अपना काम करना है और मुझे अपने काम से बहुत लगाव है। मुझे फिल्म रिलीज से अच्छा उसका प्रोसेस लगता है। साथ ही मैं खुशकिस्मत हूं कि बचपन से मुझमें पेशेंस बहुत रहा है, इसीलिए ज्यादा इंसिक्योर महसूस नहीं करता हूं।

Q. स्टारडम को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है। आपके लिए यह कितना मायने रखता है?

Q. स्टारडम को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है। आपके लिए यह कितना मायने रखता है?

मैं स्टारडम को लेकर इतना नहीं सोचता हूं। ये अच्छी बात है कि आज के समय में फिल्म और कहानी ही मुख्य स्टार हैं, एक्टर्स महज इसका हिस्सा होते हैं। अगर स्टारडम का श्रेय मुझे कभी मिलेगा, तो मैं पूरी खुशी और विनम्रता से उसे स्वीकार लूंगा। सुपरस्टार कहलाने की इच्छा भला किस एक्टर को नहीं होती है। लेकिन नहीं मिलेगा, तो भी मैं अपना काम करता जाऊंगा और बहुत खुश रहूंगा।

Q. फिल्मों में अपने 15 सालों के सफर को किस तरह से देखते हैं?

मुझे लगता है इन 15 सालों में जो हर एक्टर के साथ हुआ है, वो ये कि आप एक स्किलसेट डेवलप करते हैं, और फिर आप अपनी ही कॉपी बनने लग जाते हैं। इसीलिए मुझे उम्मीद है कि अगले 15 सालों में मैं फिर से नई स्किल सीख सकूं, खुद का पुनर्मूल्यांकन कर सकता हूं, बतौर एक्टर नया बनना शुरू करूं, नहीं तो मैं ऊबने लगूंगा और फिर दर्शक मुझसे ऊब जाएंगे। इसलिए, अगले 15 साल मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं ताकि मैंने जो सीखा है उसे पीछे छोड़कर आगे बढूं और नया सीखूं, नया बनूं।

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