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    INTERVIEW: क्यों बोला जाता है कि मेरी फिल्म की कमाई बॉक्स ऑफिस पर इतनी थी- नुसरत भरूचा

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    प्यार का पंचनामा, सोनू के टीटू की स्वीटी, ड्रीम गर्ल,छलांग और अजीब दास्तान जैसी सुपरहिट फिल्मों में एक नाम सामान्य है वो है नुसरत भरूचा का। सफलता की गाड़ी में नुसरत भरूचा ने अपना जो सफर शुरू किया है वो अब अक्षय कुमार की रामसेतु तक पहुंचा है। इन सबके बीच नुसरत भरूचा अपनी पहली सोलो फिल्म 'छोरी' के साथ आ गई है।

    अमेजॉन प्राइम पर रिलीज होने वाली फिल्म छोरी की जिम्मेदारी नुसरत भरूचा ने बहादुरी के साथ अपने कंधों पर उठा रखा है। नुसरत भरूचा ने फिल्मीबीट हिंदी से बातचीत में बताया कि कैसे बीते सालों में उनका आत्मविश्वास रफ्तार से आगे बढ़ा है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कैसे छोरी फिल्म उनके लिए शारीरिक और मानसिक तौर पर चुनौती भरी रही है। खुद पर पढ़िए नुसरत का इंटरव्यू खुद उनकी जुबानी।

    28 दिन लगातार छोरी की शूटिंग

    28 दिन लगातार छोरी की शूटिंग

    मैंने 28 दिन लगातार 'छोरी' की शूटिंग की है। मैंने घर पर भी बात नहीं की है। क्योंकि मैं खुद को किरदार और कहानी से बाहर नहीं करना लाना चाहती थी। इस फिल्म की शूटिंग पूरी करने के बाद मैं 2 महीने तकशारीरिक तौर पर नहीं कर पाई। मुझे फिर से नुसरत को वापस लाना था।दर्शक फिल्म देखते हैं कुछ समय तक उनके दिमाग में रहती है और नहीं भी। कलाकार पर्दे पर किरदार को जीता है, 3 महीने की तैयारी और फिर 28 दिन की शूटिंग। पांच महीने की जो जिंदगी रहती है किरदार के साथ वह निकल नहीं पाती है।

    कोई भी फिल्म सिर्फ हीरो की नहीं होती

    कोई भी फिल्म सिर्फ हीरो की नहीं होती

    छोरी मेरी सोलो फिल्म है। मैं चाहती हूं कि इस फिल्म को देखने के बाद लोगों का मुझ पर भरोसा अधिक होगा। मुझे अधिक काम मिलेगा। मैं महसूस करती हूं कि दर्शकों को इसका श्रेय जाता है। अगर दर्शकों को ही लड़की की कहानी नहीं देखनी है तो वह बनेगी नहीं। मेरी सोच है कि दर्शक उस जगह पर आ गए हैं जहां उन्हें इस तरह की कहानी देखनी है। वो देखना चाहते हैं कि हम रोते-गिरते और उठते कैसे हैं, यह मेरा आत्मविश्वास पहले से अधिक बढ़ाता है।

    ओटीटी हो या थिएटर मैंने कभी फिल्म के रिलीज होने का दबाव नहीं लिया। सच कहूं तो मुझे यह समझ नहीं आता जब यह बोला जाता है कि मेरी फिल्म की कमाईबॉक्स ऑफिस पर इतनी थी। मुझे नहीं लगता कि कोई भी फिल्म सिर्फ हीरो की होती है। वो फिल्म डायरेक्टर, एडिटर और निर्माता सभी की होती है। मैं कभी यह नहीं बोल पाई कि मेरी फिल्म ने इतना बिजनेस किया। मैंने हमेशा कहा है कि हमारी फिल्म ने इतना बिजनेस किया है।

    ड्रीम गर्ल जैसी फिल्म करना है मुझे

    ड्रीम गर्ल जैसी फिल्म करना है मुझे

    आज भी मैं ड्रीम गर्ल जैसी फिल्म करना चाहूंगी। भले ही उसमें तीन सीन और गाना क्यों ना हो। मेरे ख्याल से दर्शकों के लिए नुसरत बबली गर्ल भी है। मेरे लिए एंटरटेनमेंट मतलब बॅालीवुड फिल्में रही हैं, वो कभी जाएगा नहीं। मैं एक इंसान की तरह से भी खुद की बढ़त कर रही हूं। हम इतनी फिल्में देख रहे हैं। हर भाषा के सिनेमा में कमाल का काम हो रहा है। मेरी दिलचस्पी सभी में है। मुझे मौका मिल रहा है। मेरा काम हमेशा से सीखना और धीमी गति से आगे बढ़ना रहा है। मेरा ध्यान पूरी तरह से इसी पर होता है।

    महिला आधारित फिल्म बोलना दुखी करता है

    महिला आधारित फिल्म बोलना दुखी करता है

    रहा सवाल छोरी का तो यह महिला आधारित फिल्म नहीं है।मैंने मेरी कॅाम के दौरान प्रियंका चोपड़ा का इंटरव्यू सुना था जब उन्होंने कहा था कि आप इसे महिला आधारित फिल्म बोल रहे हैं यह मुझे दुखी कर रहा है। क्योंकि जब पोस्टर पर पुरुष का चेहरा होता है तब आप यह नहीं बोलते हैं कि यह पुरुष आधारित फिल्म है। तो हम अभी भी उसी सोच में है। सवाल अभी भी वही है। जो कि मेरी कॉम के बाद कई फिल्में आयी हैं जहां पर फीमेल किरदार दमदार रहे हैं।

    सब छोड़ दीजिए,सोनू की टीटू की स्वीटी देख लीजिए। लोगों ने मुझ पर सिर्फ हंसा है।फिर भी उस फिल्म में उठ कर वो कमाल किया है। इस वजह से आप एक एक्ट्रेस से वो अधिकार नहीं ले सकते हैं। मैंने तो अभी शुरुआत की है। मैं इतना कहना चाहूंगी कि दीपिका पादुकोण, प्रियंका चोपड़ा, आलिया भट्ट इन सभी ने हमारे लिए एक रास्ता बना दिया है जिस पर हम चल रहे हैं। उन लोगों ने वो बहादुरी वाला कदम उठाया है पीकू, एनएच 10, राजी जैसी फिल्में की है और इन फिल्मों ने काम भी किया है। उनके कारण ही मेरे पास इस तरह की फिल्म आयी है।

    गर्ल चाइल्ड के तौर पर मेरी परवरिश में कोई कमी नहीं

    गर्ल चाइल्ड के तौर पर मेरी परवरिश में कोई कमी नहीं

    छोरी फिल्म मेरे लिए कठिन रही है। खास तौर पर प्रेग्नेंट महिला के लिए बॅाडी सूट पहनना मेरे लिए सांस लेना मुश्किल था।जब हकीकत में एक बच्चे को जन्म देना हो तो वो कितना मुश्किल होगा मैं यह सोच भी नहीं सकती हूं। मैं जब मां बनूंगी तो मैं डॉक्टर को बोलूंगी कि मुझे पहले बेहोश कर दो। बहुत डर लगता है मुझे। मैंने जो महसूस किया है वो मैंने फिल्म में डाला है। गर्ल चाइल्ड के तौर पर मेरी परवरिश में कोई कमी नहीं रही। यह मेरी मां का फैसला था की उनकी एक ही संतान होगी। दादी ने मेरा एक्ट्रेस बनने में मेरा साथ दिया।बहुत लोगों को यह नहीं मिलता। आखिर क्यों दुनिया में गर्ल चाइल्ड को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

    मुझे करियर में कूदना नहीं था

    मुझे करियर में कूदना नहीं था

    मेरा करियर ग्राफ देखा जाए तोमैंने एक साल में दो या एक फिल्में की हैं। अगर मैं 6 या 7 जगह मीटिंग करती तो मुझे कास्ट कर लिया जाता।लेकिन मैंने नहीं किया। क्योंकि मैं जो कर रही थी उसमें मजा भी आ रहा था और मैं सीख भी रही थी। मैं कूदना नहीं करना चाहती थी। मैं भागना नहीं चाहती थी जब कि मैं चलना भी नहीं जानती थी। मैंने सोचा कि एक-एक कदम बढ़ाते हैं। पहले यह काम करते हैं उस पर फोकस करते हैं फिर आगे बढ़ते हैं। मुझ पर आत्मविश्वास आया तो मैं आगे बढ़ी।

    छोरी मुझे 5 साल पहले नहीं मिलती

    छोरी मुझे 5 साल पहले नहीं मिलती

    आकाशवाणी फ्लॉप हुई तो लगा कि मैं अच्छी नहीं रही। मैंने अपने काम से सीखा है। जब मुझ में वो आत्मविश्वास आया कि मैं तीन-चार चीजें कर सकती हूं, अलग किरदार निभा सकती हूं। फिर मैंने बहादुरी वाला काम किया। यह सच है कि छोरी मुझे पांच साल पहले ऑफर नहीं होती। प्रतियोगितादेखकर मैंने कोई फैसला नहीं किया।अगर मैं यह सोचूंगी कि तो काम के अलावा मेरा ध्यान 50 अलग चीजों पर जाएगा मैं काम नहीं कर पाऊंगी। मेरा काम है फिल्म करना अपना सब कुछ देना।

    English summary
    Interview: Nushrratt Bharuccha talk about her latest solo horror movie Chhori release on Amazon Prime Video
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