नारीत्व का उत्सव है 'मिर्च'
'गॉडमदर' जैसी बेहतरीन फिल्म बना चुके राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक विनय शुक्ला अपनी नई फिल्म 'मिर्च' में भी महिला मुद्दों को उठा रहे हैं। शुक्ला कहते हैं कि उनकी यह फिल्म नारीत्व का उत्सव है। शुक्ला ने कहा, "'मिर्च' नारीत्व का उत्सव है। फिल्म में चार कहानियां हैं। ये सभी कहानियां बताती हैं कि जब एक महिला अपने प्रेमी के साथ रंगे हाथों पकड़ ली जाती है तो क्या होता है और वह उस स्थिति से बेदाग निकलने के लिए वह किस तरह छटपटाती है।"
उन्होंने कहा, "लेकिन इसमें महिलाओं को नकारात्मक नहीं दिखाया गया है। इसमें बताया गया है कि यदि एक महिला अपने दिमाग का इस्तेमाल करे तो वह किसी भी स्थिति से उबर सकती है। 'मिर्च' का सार और संदेश यही है। महिलाओं को बिना कुछ सोचे इसे देखने के लिए जाना चाहिए। वे इसे पसंद करेंगी।"
बिग पिक्चर्स के निर्माण में बनी 'मिर्च' एक संघर्षरत फिल्मकार मानव (अरुणोदय सिंह) की कहानी है जो अपनी फिल्म के लिए महिलाओं की मुक्ति के मुद्दों पर आधारित चार कहानियों को एक साथ बुनता है। शुक्ला ने अपनी इस फिल्म में बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्रियों कोंकणा सेन शर्मा, राइमा सेन, शहाना गोस्वामी और इला अरुण के साथ काम किया है। फिल्म में श्रेयस तलपड़े, बोमन ईरानी और प्रेम चोपड़ा भी हैं।
न्यूयार्क, न्यूजर्सी और मुम्बई फिल्मोत्सव में प्रदर्शित हो चुकी यह फिल्म बड़े पर्दे पर देर से उतरेगी। शुक्ला एक सक्रिय पटकथा लेखक व संवाद लेखक हैं। वह पिछले तीन दशकों में 'हम पांच', 'रात', 'राम-जाने' और 'विरासत' जैसी 25 फिल्मों के लिए काम कर चुके हैं। उन्होंने 1981 में आई फिल्म 'समीरा' से निर्देशन की शुरुआत की। उनके निर्देशन में बनी और 1999 में प्रदर्शित दूसरी फिल्म 'गॉडमदर' को छह राष्ट्रीय पुरस्कार मिले थे।


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