गलती से ताज में गया: रामगोपाल

रिपोर्ट के अनुसार राम गोपाल वर्मा अक्सर वास्तविक जिंदगी की घटनाओं को फिल्मी परदे पर दिखाते रहे है, शायद इसलिए वे वहां पर गए हो और उसमे रितेश को मुख्य भूमिका में लेना चाह रहे हो।
रामगोपाल वर्मा से इन्हीं सब मुददो से बात हुयी। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश:
प्रश्न: मुख्यमुत्री विलासराव देशमुख के साथ ताज होटल के दौरे पर जात वक्त आपने क्या सोचा था?
उत्तर: मैं विलास राव देशमुख से नही मिला हुं। मैं केवल रितेश को जानता हूं। उस दिन जब मुझे पता चला कि रितेश ताज होटल को देखने के लिए जा रहा है तो मैंने सोचा कि मैं भी साथ चला जाउ क्योंकि मुझे रितेश के साथ अपनी उस फिल्म की शुटिंग के बारे में बात करना था जिसको लेकर पिछले तीन साल से बात चल रही है। मैं रितेश के साथ उसके कार मे बैठकर चला गया। विलास राव को तो मेरे बारे मे पता ही नही था। जैसे ही मैं वहां पहुंचा सभी को अजीब लगा। मैं गलती से उस टीम के साथ गया था क्योंकि में रितेश के साथ था।
प्रश्न: क्या आप वास्तव मे एक फिल्म निर्माता के रूप मे ताज देखने नही गए थे?
उत्तर: बिल्कुल नही, जैसा कि मैंने पहले ही कहा है कि मेरा फिल्म बनाने का कोई इरादा नही था।
प्रश्न: क्या आपको इस घटना पर फिल्म बनने की कोई गुंजाइश दिखती है?
उत्तर: देखिए एक फिल्म निर्माता के रूप मे मैं किसी भी घटना में गुंजाइश ढूढ सकता हूं फिर तो ये बहुत बड़ी घटना थी। 1993 में हुए हमले की स्वरूप इससे एकदम अलग था। इस घटना के पीछे किसका हाथ था? कौन नही था ? और कैसे इस वारदात को अंजाम दिया गया? इतनी संख्या मे लोग मारे गए! अभी तक कुछ भी पुरी तरह से साफ तौर पर सामने नही आ पाया है तो मैं और फिर कोई और फिल्मकार भी फिल्म बनाने का निर्णय इतनी जल्दी कैसे ले सकता है? चलो अगर लोगो की बात को मान भी लिया जाए कि मैं फिल्म बनाने के इरादे से गया था तो मैं वहां जाकर क्या देखता मै तो उस घटना से जुडे़ हुए लोगो और अधिकारियों से बात करके जानकारी जुटाने की कोशिश करता। अगर मुझे पता ही होता कि मेरे वहा जाने का यह मतलब निकाला जाएगा तो मैं जाता ही नही।


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