कभी परिवार से लाड़ प्यार नहीं मिला- कंगना रनौत!

गैंग्सटर ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को एक खूबसूरत और लीक से हटकर काम करने में विश्वास रखने वाली एक्ट्रेस दी। लेकिन अपनी पहली फिल्म के सुपर हिट होने के बावजूद इस एक्ट्रेस का किरयर कई उतार चढ़ाव से भरा रहा क्योंकि इस एक्ट्रेस को फिल्मों में आई कैंडी नहीं बनना था। हम बात कर रहे हैं कंगना रनौत की जिन्होंने गैगस्टर की अपार सफलता के बाद एक नये निर्देशक की तनु वेड्स मनु फिल्म को हां कहा और उसके बाद लगातार उन कहानियों और फिल्मों की तलाश में रहीं जिनमें कुछ अलग हो कुछ नया हो। रज्जो के बाद अब कंगना की फिल्म क्वीन काफी चर्चा में है। कंगना का कहना है कि निजी जिंदगी में वो क्वीन के किरदार रानी से बिल्कुल भी मेल नहीं खातीं लेकिन उन्होने इस किरदार को निभाने के लिए खुद में रानी को ढूंढ़ा और उसे ही परदे पर उतारा है।

पेश हैं इंटरव्यू के कुछ महत्वपूर्ण अंश-

आजकल महिला प्रधान फिल्मों का दौर सा चल पड़ा है और इस दौर का आप एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। क्या कहना चाहेंगी इस बारे में?

पहले 80 90 में हीरो प्रधान फिल्में ही बनने लगी थीं उसके बाद रोमांटिक फिल्मों का दौर आया और उसके बाद कुछ समय तक साउथ की रीमेक फिल्में ही बनने लगीं। तो दौर तो चलता ही रहता है। आजकल महिला प्रधान फिल्मों का दौर चल रहा है डर्टी पिक्चर, कहानी जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिस्पॉंस पाया है तो उम्मीद है कि क्वीन को भी दर्शक ऐसा ही रिस्पॉंस दें ताकि इस तरह की फिल्में आती रहें कभी बंद ना हों।

क्वीन फिल्म एक लड़की की कहानी है, इस लड़की का किरदार करने के बाद आप खुद में क्या बदलाव महसूस कर रही हैं?

क्वीन किसी एक लड़की की कहानी है या उसकी कोई प्रेरणादायक सफर है। ये किसी भी आम लड़की की कहानी हो सकती है। हम ऐसे समाज में रहते हैं जहां सबकुछ पहले से ही प्लान होता है। 21 साल की उम्र में शादी, 25 साल की उम्र में बच्चे। यहां तक कि हमारी बीमा इंश्योरेंस भी सब प्लान होते हैं। ऐसे प्लान्ड समाज में ये किसी लड़के के साथ भी हो सकता था और किसी लड़की के साथ भी। ये फिल्म सभी के लिए है। मुझे इस किरदार ने काफी बदल दिया। ये एक ऐसी लड़की का किरदार है जो कि खुद पर बिल्कुल भी यकीन नहीं है, विश्वास नहीं है। मैं खुद भी ऐसे ही समाज से हूं जहां पर तेज से बोलने पर स्कूल में डांट पड़ती है, हर चीज को करने से पहले दस बात सोचने को कहा जाता है। ऐसे में हम बचपन से ही दब्बू हो जाते हैं। अगर ऐसी लड़की से मैं मिलती तो शायद मैं सोचती कि अरे ये ऐसे कैसी है। लेकिन अगर अब मैं ऐसी किसी लड़की से मिलूंगी तो मैं उसे समझ सकती हूं।

आपने हाल ही में कहा कि फिल्मों में एक्टर्स को हमेशा एक्ट्रेसेस से कम पैसे मिलते हैं, कम तवज्जो मिलती है। लेकिन आपको हमेशा आपकी फिल्मों के लिए सबसे ज्यादा तारीफें मिलीं। अभी भी आपको ऐसा क्यों लगता है कि ये मेन ओरियेंटेड सोसाइटी है?

मैं सिर्फ अपने लिए बात नहीं करती। मैं सभी को साथ लेकर चलती हूं, सोचती हूं। हर एक वर्ग में ये समस्या है कि लड़कियों को लड़कों से कम पैसे मिलते हैं। मुझे अगर फिल्म करने से फिल्म के बिजनेस का 10 परसेंट ही मिलता है तो ये कहां का न्याय है। अगर मैं खुद निजी जीवन में इस चीज के साथ स्ट्रगल कर रही हूं आगे बढ़ रही हूं ले्किन मैं बाकी सभी को देखते हुए गलत के खिलाफ आवाज उठाना पसंद करती हूं।

आपका फिल्मी करियर काफी उतार चढ़ाव से भरा हुआ है। किस तरह से इसे आप शब्दों में ढालेंगी। आगे के क्या प्लान हैं?

मुझे अपने करियर में रातों रात स्टारडम नहीं मिली। गैंग्सटर फिल्म के बाद मुझे अक्सर थोड़े निगेटिव किरदार मिलते थे। मैंने डर्टी पिक्चर नहीं की बल्कि नये निर्देशक के साथ तनु वेड्स मनु जैसी फिल्म की। उसके बाद मुझे कहीं ना कहीं महसूस हुआ कि मैं फिल्मों में आई कैंडी नहीं बनना चाहती। फिर मैंने क्वीन, रिवॉल्वर रानी जैसी फिल्में साइन कीं। मैं बॉलीवुड में भी एक्टिंग के अलावा भी दूसरी फील्ड में कुछ करना चाहती हूं। कुछ स्क्रिप्ट लिखना चाहती हूं, फिल्मों का निर्देशन करना चाहती हूं। मुझे बायोग्रॉफी बहुत पसंद हैं। अगर कोई अच्छी बायोग्राफी मिले तो मैं उसका निर्देशन करना और उसमें एक्टिंग भी करना पसंद करुंगी।

इंटरव्यू के कुछ अंश-

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