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Exclusive Interview..अगर मैं बॅालीवुड सुपरस्टार होता तो ऐसा ही करता -दिलजीत दोसांझ

Posted By: PRACHI DIXIT
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दिलजीत दोसांझ उन चुनिंदा एक्टरों में से एक हैं जो कि अपनी माटी से अलग खुद की पहचान कायम करने में कामयाब रहे हैं। पिछले साल उड़ता पंजाब से बेस्ट डेब्यू की ट्रॉफी अपने झोली में बटोरने के बाद दिलजीत दोसांझ इस साल अनुष्का शर्मा के साथ फिल्लौरी की रूहानी प्रेम कहानी के साथ वापसी कर रहे हैं।

Diljit dosanjh

अनुष्का शर्मा इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रही हैं। एक भूत की प्रेम कहानी के ईद-गिर्द बुनी गई फिल्लौरी ने दर्शकों को रिलीज से पहले प्रभावित किया है। इसके साथ दिलजीत और अनुष्का की आॅन स्क्रीन जोड़ी भी बॅालीवुड की फ्रेश जोड़ी में शामिल हो गई है। 

बहरहाल,हाल ही में फिल्मीबीट से हुई खास मुलाकात में दिलजीत दोसांझ ने अपनी निजी और प्रोफेशनल जिंदगी से जुडें हुए खास मुद्दों पर अपनी विशेष राय पेश की। 

यहां पढ़ें इंटरव्यू के प्रमुख अंश..

अनुष्का हैं मिसाल

अनुष्का हैं मिसाल

अनुष्का शर्मा के साथ अपने काम करने के अनुभव पर दिलजीत कहते हैं कि अनुष्का शर्मा बेहद खूबसूरत अदाकार हैं। वह बेहतरीन परफ़ॉर्मर हैं। उन्हें देखकर गर्व की अनुभूति होती है। अनुष्का शर्मा का फ़िल्मी बैकग्राउंड से किसी तरह का ताल्लुक नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने जमीन से लेकर फलक तक का सफर तय किया है। इतनी कम उम्र में उन्होंने अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस खड़ा कर दिया है। यह किसी भी एक्टर के लिए बड़ी बात है। अनुष्का एक मिसाल हैं। बतौर निर्माता भी उसी रफ्तार से आगे बढ़ रही हैं जिस तरह उन्होंने एक्ट्रेस के तौर पर खुद को बुलंदी पर पहुंचाया है।

सूफियाना संगीत

सूफियाना संगीत

पंजाब के रॉक स्टार होने के बावजूद दिलजीत खुद को म्यूजिक की जानकारी में छोटा मानते हैं। वह बताते हैं कि इस फिल्म का संगीत सुकून से भरा है। मैं संगीत प्रेमी की नजर से ही इस बारे में बता सकता हूं। इस फिल्म के संगीत से लेकर गाने की बोल तक मेरा किसी भी तरह का कोई लेना देना नहीं है। इस फिल्म का म्यूजिक बनने के बाद मुझे इसके बारे में ज्ञात हुआ। हाल ही में बद्रीनाथ की दुल्हनिया भी रिलीज हुई है। इस फिल्म का म्यूजिक भी दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ है। फिल्लौरी की म्यूजिक टीम भी कमाल की है। दूसरी तरफ फिल्म में मेरी एंट्री सबसे आखरी में हुई। मेरे ख्याल से फिल्म शुरू होने से दो महीने पहले।इस वजह से इस फिल्म के म्यूजिक के तैयार होने के बाद मैं इस फिल्म से जुड़ा हूं।

करियर के लिए गेम चेंजर

करियर के लिए गेम चेंजर

दिलजीत अपने जीवन के इन तीन सालों को सबसे प्रमुख मानते हैं। उन्होंने कहा कि साल 2003 में मैंने अपना पहला पंजाबी एल्बम लांच किया। वहीं से मेरे करियर में बड़ा बदलाव आया। 2011 में मैंने पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा। 2016 में उड़ता पंजाब से बॉलीवुड में। लोगों के लिए महज यह गिनती के साल होंगे। लेकिन मेरे लिए यह तीन साल कैसे बड़े बन गए। यह मुझे पता भी नहीं चला। मेरे करियर में जो भी टर्निंग पॉइंट आए हैं वो अपने आप आते चले गए। मैंने सिर्फ कोशिश की है। मेरी कोशिश कब मेरे लिए बड़ी बन गयी इसका मुझे अंदाजा भी नहीं हुआ। पंजाबी फिल्मों की तरह हिंदी फिल्मों में भी मुझे सामने से मौके मिलने शुरू हुए।

उड़ता पंजाब से कुछ नहीं बदला

उड़ता पंजाब से कुछ नहीं बदला

साल 2016 में उड़ता पंजाब से दिलजीत ने हिंदी सिनेमा में अपना पहला कदम रखा। इस फ़िल्म ने भले ही दिलजीत को बॉलीवुड के नए एक्टरों के बीच लाइमलाइट में ला दिया हो। लेकिन उनके लिए अभी तक हालात बदले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उड़ता पंजाब के बाद दर्शकों के नजरिए में मुझे लेकर जो बदलाव आये हैं इस का इल्म मुझे अभी तक नहीं हुआ है। हिंदी सिनेमा की दृष्टि से मेरे लिए अभी भी पहले जैसे हालात हैं। अभी भी मेरा फिल्म और कहानी के लिहाज से मेरा संघर्ष जारी है। एक बेहतरीन स्क्रिप्ट की तलाश करना मेरे लिए हर दिन नई चुनौती लेकर आता है। मैं अभी भी यही कोशिश करता हूं कि कोई अच्छा गाना बन जाए। किसी अच्छी फिल्म में काम करने का मौका मिल जाए। मैं खुद के लिए अभी भी गांव का एक साधारण लड़का हूं जो काम की तलाश में है।

 क्लाइमेक्स बनी हां की वजह

क्लाइमेक्स बनी हां की वजह

उड़ता पंजाब के बाद फिल्लौरी जैसी फिल्म से जुड़ना वह खुद के लिए फायेदमंद मानते हैं। दिलजीत कहते हैं कि फिल्लौरी की कहानी इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी है। पहली बार जब मैंने इस फिल्म की कहानी सुनी तो ठीक लगी। सोचा कि बढ़िया कहानी है। स्क्रिप्ट के अंत यानी कि क्लाइमेक्स तक पहुंचने तक इस फिल्म को लेकर मेरी सोच बदल गयी। अपने अंत तक आते हुए इस फिल्म ने अलग मोड़ ले लिया। यह एक क्लासिक फिल्म बन गयी। जुबान से केवल एक ही शब्द निकला कि यह कमाल की फिल्म है। इस फिल्म का हिस्सा नहीं बनना मेरे लिए सही नहीं होता। सिर्फ क्लाइमेक्स के कारण मैंने इस फिल्म के लिए हां कह दी।

मस्तमौला किरदार

मस्तमौला किरदार

अपने किरदार पर विस्तार से बात करते हुए दिलजीत ने कहा कि मेरा किरदार अलग माहौल मे सेट है। लुक से लेकर स्वभाव तक पूरी तरह से एक मस्तमौला किरदार है। फिलहाल ट्रेलर से इस बात का अंदाजा नहीं लग रहा है लेकिन मेरा किरदार थोड़ा सा बिगड़ा हुआ कलाकार है। यह फिलहाल ट्रेलर में नहीं दिखाया गया है। फिल्म देखकर इस पर से पर्दा उठेगा।

पैसों का अंतर

पैसों का अंतर

पंजाब और हिंदी सिनेमा में अपने अब तक के अनुभव पर राय जाहिर करते हुए दिलजीत कहते हैं कि दोनों ही फिल्म इंडस्ट्री मेरे दिल के करीब है। दोनों में ही मेरे काम करने का अनुभव सुखद रहा है। आगे भी इसी तरह का सिलसिला जारी रहेगा। लेकिन इन दोनों में जो सबसे बड़ा अंतर है वह पैसों का है। हमारे यहां पर उतना पैसा नहीं है जितना कि बॉलीवुड में हैं। पंजाब में सिनेमाहॉल की संख्या कम है। इस वजह से बिजनेस अधिक नहीं होता है। यहां स्क्रीन की संख्या अधिक है इस वजह से कमाई दुगनी होती है। बाकी काम करने का तरीके एक समान है उसमें किसी तरह का अंतर नहीं है।

स्टारडम जरूरी

स्टारडम जरूरी

स्टारडम पर दिलजीत कहते हैं कि पंजाब फिल्म इंडस्ट्री बेहद छोटी सी है। हमारे यहां लोग एक्टर से एक खास कनेक्शन महसूस करते हैं। अगर कोई भी एक्टर दर्शकों से किरदार के जरिए जुड़ाव का अहसास नहीं कर पाते हैं तो उनके लिए हालात कठिन हो जाते हैं। ठीक इसी तरह यहां के सुपरस्टार पर भी यही लागू होता है। उनका अपने फैंस के साथ तगड़ा कनेक्शन है। इसी वजह से वह बॉलीवुड के सुपर स्टार हैं। दर्शकों को लगता है कि ये एक्टर हमारी तरह है। मैं भी बॅालीवुड का स्टार होता तो यही करता।

फिल्मों का चयन

फिल्मों का चयन

हार्ड हीटेड यह शब्द दिलजीत ने बॉलीवुड में आकर सीखा है। वह समझ्ते हैं कि कमर्शियल सिनेमा और एक हार्ड हीटेड सिनेमा में अंतर होता है। सच कहूं तो मुझे इन सब के बारे में अधिक जानकारी नहीं है। इसके साथ में इस मामले में ज्यादा सोचने की जरुरत भी नहीं महसूस करता हूं। मेरे लिए एक फिल्म केवल बेहतरीन कहानी और किरदार तक सीमित है। अब दर्शक उस फिल्म को कैसे देखते हैं यह फिल्म के जोनर पर निर्भर करता है। उड़ता पंजाब के समय मुझे लगा कि कहानी अच्छी है। इसे कर लेना चाहिए। मैंने नहीं देखा कि यह ब्लॉकबस्टर होगी या इस फिल्म के लिए सिनेमा हॉल भरा हुआ होगा। सिर्फ नाचने गाने के लिए मुझे फिल्म नहीं करना है। नाच- गाने की चाहत मेरी खुद के म्यूजिक एल्बम से पूरी हो जाती है। मैं फिल्में खुद की खुशी के लिए करता हूं।

बायोपिक कतार में

बायोपिक कतार में

बायोपिक की तरफ अब दिलजीत अपने कदम बढ़ाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दो- तीन बायोपिक को लेकर मेरी बात चल रही है। यह बायोपिक पंजाब से जुड़ी कहानी होगी जो कि हिंदी और पंजाबी दोनों में रिलीज हो सकती हैं। इसके अलावा हिंदी की कोई स्क्रिप्ट पसंद आयी तो जरूर काम करूंगा।

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    English summary
    In conversation Diljit dosanjh share some interesting point related with his Bollywood Journey..Here read full story

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