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Exclusive Interview: मैं फीमेल फैंस की गिनती बढ़ाने के लिए काम नहीं करता-राजीव खंडेलवाल

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बॅाक्स ऑफिस, करोड़ों की कमाई और सोशल मीडिया। एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को 20 साल से अधिक समय देने के बाद भी राजीव खंडेलवाल ने खुद को इन सभी का हिस्सा नहीं बनने दिया। इसके पीछे की वजह राजीव खुद को मानते हैं। राजीव का कहना है कि मैं अपनी लालच के लिए फिल्में करता हूं।

मैं अपनी लाइब्रेरी में ऐसी फिल्में शामिल करना चाहता हूं जो कि आज से 10 साल बाद भी फ्रेश रहें। मैं अफसोस के अहसास को अपने करियर में नहीं शामिल करना चाहता। शायद, यही वजह है कि राजीव एक बार फिर से एक और कंटेंट आधारित फिल्म को अपने करियर का हिस्सा बनाने जा रहे हैं।

इस वीक राजीव की 'प्रणाम' रिलीज हो रही है। 80 के दशक के फिल्मों की छवि राजीव के फैंस को 'प्रणाम' में देखने मिलेगी। फिल्मी बीट से खास बातचीत के दौरान राजीव ने बॅाक्स ऑफिस का दबाव, कंटेंट आधारित फिल्में, अपनी रोमांटिक इमेज से जुड़े स्टारडम पर विस्तार से चर्चा की। यहां पढ़ें पूरी बातचीत।

क्लासिक सिनेमा को ट्रिब्यूट

क्लासिक सिनेमा को ट्रिब्यूट

बकौल राजीव,'हम भारतीय क्लासिक सिनेमा को ट्रिब्यूट दे रहे हैं। हिंदी सिनेमा में छोटे शहरों पर बेस्ड कई फिल्में बन रही हैं। 'प्रणाम' भी छोटे शहर की कहानी है। लेकिन प्रणाम देखने के बाद आपको पर्दे पर 80 के दशक की फिल्में याद आयेंगी। 80 के दशक की फिल्मों का अपना स्टाइल हुआ करता था। जब मुझे कहानी पता चली तो फिल्म का आइडिया अच्छा लगा। आज की जनरेशन ने ऐसी फिल्में नहीं देखी हैं जहां पर साधारण घर का लड़का अपने सपने पूरे करना चाहता है तभी एक हादसा उसकी जिंदगी बदल देता है। प्रणाम 80 के दशक के स्टाइल में बनाई गई फिल्म है। भले ही फिल्म में नयापन नहीं होगा। फिर भी आज के जनरेशन के लिए दिलचस्प बन सकती है 'प्रणाम'।

लार्जर देन लाइफ बनना मेरी प्राथमिकता नहीं

लार्जर देन लाइफ बनना मेरी प्राथमिकता नहीं

मैं किरदारों से कनेक्ट करना चाहता हूं। मैं एक आम किस्म का इंसान हूं। मैं जब किसी किरदार को पढ़ता हूं तो मेरे लिए दर्शकों के साथ ह्यूमन कनेक्ट होना चाहिए। मैं अपने कॅालेज जीवन से लेकर अभी तक कभी लार्जर दे लाइफ नहीं था। ना मैंने कभी बनने की कोशिश की। जब मुझे बतौर एक्टर लार्जर देन लाइफ बना दिया गया,तब भी मैंने कभी खुद को लार्जर देन लाइफ बनाने की कवायद भी नहीं की। ना खुद को उस तरह महसूस किया।

मुझे जबरदस्ती की अटेंशन नहीं पसंद

मुझे जबरदस्ती की अटेंशन नहीं पसंद

जब भी कोई लड़की मुझे देखकर आज भी मुस्कुराती है तो यकीन नहीं होता ये मेरे लिए है। अभी भी मुझे समझ नहीं आता कि कैसे मैं इस स्टारडम से डील करूं। शायद मेरा स्वभाव जिस तरह का है,मैं कभी खुद को लार्जर देन नहीं देखता हूं। मुझे आप चार बॉडीगार्ड दे देंगे तो बड़ी तकलीफ होती है। मैं नहीं चलता सकता हूं चार बॅाडीगार्ड के साथ। मुझे जबरदस्ती की अटेंशन नहीं पसंद।

अब ऐसी फिल्में नहीं लिखी जाती है..

अब ऐसी फिल्में नहीं लिखी जाती है..

कंटेंट आधारित फिल्में मेरी पहचान रही हैं। जब लोगों ने 'आमिर', 'टेबल नंबर 21' और 'शैतान' देखीं, तो कुछ लोगों का कहना था कि यार तुम सिंपल फिल्में नहीं कर सकते क्या। तुम सिर्फ पेचीदा स्क्रिप्ट पर काम करते हो। प्रणाम मेरे लिए यही बदलाव लेकर आया है। मैं ये यकीकन कह सकता हूं कि प्रणाम में मेरा किरदार ऐसा है जो सिनेमा के पर्दे पर दोबारा देखने नहीं मिलेगा। अब ऐसी फिल्में नहीं लिखी जाती हैं। सिनेमा आगे निकल चुका है।

मुझे लोगों ने कहा था तुम्हारी फिल्म कैसे चलेगी..

मुझे लोगों ने कहा था तुम्हारी फिल्म कैसे चलेगी..

आज हम कंटेंट बेस्ड फिल्मों की संख्या अधिक देख रहे हैं। मुझे यकीन था कि सिनेमा बदलेगा। इस वजह से मैंने काफी पहले आमिर जैसी फिल्में करना शुरू कर दी। मुझे याद है कि जब मैं आमिर कर रहा था तो कुछ लोगों का कहना था कि गाना नहीं है। ना कोई एक्ट्रेस है ना रोमांस है। फिर कैसे चलेगी ये फिल्म। मैं बोलता था कि दर्शक हैं, बस हम ऐसी फिल्में परोसते नहीं हैं।

कम स्क्रीन के साथ करोड़ों का बिजनेस नहीं

कम स्क्रीन के साथ करोड़ों का बिजनेस नहीं

हम रोमांस और गाने के साथ एक फॉमूले पर चलते आए हैं। कितने लोग हैं जो सिनेमा घर में जाते हैं और कहते हैं कि यार क्या बकवास फिल्म है, मेरा सिर दर्द हो गया। जो लोग ऐसा बोलते हैं वही मेरी फिल्में देखते हैं। लेकिन निर्माता कभी ऐसी फिल्में बनाने की हिम्मत नहीं करते। वे बना भी दें तो बड़े पैमाने पर रिलीज नहीं कर पाते हैं। आमिर भी जब बनी तो इसके सारे शो हाउसफुल थे। लेकिन फिल्म सिर्फ 250 स्क्रीन पर रिलीज हुई। अब इतनी कम स्क्रीन के साथ करोड़ों का बिजनेस नहीं हो सकता। तब मैं सोचता था कि अगर फिल्म हाउसफुल जा रही है तो स्क्रीन बढ़ाते क्यों नहीं ?

फेम और पैसे के लिए काम नहीं करता

फेम और पैसे के लिए काम नहीं करता

ना मुझे टीवी में स्टारडम चाहिए और ना फिल्मों में। मुझे खुद नहीं पता कि मैं कैसे काम करता हूं। मैं फेम और पैसे के लिए काम नहीं करता हूं। अगर ऐसा होता तो मेरे पास ऐसी कई चीजें और फिल्में आयीं जो बतौर एक्टर मेरे लिए सेफ रहती। मैंने 'कहीं तो होगा' भी करियर के पीक पर छोड़ा। मैं चाहता तो उसका हिस्सा बने रह सकता था। मैं स्टारडम , फेम या पैसे के लिए नहीं बल्कि अंदरूनी खुशी के लिए काम करता हूं।

मेरी काबिलियत सिर्फ हीरोइन की आंखों में देखना नहीं

मेरी काबिलियत सिर्फ हीरोइन की आंखों में देखना नहीं

मैंने कभी नहीं सोचा कि मेरी फैंस लिस्ट में लड़कियों की संख्या और बढ़ जाए। रोमांटिक फिल्में मैंने इस वजह से नहीं कि मुझे लगा कि ये करना मेरे लिए सेफ होगा। अगर मैं काबिल हूं तो कुछ और करके दिखाना चाहिए। टीवी शो 'कहीं तो होगा' के बाद मुझे कई रोमांटिक किरदार के प्रस्ताव मिल रहे थे। जब फिल्मों की बात आयी तो ऐसा लगा कि क्या मेरी काबिलियत सिर्फ हीरोइन की आंखों में देखना है? मैंने फिर आमिर को चुना। इसके बाद मेरे पास इसी तरह की कंटेंट आधारित फिल्में आना शुरू हो गईं। वैसे में अब दर्शकों के लिए फिर से रोमांस करने स्क्रीन पर लौट रहा हूं। बालाजी की आगामी वेब सीरीज 'कोल्ड लस्सी और चिकन मसाला' के साथ।

English summary
In an Exclusive Interview Rajeev khandelwal talk about new release pranaam, box office and Romantic hero image, here read
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