इंटरव्यू- टीवी का खेल नहीं समझते करन जौहर
मुंबई। फिल्मकार करन जौहर ने बॉलीवुड में कई सफतलम फिल्में दी हैं और वह टेलीविजन पर जज व टॉक शो प्रस्तोता के रूप में भी कामयाब रहे हैं। इसके बाद भी करन कहते हैं कि वह टीवी के लिए फंतासी कार्यक्रम बनाने के विषय में नहीं सोचते। उनका कहना है कि इसकी वजह यह है कि वह इस माध्यम को ठीक से नहीं समझते हैं।
करन ने 1998 में अपनी पहली फिल्म 'कुछ कुछ होता है' दी थी और इसी के साथ वह लोकप्रिय हो गए थे। इसके 15 साल बाद उन्होंने 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर' के रूप में वैसी ही कहानी दोबारा पेश की। वह कहते हैं कि उन्हें टेलीविजन के फंतासी कार्यक्रमों व रेटिंग सिस्टम के विषय में ज्यादा जानकारी नहीं है।
उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, "मैं भारतीय टेलीविजन के लिए फंतासी कार्यक्रमों के निर्माण पर इच्छुक नहीं हूं। इसके पीछे कारण यह है कि मैं इस माध्यम को नहीं समझता। मैं एक जज या प्रस्तोता हो सकता हूं। मैं एक व्यक्ति के रूप में ऐसा कर सकता हूं। लेकिन टेलीविजन सामग्री तैयार करने के लिए आपको इसका खेल मालूम होना चाहिए।"
करन ने कहा, "आपको पता होना चाहिए कि टीआरपी कैसे बढ़ाई जा सकती है और मुझे लगता है कि मैं इसके लिए सही चुनाव नहीं हूं। मैं इसमें शामिल नहीं हो सकता और मैं ऐसा नहीं हूं।"
इकतालीस वर्षीय करन टीवी के लिए 'कॉफी विद करन' चैट शो के तीन संस्करणों का सफल प्रस्तुतिकरण कर चुके हैं। बाद में उन्होंने 'लिफ्ट करा दे' बनाया। वह 'झलक दिखला जा 5' और 'इंडियाज गॉट टैलेंट 4' रिएलिटी कार्यक्रमों में जज रहे।
एक समय था जब टीवी ने स्मृति ईरानी, साक्षी तंवर, राम कपूर और रोनित रॉय जैसे सितारे दिए लेकिन अब ऐसा नहीं है।
उन्होंने कहा, "टीवी सितारों की लोकप्रियता कम होती जा रही है। अब हमारे पास और राम कपूर व रोनित रॉय नहीं हैं। राम और साक्षी को छोड़कर और कौन है जो आज भी लोकप्रिय है। मुझे लगता है कि हमारी लोकप्रियता का अनुपात कम होता गया है। मुझे नहीं लगता कि अब टीवी सितारे बनाती है। मुझे नहीं लगता कि टीवी सितारों के लिए यहां दीवानापन है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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