पूरी जिंदगी फुकरा ही रहा हूं- पुलकित सम्राट

(सोनिका मिश्रा) पुलकित समृाट जो कि टीवी पर भी काम कर चुके हैं और अब बॉलीवुड में अपनी किस्मत का सिक्का आजमाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं का कहना है कि वो पूरी लाइफ फुकरे ही रहे हैं। पुलकित सम्राट जो कि खुद को सलमान खान का फैन मानते हैं और साथ ही सलमान को अपना साला भी बताते हैं का कहना है कि सिर्फ पैसा कमाने के लिए वो यहां नहीं हैं। वो काम करने आए हैं वो भी ऐसे किरदार जो कि अलग हों। वनइंडिया की रिपोर्टर सोनिका मिश्रा से हुई मुलाकात के दौरान पुलकित ने और क्या-क्या बताया जानने के लिए पढ़िये इंटरव्यू के कुछ अंश।

फुकरे के बारे में कुछ बताइये।

फुकरे चार लड़कों की कहानी है जो कि कुछ भी नहीं करते और सिर्फ पैसे के लिए अपने दोस्तों के साथ मिलकर शॉर्टकट तरीका निकालते हैं। मैंने हनी का किरदार निभाया है जो कि अपने दोस्त चूचा द्वारा देखे गये अजीब से सपनों को तोड़मरोड़ कर कुछ नंबर बनाता है और एक लॉटरी का टिकट खरीदता है जो हमेशा लगती है। दूसरी तरफ ये दोनो मंजीत और फजल से मिलते हैं। फिर चारों मिलकर भोली पंजाबन से मदद मांगते हैं पैसे से रिलेटेड वो मदद करती है लेकिन फिर एक दिन चारों एक मुसीबत में फंस जाते हैं और उनकी जिंदगी रोल कोस्टर की राइड बन जाती है।

फुकरे फिल्म साइन करने के पीछे क्या वजह थी?

फिल्म की कहानी। जब मृग ने ये कहानी हमें सुनाई तब मुझे वो दिन याद आ गये जब हम अपने दादा-दादी से परियों की कहानियां सुना करते थे और अपनी इमेजिनेशन की दुनिया बना लेते हैं। उनकी कहानी सुनाने के साथ ही मैं वहीं चला गया जहां ये कहानी बन रही थी। बहुत सारी इमेजिनेशन भी दिमाग में आ गयीं। वो फीलिंग वो एक्साइटमेंट ही इस फिल्म को साइन करने के पीछे वजह थी।

फरहान अख्तर कभी कुछ टिप्स देते थे शूटिंग के दौरान?

Pulkit Samrat

सबसे पहले तो मैं फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी को बहुत धन्यवाद कहना चाहूंगा कि उन्होंने मुझे अपनी फिल्में साइन किया। हम सभी बहुत भाग्यशाली हैं कि इतने बडे़ निर्माताओं ने हमपर भरोसा किया। थोड़ी सी नर्वसनेस होती है लेकिन बहुत मजा आता है। जहां तक फरहान और रितेस के टिप्स की बात है तो उन्होंने हमेशा ही हमें वहां पर समझाया जहां उन्हें लगा कि हम कुछ गलत कर रहे हैं। उनके बिना ये फिल्म नहीं सकती थी।

फुकरे फिल्म की खासियत क्या है?

एक्सेल की फिल्में थोडी़ ग्लॉसी होती थीं बड़े स्क्रीनप्ले के साथ आती थीं। फुकरे फिल्म बहुत सिंपल है मिट्टी से जुड़ी हुई है। रियल है। तो बहुत कुछ नया देखने को मिलेगा दर्शकों को।

यूं तो फुकरे में चार एक्टर हैं लेकिन दर्शक फुकरे फिल्म में आपको ही हीरो कह रहे हैं। कभी आपको ऐसा लगा?

अगर इस फिल्म का कोई हीरो है तो वो सिर्फ और सिर्फ फिल्म की कहानी है। हम सिर्फ अपने किरदार निभा रहे हैं। और अगर लोगों को मैं सबसे ज्यादा पसंद आ रहा हूं तो ये बहुत अच्छी बात है। मैं अपनी तारीफ सुनकर ब्लश भी कर रहा हूं। लेकिन इस फिल्म का हिस्सा बनकर मैं बहुत खुश हूं।

सभी का मकसद सिर्फ एक होता है लोगों को एंटरटेन करना। सिर्फ स्केल बड़ा या छोटा होता है

और साथ ही अगर पहुंच की बात करें तो टीवी की पहुंच हर छोटे से लेकर बड़े घर तक है। लेकिन टीवी में ग्लैमर डालने के लिए फिल्मों की जरुरत पड़ती है। और यही मैंने किया है।

आजकल कई टीवी आर्टिस्ट फिल्मों में आते हैं और सफल भी होते हैं तो आपको क्या लगता है कि टीवी और फिल्मों में क्या बेहतर है?

मैं इसे इजी या डिफिकल्ट की कैटगरी में इसे नहीं डालना चाहूंगा। सिर्फ आपको अपने गोल की तरफ आगे बढ़ना चाहिए। मुझे लगता है कि आपको जो चाहिए वो भगवान देता है। कोई मायने नहीं रखता कि आप टीवी कर रहे हैं या फिल्म कर रहे हैं, थियेटर कर रहे हैं। फर्क ये है कि पैसा ज्यादा है, स्केल बड़ी है, फेम ज्यादा है। लेकिन वो सब बाद में आता है। पहली बात है कि आपको एंटरटेन करना है।

आपका सपना क्या है?

सपना यही है कि जितनी भी मैं कोशिश करुं लोगों को हंसाने की वो उतना हंसे, जब मैं कोशिश करुं तो वो रोयें। जब मैं नाचूं तो वो भी मेरे साथ नाचें और सेलिब्रेट करें।

आपकी आने वाली फिल्में कौन सी हैं?

इसके बाद मेरी 'ओ तेरी' फिल्म आ रही है जिसके निर्माता हैं अतुल अग्निहोत्री। इसके अलावा और भी बहुत सी फिल्में हैं।

बॉलीवुड में आपकी इंसपिरेशन कौन है?

मुझे लगता है कि मैं इकलौता नहीं होंगा लेकिन सच तो यही है कि मिस्टर सलमान खान जिस तरह से लोगों को एंटंरटेन कर रहे हैं सलमान खान रॉकस्टार हैं और बहुत ही अच्छे इंसान भी हैं। मैं उनसे बहुत इंसपायर्ड हूं। मैं कोशिश करता हूं कि जो क्वालिटी उनमें हैं उन्हें मैं भी अपने अंदर ला सकूं।

हनी के किरदार से आप खुद को कितना रिलेट करते हैं?

बहुत रिलेट करता हूं। मैं पूरी लाइफ में फुकरा रहा हूं। हर इसान में एक फुकरा होता है। तो इस कैरेक्टर को निभाने में कोई मुश्किल नहीं हुई लेकिन फिल्म की लैग्वेज को लेकर थोड़ी मुश्किल हुई क्योंकि ईस्ट दिल्ली की लैंग्वेज है फिल्म में जहां मैं ज्यादा नहीं रहा हूं। उसमें हमारे निर्देशक मृग ने हमारी बहुत मदद की। मैंने तो मृग को ही पूरा कॉपी किया है।

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