»   » INTERVIEW: मुझे कोई 'बाहुबली' जैसी फिल्म क्यों ऑफर करेगा- नवाजुद्दीन सिद्दिकी

INTERVIEW: मुझे कोई 'बाहुबली' जैसी फिल्म क्यों ऑफर करेगा- नवाजुद्दीन सिद्दिकी

Written By:
Subscribe to Filmibeat Hindi

'मैं 25 सालों से सिर्फ और सिर्फ सिनेमा के बारे में ही सोचता हूं.. सिनेमा को सोचते ही उठता हूं और उसी के बारे में बातें करते सो जाता हूं..' यह कहना है बॉलीवुड के दमदार अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दिकी का। जिसकी फिल्मों की शैली ही अभिनय के प्रति उनके प्यार को दिखाती है।

इस साल तीन लगातार तीन फिल्मों में नजर आने वाले हैं। जुलाई में फिल्म मॉम, मुन्ना माइकल और बंदूकबाज़ बाबूमोशाई। वहीं, 2018 में आएगी बहुचर्चित बॉयोपिक फिल्म 'मंटो'। कहानी से लेकर किरदार- सभी फिल्में एक दूसरे से बिल्कुल जुदा हैं।

Nawazuddin Siddqui

हाल ही में फिल्म 'मॉम' के प्रमोशन के दौरान नवाजुद्दीन सिद्दिकी ने फिल्मीबीट से कुछ खास बातचीत की। जहां उन्होंने अपने फिल्मी करियर और आने वाली फिल्मों पर खुलकर बातें की। यहां संक्षेप में पढ़े इंटरव्यू के प्रमुख अंश- 

श्रीदेवी के साथ अनुभव

श्रीदेवी के साथ अनुभव

मुझे लगा सिनेमा को लेकर उनमें काफी धैर्य है। धैर्य ही नहीं बल्कि काफी पैशन भी है। वह शूटिंग के दौरान पूरे समय अपने किरदार में रहती हैं। बहुत ही ज्यादा मेहनती हैं।

मॉम क्या है?

मॉम क्या है?

फ़िल्म को लेकर मैं ज्यादा तो नहीं बता सकता क्योंकि यह एक सस्पेंस फ़िल्म है। लेकिन यह माँ- बेटी की कहानी है.. काफी इमोशनल है, लेकिन साथ ही थ्रिलर भी है। सभी एक्टर्स दमदार हैं।

मैं दयाशंकर कपूर का किरदार अदा कर रहा हूँ। जो दरियागंज का रहने वाला है, लेकिन काफी जुगाड़बाज़ है। फ़िल्म में मेरे किरदार पर थोड़ा प्रोस्थेटिक मेकअप का भी इस्तेमाल किया गया है।

मुन्ना माइकल, मॉम, मंटो.. किस फ़िल्म के किरदार से ज्यादा करीब हैं?

मुन्ना माइकल, मॉम, मंटो.. किस फ़िल्म के किरदार से ज्यादा करीब हैं?

मैं वही किरदार करता हूँ, जिसमें मुझे मज़ा आता है। मुझे जो किरदार मज़ेदार नहीं लगता, मैं करता ही नहीं। ज्यादातर मुझे ग्रे शेड वाले किरदार अपील करते हैं। क्योंकि इसमें काफी स्कोप होता है परफॉर्मेंस का।

मुन्ना माइकल में आपने डांस किया है, कैसा अनुभव रहा?

मुन्ना माइकल में आपने डांस किया है, कैसा अनुभव रहा?

डरावना.. मैंने रियल लाइफ में भी आज तक कभी डांस नहीं किया है। लेकिन प्रोड्यूर- डाइरेक्टर ने मुझपर प्रेशर डाला.. कि डांस करो। मैंने कई बार बोला.. कि मत करवाओ। लेकिन फिर जब मैं करने लगा तो मुझे अच्छा ही लगा, मुझे मज़ा आया। अब मैं सोच रहा हूं कि बीच बीच में डांस कर लिया करूं।

इस फिल्म में डांस के लिए मैंने दो- तीन तक रिहर्सल किया था।

आपकी हॉबी क्या है.. खुद को एक किरदार से निकालने के लिए आप क्या करते हैं?

आपकी हॉबी क्या है.. खुद को एक किरदार से निकालने के लिए आप क्या करते हैं?

मेरी तो हॉबी भी सिनेमा ही है। जब फिल्में नहीं करता हूं.. तो दोस्तों से मिलकर फिल्मों पर बातें कर लेता हूं। 25 सालों से दिनभर बस दिमाग में एक्टिंग ही रहता है।

मुझे कोई बाहुबली ऑफर ही नहीं करेगा....

मुझे कोई बाहुबली ऑफर ही नहीं करेगा....

नवाजुद्दीन ने कहा, बाहुबली जैसी फिल्म करना किसी का भी सपना है। लेकिन मुझे कोई क्यों देगा बाहुबली जैसी फिल्म। वह काफी बिग बजट फिल्म थी। 'हीरो' क्या होता है.. वह बाहुबली से ही पता चली लोगों को।

मंटो के लिए साहित्य पर कितना ध्यान दिया.. कितना पढ़ा?

मंटो के लिए साहित्य पर कितना ध्यान दिया.. कितना पढ़ा?

जब मैं NSD में था.. तो पूरी दुनिया का साहित्य पढ़ा हैं मैंने। मुझे बहुत अच्छा लगता था। अब तो उतना समय नहीं मिलता। रूस की साहित्य मुझे बहुत पसंद है। अब कोई भी किरदार करना होता है तो इंटरनेट से जानकारी ले लेता हूं।

सोशल मीडिया पर काफी कम एक्टिव रहते हैं.. क्यों?

सोशल मीडिया पर काफी कम एक्टिव रहते हैं.. क्यों?

मैं कंट्रोवर्सी में नहीं फंसना चाहता.. इसीलिए सोशल मीडिया से दूर रहता हूं। सोशल मीडिया को लेकर मेरी सोच खत्म हो चुकी है। जहां तक फैंस से जुड़ने का सवाल है.. तो मैं अपनी फिल्मों के जरीए फैंस से जुड़ता हूं।

बॉक्स ऑफिस आपके लिए कितना मायने रखता है?

बॉक्स ऑफिस आपके लिए कितना मायने रखता है?

उसके लिए अलग से फिल्म की जाती है। जहां सब मसाला डालना पड़ता है.. गाने, रोमांस, डांस.. ये सभी चीजें बॉक्स ऑफिस के लिए होती हैं..

लेकिन कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस से भी आगे के लिए बनती हैं। उनकी सफलता इसमें होती है कि उन्हें हज़ार साल के बाद भी देखा जा सकता है। वे फिल्में कभी पुरानी नहीं होतीं।

मंटो दिल के करीब

मंटो दिल के करीब

मंटो की जो सोच थी, उनका जो लेखन था.. वह आज भी.. और आने वाली 100 सालों तक भी सटीक बैठेगी। उनकी लेखनी में सच्चाई थी.. और सच्चाई कभी पुरानी नहीं होती। उनका एक ही कहना था-- कि मैं जो देखना हूं.. वही लिखता हूं।

मॉम के सेट पर कैसा था माहौल!

मॉम के सेट पर कैसा था माहौल!

सेट पर किसी को इज़ाजत ही नहीं देनी चाहिए कि बाहर की बात वहां हो। इसीलिए मुझे श्रीदेवी और अक्षय का एटिट्यूड काफी पसंद आया.. क्योंकि दोनों सिर्फ फिल्मों के बारे.. सीन के बारे में ही बातें करते थे। अक्षय खन्ना काफी टैलेंटेड एक्टर हैं.. उन्हें और भी फिल्में करनी चाहिए।

English summary
In an interview with Filmibeat, Nawazuddin Siddqui said, I can't do films like Baahubali.
Please Wait while comments are loading...