फिल्मों के किरदार ही अभिनेता की पहचान है: नसीरूद्दीन शाह

इन्हें इनके फिल्मों में योगदान के चलते राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया है। ये इनकी अभिनय क्षमता ही है जिसके कारण 65 साल के बाद भी उनकी फिल्म इंडस्ट्री में अलग पहचान बनी हुई है। ये फिल्मों में अलग तरह के किरदार के रूप में आज भी नज़र आ रहें है फिर चाहे आज के दौर में बनी इकबाल फिल्म हो जिसमें वह क्रिकेट प्रशिक्षक के रोल में नज़र आए थे, इश्किया हो, या फिर जिंदगी ना मिलेगी दोबार में बने पेंटर हो। इतना ही नहीं इसके बाद इनकी एक और फिल्म डर्टी पिक्चर भी पर्दे पर आ ही जाएगी।
नासीर को भारतीय सिनेमा मे उनके योगदान के लिए 2003 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। ये पिछले 10 सालों में अपने काम करने के तरीके में काफी बदलाव ला चुके हैं। इनके लिए कैरेक्टर ज्यादा महत्तवपूर्ण हैं फिर चाहे पर्दे पर वो बेहद कम समय के लिए ही क्यों ना हो।
हालफिलहाल नसीर अनुराग कश्यप प्रोडक्शन की फिल्म 'माइकल' में मुख्य भूमिका के रूप में नज़र आएंगे। इनका मानना है कि एक अभिनेता को अगर उसके किरदार के रूप में पहचाना जाए तो यह उसकी सबसे बड़ी सफलता है।
उम्र के इस पड़ाव पर आकर नसीर का कहना है कि वो फिल्मों का चयन सूझबूझ के साथ करते हैं और यह हर फिल्म के लिए अलग-अलग होता है। फिल्मों के चयन के समय इस बात पर वह जरा भी ध्यान नहीं देते कि यह फिल्म आगे चलकर कोई अवार्ड जितेगी या नहीं उन्हें सिर्फ किरदार से मतलब होता है।


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