एक समय में सिर्फ एक फिल्म करता हूं
विवेक उन कलाकारों में से हैं जिन्होंने अपनी कम फिल्मों के बावजूद अपना बहुत बडा दर्शक वर्ग तैयार किया है. फिलहाल युवाओं के चहिते विवेक ऑबेरॉय एक कोल्ड ड्रिंक 'फ्रेश फिज़्ज़ी" के विज्ञापन में नज़र आने वाले हैं. इस कोल्ड ड्रिंक की खासियत यह है कि इसमें विवेक युवाओं को एल्कोहल के चंगुल से बाहर निकलने के लिए प्रेरित करते नज़र आएंगे. इस विज्ञापन को म्यूज़िक एल्बम के रूप में ला रहे हैं उनके कज़िन भाई आनंद ऑबेरॉय जो एड मेकर है.
इस अल्बम में काम करने के लिए किस चीज़ ने आपको अधिक प्रेरित किया ?
दरअसल यह महज़ अल्बम नहीं है. यह काफी दिलचस्प कॉंसेप्ट है जिसके ज़रिए मैं एक कोला का विज्ञापन कर रहा हूं. यह एक कोल्ड ड्रिंक है जो एप्पल ज्यूस होने के बावजूद एल्कोहल फ्री है. इसके ज़रिए हम युवाओं को यह संदेश दे रहे हैं कि एल्कोहल के बिना भी हम अपनी ज़िंदगी में मज़ेदार पल बिता सकते हैं. पहले यह महज़ एक विज्ञापन था मगर प्रीतम ने इसमें इतना अच्छा संगीत दिया था कि इस विज्ञापन को हमनें एक खूबसूरत म्यूज़िक एल्बम में तब्दील कर दिया. इस विज्ञापन बनाम म्यूज़िक एल्बम को करने का एक कारण आनंद है तो दूसरा यह भी है कि यह किसी पारंपरिक विज्ञापन जैसा नहीं है.
अपने भाई आनन्द के बारे में कुछ बताइए ?
आनंद मेरा कज़िन भाई है जिसके साथ मैं एक घर में रहा हूं. संयुक्त परिवार में रहने के कारण हम एक दूसरे को काफी अच्छी तरह से समझते हैं. हम लोग एक साथ पले बढे हैं सो हम भाई से ज़्यादा एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त हैं. वह काफी सफल एड मेकर है। बारह साल से वह एक एड कंपनी चला आ रहा है. यह पहली बार है जब हम दोनों एक दूसरे के साथ काम कर रहे हैं. उसके साथ काम करना मेरे लिए काफी दिलचस्प अनुभव है क्योंकि एक तरफ वह मेरा भाई है और दूसरी तरफ मेरा निर्देशक है.
क्या इस एल्बम के बाद वह बतौर फिल्म निर्देशक आपको निर्देशित करे ऐसी कोई योजना है ?
अभी कुछ भी कहना बहुत जल्दबाज़ी होगी इसलिए अभी मैं कुछ नहीं कह सकता. पहले यह हिट हो जाए फिर शायद आगे की योजना बनें.
आपका लुक काफी अच्छा लग रहा है ?
जी हां. यह लुक मेरी अगली फिल्म 'मिशन इस्तानबुल" के लिए है. यह अपूर्वा के साथ मेरी दूसरी फिल्म है. इसमें मैं तुर्की कमांडो बना हूं. मेरे किरदार का नाम रिज़वान है.
सुना है इस फिल्म के लिए आप ताई चि सीख रहे हैं. साथ ही आपके सिक्स पैक एब्स के भी काफी चर्चे हैं ?
(हंसते हुए) हे भगवान. देखिए इस फिल्म का मुख्य आकर्षण मेरा ताई चि और सिक्स पैक एब नहीं है बल्कि मेरा किरदार है जो बहुत ज़बर्दस्त है. यह काफी दिलचस्प फिल्म है और मैं स्वयं को बहुत खुशनसीब समझता हूं कि एक बार फिर मुझे एक बेहतरीन किरदार निभाने का मौका मिल रहा है. (हंसते हुए) मैं इस किरदार के बारे में अधिक नहीं बता सकता क्योंकि हो सकता है बातों बातों में मैं इस फिल्म का वह रहस्य बतला दूं जो सरप्राइज़ पैकेज है. मगर मैं इस फिल्म के लिए बहुत उत्साहित हूं.
इसमें मिथुन चक्रवर्ती के 'कमांडो" का कितना भाग है ?
(हंसते हुए) क्या आप बंगाली हैं क्योंकि यह सवाल मुझे कोई सच्चा बंगाली (मिथुन भक्त) ही कर सकता है. जी नहीं मैं उस तरह का कमांडो नहीं हूं. दरअसल यह कमांडो सबके आकर्षण का केन्द्र है. या फिर आप उसे एक भूत की संज्ञा भी दे सकते है, कभी वह अचानक गायब हो जाता है और कभी भी कहीं भी अचानक हाज़िर हो जाता है. यह किरदार कुछ कुछ आपके उन रोचक कहानियों के तिलस्मी किरदारों की तरह है जिनके बारे में आपने बचपन में पढा है. वह लार्जर दैन लाइफ होने के बावजूद रियल है.
एक्टिंग के साथ विशेष रूप से आप अपने लुक्स पर हमेशा काफी काम करते है फिर वह चाहे 'कंपनी" का 'चंदू" हो या 'शूट आउट एट लोखंडवाला" का 'माया डोलस" हो. 'मिशन इस्तानबुल" के 'रिज़वान" के लिए किस तरह की तैयारी की है ?
सबसे पहले तो मैं आपको धन्यवाद देना चाहूंगा. सच कहूं तो 'माया डोलस" के किरदार के लिए मैंने बहुत रिसर्च किया था और उस वक़्त मुझे जितना भी पता चला था उस आधार पर मैंने अपने किरदार को काफी पावरफुल बनाने की कोशिश की थी मगर इसफिल्म में लुक का पूरा भार अपूर्वा ने अपने सिर पर उठाया है. उसका कहना है कि हम दोनों बैक टू बैक दो फिल्में कर रहे हैं सो मैं चाहता हूं कि इस फिल्म में तुम 'माया" से बिल्कुल अलग लगो. यही वजह है कि लुक्स के साथ साथ परफॉरमंस में भी काफी बदलाव लाया गया है जिससे 'रिज़वान", 'माया" से अलग लगे. 'रिज़वान", 'माया" की तरह शहर का भाई नहीं है वह काफी अनुशासित है, जिसका एक मिशन है. हालांकि काफी लोगों का कहना है कि अगर कमांडो है तो बाल छोटे होने चाहिए, यूनिफॉर्म होना चाहिए मगर इस फिल्म में एक ट्विस्ट है जिसे आप फिल्म देखकर ही जानेंगे.
क्या वजह है 'मस्ती" के बाद 'प्यारे मोहन" और 'फूल एंड फाइनल" में लोगों ने आपकी कॉमेडी को नहीं सराहा. क्या 'मस्ती" की तरह कॉमेडी दुबारा करना चाहेंगे ?
बिल्कुल. दरअसल मैं कुछ कॉमेडी फिल्मों की कहानियां सुन भी रहा हूं. देखते हैं क्या होता है.
हमनें सुना है इसके अलाव आप एक तमिल हिट फिल्म '7जी रेनबो कॉलोनी" का रिमेक और अनुभव सिन्हा की अनटाइटल्ड फिल्म कर रहे हैं ?
देखिए मैं एक समय में सिर्फ एक फिल्म ही करता हूं. अभी मैं काफी कहानियां सुन रहा हूं. हो सकता है कोई कहानी मुझे पसंद आ जाए तो मैं ज़रूर उस पर सोचूंगा. फिलहाल मैं 'मिशन इस्तानबुल" कर रहा हूं और इसी पर अपना ध्यान केन्द्रित रखना चाहता हूं. जब यह फिल्म खत्म होगी तो मैं अपने लिए थोडा सा ब्रेक लूंगा और फिर उस फिल्म के किरदार को थोडा और दिलचस्प बनाने की कोशिश करूंगा. यह मेरी हमेशा से आदत है.


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