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    INTERVIEW: मैं तो आउटसाइडर हूं, लेकिन मैं तहे दिल से कहूंगा कि इस इंडस्ट्री में बहुत अच्छे लोग हैं- आर माधवन

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    "हम फिल्म वाले बड़े बड़े बजट पर फिल्में बनाते हैं, कभी स्वतंत्रता संग्राम के बारे में बताते हैं, कभी मुगल शासन के बारे में बताते हैं, लेकिन एक और क्षेत्र है जहां भारत की उपलब्धियों को सराहा गया है और उसके बारे में हम नहीं कहते.. वो है साइंस एंड टेक्नोलॉजी। इस क्षेत्र के कई हीरो हमारे देश में हैं और मुझे लगता है कि इनके बारे में बात करना बहुत जरूरी है..", अपनी आगामी फिल्म 'रॉकेट्री- द नंबी इफेक्ट' पर बात करते हुए अभिनेता, निर्माता और निर्देशक आर माधवन कहते हैं। इस फिल्म का पटकथा लेखन भी माधवन ने ही किया है।

    रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट 1 जुलाई को सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह इसरो (ISRO) के पूर्व वैज्ञानिक और एयरोस्पेस इंजीनियर नंबी नारायणन के जीवन पर आधारित है। फिल्म का प्रीमियर 75वें कान फिल्म समारोह में हुआ था, जहां दर्शकों ने इसे खूब सराहा।

    फिल्म की रिलीज से पहले माधवन मीडिया से रूबरू हुए, जहां उन्होंने बतौर निर्देशक अपने डेब्यू फिल्म को लेकर, अपने फिल्मों के चुनाव और 'रहना है तेरे दिल में' की पॉपुलैरिटी पर खुलकर बातें की। शाहरुख खान और सूर्या के साथ अपनी दोस्ती पर बात करते हुए अभिनेता ने कहा, "मैं तहे दिल से कहूंगा कि मैं तो पूरी तरह से आउटसाइडर हूं.. मुझे नहीं लगता कि मैं कभी इनसाइडर बन भी पाउंगा। लेकिन इस इंडस्ट्री में बहुत अच्छे अच्छे लोग हैं। जब भी मुझे उनकी जरूरत पड़ी है, सबने मुझे सपोर्ट किया है। "

    यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश-

    Q. बायोपिक फिल्मों में काफी रचनात्मक स्वतंत्रता ली जाती है। आपकी फिल्म से हम क्या उम्मीद कर सकते हैं?

    Q. बायोपिक फिल्मों में काफी रचनात्मक स्वतंत्रता ली जाती है। आपकी फिल्म से हम क्या उम्मीद कर सकते हैं?

    फिल्म में जो दिखाया गया है, उसमें 100 फीसदी सच्चाई है, कोई सिनेमेटिक लिबर्टी हमने नहीं ली है। सच कहूं तो जरूरत ही महसूस नहीं हुई। नंबी नारायणन की कहानी इतनी दिलचस्प और खतरनाक है कि वो पहले से ही काफी सिनेमेटिक है, उनकी कहानी पर यकीन दिलाने के लिए मुझे कुछ चीजें स्क्रिप्ट से निकालनी पड़ी।

    Q. आप इस फिल्म से बतौर एक्टर, राइटर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर भी जुड़े हैं। सारी जिम्मेदारियों के बीच क्या अनुभव कर रहे थे?

    आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं कि मुझे ये पागलपन जैसा लगता है। मैं इस कहानी में इतना डूब गया था.. और सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि फिल्म से जुड़ा हर व्यक्ति बहुत ही फोकस्ड था। सबसे अच्छी बात ये थी कि हमारी प्लानिंग बहुत तगड़ी थी। हमने सच में एक रॉकेट लॉन्च की तरह की प्लानिंग की थी। फिल्म के निर्देशन की बात करूं तो मैं इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं था। लेकिन शूटिंग से 20-25 दिन पहले जो इस फिल्म के निर्देशक थे, उनका शेड्यूल कुछ मैच नहीं हो पाया और वो इस फिल्म को डायरेक्ट नहीं कर पाए। ऐसे में मेरे पास दो ही विकल्प थे; या तो फिल्म ड्रॉप कर दूं या खुद ही निर्देशन का जिम्मा उठाऊं। फिल्म से जुड़े सब लोगों ने भी मुझे कहा कि आप डायरेक्ट कर लो, तो जोश में आकर मैंने भी मूड बना लिया। लेकिन सच कहूं तो जब मैं पहली बार सेट पर गया तो मेरी हालात खराब हो गई थी। मुझे लगा कि मेरे सामने ऐसा पहाड़ खड़ा है, जिसका मैं शिखर नहीं देख पा रहा था। लेकिन फिर धीरे धीरे मैंने शुरुआत और अब 1 जुलाई को फिल्म रिलीज होने वाली है। भले ही इस फिल्म में मुझे 6 साल लग गए हों, लेकिन मुझे गर्व है कि मैंने वो फिल्म बनाई है, जो मैं बनाने निकला था।

    Q. बतौर अभिनेता किसी भी स्क्रिप्ट का चुनाव करने के दौरान आप किन बातों का ख्याल रखते हैं?

    Q. बतौर अभिनेता किसी भी स्क्रिप्ट का चुनाव करने के दौरान आप किन बातों का ख्याल रखते हैं?

    मैं देखता हूं कि जो भी स्क्रिप्ट मैं कर रहा हूं, जो डायरेक्टर और राइटर लिख रहे हैं, वो उस विषय पर इतनी अच्छी तरह से रिचर्स करके लिख रहे हों कि दर्शक उसे जानना, समझना चाहें। जब मैंने 'तनु वेड्स मनु' किया था, उस वक्त कोई देसी रोमांस के बारे में कोई बात ही नहीं करता था। सारा रोमांस तो न्यूयॉर्क के ब्रूकलिन ब्रिज पर हो रहा था। ऐसा लगता था जैसे भारत में कोई रोमांस ही नहीं है। तो मैं देश की खुशबू वाली कहानी ढूंढ़ रहा था और तभी आनंद एल राय ने मुझे तनु वेड्स मनु दिया। उसी तरह मैं 'रॉकेट्री' के लिए भी तैयार था। मैं कुछ ऐसा ही ढूंढ रहा था। मेरा मानना है कि आप जो भी करें, उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करें। सच कहूं तो मुझे लगता है कि हिंदी एक्टर्स बहुत ही मेहनती हैं। वो सब करना चाहते हैं। ऐसे में जो लिखते हैं और जो बनाते हैं उन्हें भी अब थोड़ा आगे बढ़ना चाहिए।

    Q. आप प्रतिस्पर्धी भाव रखते हैं?

    मुझे लगता है कि एक कलाकार के तौर पर आप कभी प्रतिस्पर्धा का हिस्सा नहीं बन सकते हैं। आप नहीं कह सकते हैं कि एक पेटिंग दूसरी पेटिंग से बेहतर है या एक की एक्टिंग दूसरे से ज्यादा बेहतर है। लेकिन हां, मैं दुनिया का सबसे अमीर एक्टर बनना चाहता हूं (हंसते हुए), सिर्फ वही कंपिटिशन मेरे जे़हन में है।

    Q. आपको क्या लगता है क्या कारण है कि नंबी नारायणन को इतना कुछ सहना पड़ा?

    Q. आपको क्या लगता है क्या कारण है कि नंबी नारायणन को इतना कुछ सहना पड़ा?

    वो इसरो (ISRO) के इतने महान वैज्ञानिक थे। वो इतने परफेक्ट थे कि लोगों को विश्वास ही नहीं होता था। लोगों ने यही सोचा कि कोई इतना दूध का धुला कैसे हो सकता है। कोई इतना देशभक्त, अपने काम में इतना माहिर कैसे हो सकता है.. कुछ तो गड़बड़ होगी। और इसी चक्कर में लोगों को सिर्फ एक मौका मिला और हमने उन पर कोई रहम नहीं किया। सच कहता हूं उनसे मिलने के बाद मैं एक अलग ही इंसान बन गया। उस इंसान में जो तेजस थी, उनके चेहरे पर रौनक के साथ आंखों में जो नमी और दर्द था, उसे देखते ही समझ गया था कि इस इंसान को सिर्फ एक केस की वजह तो नहीं जाना जा सकता है, इनमें कुछ बहुत खास है। जब मैंने उनकी पूरी कहानी सुनी, मुझे लगा कि उनकी उपलब्धियों को नजरअंदाज करना देश के साथ धोखा है। और इसीलिए मैंने ये फिल्म बनाई।

    Q. फिल्म में नंबी नारायणन की 29 से 80 साल तक के उम्र को दिखाया है। लुक्स को लेकर आपका क्या प्रोसेस रहा?

    Q. फिल्म में नंबी नारायणन की 29 से 80 साल तक के उम्र को दिखाया है। लुक्स को लेकर आपका क्या प्रोसेस रहा?

    मैं बताना चाहता हूं कि हमने किसी भी लुक को दिखाने के लिए प्रोस्थेटिक या ग्राफिक्स का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं किया है। दाढ़ी, सफेद बाल, बढ़ा वजन.. सब कुछ रियल है। अपना जबड़ा तक तुड़वाया था मैंने, ताकि मेरे दांत नंबी नारायणन सर की तरह दिखें। इन सब रिसर्च में हमने ढ़ाई साल का वक्त लिया था और पूरी एहतियात भी बरती थी। मेडिकल रिचर्स तो जो था वो था ही, लेकिन मैंने आयुर्वेद पर भी फोकस किया। जो बड़े बुजुर्ग हमें कहते आए हैं, उसे फॉलो किया। सारी चीजों को ध्यान में रखते हुए हमने एक प्लान तैयार किया था, और उसी प्लान को फॉलो करके मैं 14 दिन में पतला भी हो गया। मैंने कोई दवाई, सजर्री, एक्सरसाइज या कोई मेडिकल सहायता नहीं ली थी।

    Q. चूंकि यह एक बायोपिक है, लुक्स के साथ, मानसिक तौर पर आपके लिए नंबी नारायणन के किरदार में उतरने की क्या प्रक्रिया थी?

    Q. चूंकि यह एक बायोपिक है, लुक्स के साथ, मानसिक तौर पर आपके लिए नंबी नारायणन के किरदार में उतरने की क्या प्रक्रिया थी?

    मैंने उनके साथ 6 साल गुजारे हैं। शूटिंग से पहले हम साथ में 3 साल रहे थे.. क्योंकि रॉकेट साइंस मुझे समझना था, रॉकेट इंजिन के बारे में समझना था। फिर उनकी तरह बात करना, गुस्सा होना, हंसना, रोना.. सब कुछ मैंने सीखा था। साथ ही मुझे ये भी ध्यान रखना था कि हम मिमिक (नकल) नहीं कर सकते। यदि मैं कभी शाहरुख खान को रोल करूं और बिल्कुल शाहरुख की ही नकल करूं तो उसमें एक झूठापन आ जाएगा। आप किसी भी किरदार लेकर उसे अपने ही अंदाज में निभाते हो और यही मैंने भी किया।

    Q. नंबी नारायणन के व्यक्तित्व का कोई एक पहलू जो आप अपनाना चाहते हैं?

    उनका विश्वास। उनका मानना है कि यदि आप किसी चीज पर विश्वास करते हो तो आप उसके पीछे लग जाते हो और यदि कोई आपके बीच आता है तो आप उसे निकाल बाहर करते हो। मुझे इस बात में काफी सेंस लगा क्योंकि मैं ऐसा व्यक्ति था कि यदि कोई मेरे रास्ते में आ जाए तो मैं बगल से चला जाता हूं। लेकिन अब मैं अपनी बात, अपने विश्वास के साथ खड़ा होता हूं।

    Q. रॉकेट्री में शाहरुख खान और सूर्या ने कैमियो किया है। दोनों अभिनेताओं के साथ अपने बॉण्ड के बारे में यदि आप कुछ शेयर करना चाहें?

    Q. रॉकेट्री में शाहरुख खान और सूर्या ने कैमियो किया है। दोनों अभिनेताओं के साथ अपने बॉण्ड के बारे में यदि आप कुछ शेयर करना चाहें?

    मैंने इस कहानी के बारे में जिक्र किया था खान साहब (शाहरुख खान) को जब हम जीरो की शूटिंग कर रहे थे। मुझे नहीं लगा था कि वो सुन भी रहे हैं। लेकिन उन्होंने मुझे कहा कि कुछ अलग कर रहे हो तुम, मुझे तुम पर बहुत गर्व है। फिर कई महीने के बाद जब मैं उनके बर्थडे पर गया तो उन्होंने मुझसे रॉकेट्री के प्रोडक्शन के बारे में पूछा और कहा कि मैं उसमें एक रोल करना चाहता हूं। मैं उस वक्त उनकी बात को मजाक मानकर निकल गया। लेकिन कुछ दिनों बाद मेरी पत्नी सरिता ने कहा कि खान साहब ने आपसे इस बारे में जिक्र किया है, कम से कम उन्हें थैंक यू तो बोल दो। फिर मैंने उनकी मैनेजर को एक मैसेज किया और कहा कि आप शाहरुख को मेरी तरफ से धन्यवाद दीजिएगा। इसके तुरंत बाद उनकी मैनेजर का फोन आया कि मैडी खान सर डेट्स पूछ रहे हैं। मैंने उनसे कहा कि मजाक मत करो, मैं खान साहब को अपनी फिल्म में कोई छोटा मोटा रोल थोड़ी दे सकता। फिर बाद में मैंने उन्हें बताया कि एक अहम रोल है, जो शाहरुख कर सकते हैं। फिर वो आए.. हिंदी और इंग्लिश में एक्टिंग की और नंबी नारायणन सर से मुलाकात भी की। उनके लिए खान साहब की आंखों में मैंने जो इज्जत देखी, तब मैं समझ गया कि ये क्यों इस फिल्म का हिस्सा बनना चाहते थे। उन्होंने अपनी फीस के साथ-साथ कॉस्ट्यूम और असिस्टेंट की फीस तक भी नहीं ली। और यही बात सूर्या के साथ भी रही। वो पूरी टीम के साथ चेन्नई से मुंबई शूट करने पहुंचे थे। उन्होंने मुझे कहा था कि खान साहब जब शूट कर लें तो उसके बाद मैं कर लूंगा। इस तरह की एडजस्टमेंट सबने दिखाई थी। उन्होंने भी मुझसे कोई फीस नहीं ली। तो आप यदि मुझसे पूछोगे कि इस इंडस्ट्री में अच्छे लोग हैं या नहीं? तो मैं तहे दिल से कहूंगा कि यार मैं तो पूरी तरह से आउटसाइडर हूं.. मुझे नहीं लगता कि मैं कभी इनसाइडर बन भी पाउंगा। लेकिन इस इंडस्ट्री में बहुत अच्छे अच्छे लोग हैं। जब भी मुझे उनकी जरूरत पड़ी है, सबने मुझे सपोर्ट किया है।

    आपकी सबसे चर्चित फिल्मों में से एक 'रहना है तेरे दिल में' के 21 साल पूरे होने वाले हैं। आज भी ये फिल्म युवाओं के बीच इतनी पॉपुलर है, इस बारे में कभी सोचते हैं?

    आपकी सबसे चर्चित फिल्मों में से एक 'रहना है तेरे दिल में' के 21 साल पूरे होने वाले हैं। आज भी ये फिल्म युवाओं के बीच इतनी पॉपुलर है, इस बारे में कभी सोचते हैं?

    (हंसते हुए) मुझे लगता है कि 'रहना है तेरे दिल में' की जो पॉपुलैरिटी है वो इसीलिए है कि उस वक्त जो बच्चे थे, जिनको वो फिल्म उस वक्त बहुत रोमांटिक लगी, उसके गाने बहुत पसंद आए और फिल्म के किरदार से जो इतना जुड़ गए.. आज वो सभी बच्चे बड़े हो गए हैं और कोई पुलिस में है, कोई डॉक्टर, कोई टीचर, कोई जर्नलिस्ट बन गए हैं.. तो उनके पास अब पॉवर है। और अब जब वो इस फिल्म के बारे में बात करते हैं, तो लगता है कि पूरी दुनिया 'रहना है तेरे दिल में' के बारे में बात कर रही है। लेकिन सच यही है कि उसके दस बाद कोई रोमांटिक फिल्म जो रिलीज हुई होगी, उस समय के बच्चे जब बड़े हो जाएंगे तो वो उसके बारे में बात करेंगे.. और मैं पुरानी कहानी हो जाऊंगा।

    English summary
    As actor R Madhavan is all set to make his directorial debut with Rocketry The Nambi Effect on 1st July 2022, in an interview with Filmibeat, R Madhavan speaks about his role in the film Rocketry: The Nambi Effect, process of choosing scripts, Shahrukh Khan cameo, Rehna Hai Tere Dil Mein popularity and much more.
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