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आर.के.बैनर के पुराने दिन वापस लाऊंगा- रणबीर कपूर

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कपूर खानदान की एक और धरोहर “सांवरिया" बनकर सिनेमाघरों में हंगामा मचाने के लिए तैयार है. ऋषी तथा नीतू के सुपुत्र रणबीर कपूर ने अपनी मासूमियत से पहले ही लाखों लड़कियों का दिल चुरा लिया. अब देखना यह है कि अपने अभिनय के द्वारा वह कितने दर्शकों को अपना दीवाना बनाते हैं. सारे बॉलीवुड को रणबीर से काफी अपेक्षाएं हैं. संजय लीला भंसाली की उम्मीदों पर खरे उतरे रणबीर को भरोसा है कि वे दर्शकों की अपेक्षाओं पर भी खरे उतरेंगे.

अपनी पहली फिल्म “सांवरिया" के लिए कितने नर्वस हैं आप ?
ईमानदारी से कहूं तो अभी मैं ज़रा भी नर्वस नहीं हूं. हां तीन चार दिन पहले ज़रूर मैं थोडा़ सा नर्वस था क्योंकि जब से मेरे प्रोमो टेलीविज़न पर दिखाए जा रहे हैं तब से मुझे काफी लोगों की अलग अलग प्रतिक्रियाएं मिल रही है. उन प्रतिक्रियाओं के आधार पर कभी मैं नर्वस हो जाता हूं तो कभी उत्साहित हो जाता हूं. (हंसते हुए) खुशी है पहली फिल्म में ही मुझे इतने सारे अनुभव मिल रहे हैं.

आपको फिल्म “सांवरिया" के माध्यम से लौंच किया जा रहा है. खुश हैं ?
जी हां बिल्कुल. हमनें इस फिल्म के लिए काफी मेहनत की है. अब जब फिल्म पूरी तरह से बनकर तैयार है. मैंने इस फिल्म को एक दर्शक की हैसियत से देखा. न सिर्फ फिल्म पसंद आई बल्कि इसमें मुझे मेरा किरदार भी काफी पसंद आया. फिल्म की शुरुआत से ही मैंने हमेशा कोशिश की कि कडी़ मेहनत करूं और अपना बेहतरीन दूं. मैं जानता था यदि दस साल भी मैं इस इंडस्ट्री में बीताऊं तब भी “सांवरिया" जैसी फिल्म और संजय लीला भंसाली जैसे निर्देशक मिलना काफी मुश्किल है. मैं आशा करता हूं कि दुबारा मुझे इनके साथ काम करने का मौका मिले.

पहले आपने संजय के सहयोगी तथा बाद में उनके हीरो के रूप में उनके साथ काम किया. क्या अंतर महसूस किया आपने ?
कोई खास नहीं. दोनों भूमिकाओं में मुझे उनसे काफी कुछ सीखने का मौका मिला. उन्होंने मुझे और सोनम न सिर्फ प्यार दिया बल्कि सिनेमा के बारे में भी काफी कुछ बताया. इतने बडे़ निर्देशक के साथ काम करना मेरे लिए मेरे सपनों का साकार होना था. मैंने सोचा भी नहीं था वे हमें इतने शानदार तरीके से लॉच करेंगे. मैं उनका शुक्रगुज़ार हूं. मैं चाहता हूं जिस तरह अब तक उनका प्यार मुझे मिलता रहा है आगे भी यह सिलसिला जारी रहे.

क्या इस फिल्म का किरदार आपसे काफी कुछ मिलता है ? थोडा़ खुलकर बताइए ?
जी हां यह किरदार मुझसे काफी मिलता जुलता है. इस फिल्म में मेरे किरदार का नाम रणवीर राज है, जो मेरे दादाजी को समर्पित है. इस फिल्म के माध्यम से संजय सर ने मेरे परिवार तथा मेरे दादा जी को जो श्रद्धांजलि दी है. उसके लिए मैं वाकई उनका आभारी हूं. मेरा किरदार मुझे बहुत पसंद आया. इस किरदार की प्रेरणा हमनें चार्ली चैप्लिन तथा मेरे दादा जी राज कपूर से ली है, जो उन्होंने फिल्म “श्री 420" में निभाया था.

आपके माता पिता स्वयं बेहतरीन अदाकार रह चुके हैं पहली फिल्म के लिए उनसे कितना टिप्स लिया ?
विशेष रूप से इस फिल्म के लिए मैंने उनसे कोई टिप्स नहीं ली है. उन्होंने कभी बैठकर मुझे नहीं कहा कि अब आपको यह करना है. बचपन से धीरे धीरे बातों ही बातों में उन्होंने मुझे काफी कुछ सीखाया है. मैंने हमेशा अपने फैंसले खुद लिए हैं मगर उन्होंने हमेशा मेरा न सिर्फ हौंसला बढाया बल्कि मार्गदर्शन भी किया. कभी किसी बात से रोका नहीं मगर उसके परिणाम और दुष्परिणाम के प्रति सचेत कर दिया. मुझे याद है मैं अपनी पहले गीत की शूटिंग “माशा अल्लाह" के लिए काफी नर्वस था. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं। तभी मैंने पापा को एस.एम.एस. किया और उन्हें अपने नर्वसनेस का कारण बताया. पापा ने दुबारा मुझे एस एम एस करके मुझे सांत्वना दी कि “बेवकूफ मत बनों. तुम कपूर खानदान के हो. सिर्फ अभिनय मत करो दिल से गाना गाओ". मुझे उनकी बातों से काफी संबल मिला.

आपने कब फैंसला किया कि आपको एक्टर बनना है ?
यह कोई एक दिन या दो दिन का फैंसला नहीं था. मैं जिस घर से हूं वहां अभिनय घुट्टियों में पिलाया जाता है. मैं जब अमेरिका में था तब मैंने संजय सर की “देवदास" देखी थी. मैंने तब सोच लिया था कि अपने करियर की शुरूआत मैं संजय सर के यहां से ही करूंगा. मुझे उन दिनों काफी फिल्म ऑफर मिल रहे थे मगर इनकी तरफ से ऐसा कोई ऑफर न देखकर मैंने सोचा कि क्या पता उन्हें मेरी खबर भी है या नहीं. मैंने सोच लिया मैं खुद उनसे जाकर मिलूंगा. उनके साथ काम करूंगा और उसके बाद उनकी अगली फिल्म में काम करूंगा. यह मेरा सपना था जो पूरा हो गया.

सोनम के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा ?
बहुत अच्छा लगा उसके साथ मेरी पहली फिल्म आ रही है. हम दोनों एक दूसरे को बचपन से जानते हैं. वह काफी इंटेलिजेंट लड़की है. वह एक बहुत अच्छी लड़की है. वह जो कहती है दिल से कहती है. अगर उसे कुछ अच्छा नहीं लगा तो वह कह देगी कि उसे अच्छा नहीं लगा. हमारी दोस्ती फिल्म की शूटिंग के दौरान और मजबूत हो गई क्योंकि जो चीज़ें मैं अनुभव कर रहा था वही चीज़ें वह भी अनुभव कर रही थी. हमनें सब कुछ एक दूसरे से बांटा.

कपूर परिवार से होने के नाते किसी तरह का कोई दबाव महसूस कर रहे हैं ?
मैं किसी तरह का कोई दबाव महसूस नहीं कर रहा. मैं यह नहीं सोचना चाहता कि लोग मेरी तुलना मेरे परिवार के अन्य लोगों से करेंगे और यदि मैं उनकी उम्मीदों पर खरा न उतरा तो लोग क्या कहेंगे. मैं यह सब सोचता नहीं हूं. मैं इस बात के प्रति ज़िम्मेदार हूं कि मैं क्या कर रहा हूं. मैं बहुत मेहनत करना चाहता हूं. जिससे लोग यह नहीं कहे कि यह इस परिवार में पैदा होने के लायक नहीं था. मैं किसी का सर नहीं झुकाना चाहता.

क्या कपूर परिवार से हैं इसलिए हीरो बनें या सचमुच हीरो बनना चाहते थे ?
देखिए मैं यह नहीं कहना चाहूंगा कि मैं दिमागी तौर पर तैयार होकर हीरो बना हूं. हां यह सच है कि मुझे फिल्मों में आना था मगर मैं यह नहीं जानता था कि मुझे हीरो बनना है, निर्देशक बनना है या निर्माता बनना है. मैंने एक दिन में यह फैसला नहीं लिया कि मुझे हीरो बनना है. मेरे माता पिता तथा दादा इसी क्षेत्र में थे इसलिए मैं भी यहां हूं. फिलहाल मेरी कोशिश है कि मैं उनके नाम को आगे बढाऊं.

संजय लीला भंसाली के साथ इतने बडे़ पैमाने पर काम करने के बाद अब आपकी अपेक्षाएं क्या हैं ?
यह सोचना मेरे लिए डरावना है. अगर दो तीन फिल्मों के बाद मैने संजय सर के साथ काम किया होता तो बात कुछ और होती मगर पहली फिल्म उनके साथ करके ऐसा लग रहा है कि मुझे हीरे के चम्मच से भोजन कराया गया है. मैं उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरूं वही मेरे लिए बडी़ बात होगी. अभी मैंने कुछ नहीं सोचा है. मैं सबके साथ काम करना चाहता हूं. मेरी यात्रा शांतिमय हो यही मेरी कामना है.

आप संजय को असिस्ट कर चुके हैं। बतौर हीरो संजय को कितना असिस्ट किया ?
मेरे लिए “सांवरिया" सिर्फ फिल्म नहीं है वह सब कुछ है. बतौर हीरो भी मैं उनका सहयोगी था. निर्देशन से लेकर कपड़ों की देखरेख में मैं काफी दिलचस्पी ले रहा था. यह मेरे लिए सीखने का दौर था और मैंने उन सबका मज़ा लिया.

एक निर्देशक के तौर पर संजय कैसे हैं ?
वह एक बेहतरीन निर्देशक ही नहीं बहुत अच्छे इंसान हैं. वह उनमें से हैं जो हमेशा नहीं मिलते. मैंने उनके साथ सहयोगी के तौर पर काम किया उसके बाद बतौर हीरो. इन सबसे मैंने जाना कि वह बहुत मेहनती इंसान है. आज वह जहां है अपनी मेहनत की वजह से हैं. काफी लोगों का मानना है कि वह बहुत लकि है मगर सच्चाई यह है कि इस जगह पर पहुंचने के लिए उन्होंने काफी मेहनत की है.

“सांवरिया" के प्रोमो में एक जगह पर आपने अपने पिता ऋषी की तरह टोपी और गिटार लिया है. यह आपका फैसला था या संजय का ?
फिल्म में जो कुछ भी आप देख रही हैं या देखेंगें वह सब संजय जी का फैसला था. यदि मैं अपने पिता की तरह दिख रहा हूं तो यह बहुत अच्छी बात है. पहले प्रोमो का रिएक्शन हमें बहुत अच्छा मिला है. हालांकि जानबूझकर हमनें ऐसा कुछ नहीं किया जिससे मैं अपने पिता की तरह दिखूं. मैंने जो भी किया है किरदार की डिमांड थी.

एक बार फिर आर.के. बैनर शुरू होनेवाला है. क्या आप आर. के. बैनर में काम करना चाहेंगे ?
जी हां बिल्कुल. आर.के. बैनर में काम करना मेरे लिए प्राथमिक है. मैं एक बार फिर इसके पुराने सुनहरे दिन वापस लौटाना चाहता हूं. हम बहुत जल्द इस पर काम करनेवाले है. अभी तो मैं कुछ बता नहीं सकता मगर वादा करता हूं कि अगले दो साल में आप आर.के की तरफ से फिल्म देखेंगे.

नए कलाकारों के सामने आप चुनौती बने हैं क्या कहना चाहेंगे ?
ऐसा कुछ नहीं है. जो भी नए कलाकार है वह सब मेरे बचपन के मित्र है. मेरी तरह वह भी इस इंडस्ट्री में कदम रख रहे हैं अत: उन सबको मैं शुभकामनाएं देना चाहूंगा. नील, हरमन, सिकंदर, इमाद, इमरान सब मेरे भाई की तरह है. मैं चाहता हूं वह मुझे शुभकामनाएं दें और मैं उन्हें दूं.

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